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मुख्यमंत्री की हाईब्रिड याेजना:जिले के 23 सरकारी और 4 निजी अस्पतालों में 5 लाख तक का मुफ्त इलाज

बांसवाड़ा3 महीने पहले
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  • आयुष्मान और भामाशाह बीमा योजना काे जाेड़कर बढ़ाया पैकेज, पहले 3.30 लाख तक के इलाज का प्रावधान था
  • अब तक जिले में सिर्फ चार निजी अस्पतालों ने किया आवेदन

आयुष्मान भारत महात्मा गांधी राजस्थान स्वास्थ्य बीमा योजना की शनिवार से शुरुआत हाे गई। केंद्र सरकार की यह योजना 1 सितंबर 2019 से चल रही है। राज्य सरकार ने नए प्रावधानों के साथ इसे नया नाम देकर री-लॉन्च किया है। योजना में इलाज की सीमा 3.30 लाख सालाना से बढ़ाकर 5 लाख रुपए की गई है।

सामान्य बीमारियों के लिए 50 हजार और गंभीर बीमारियों के लिए 4.50 लाख तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध होगा। सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ इससे अटैच निजी अस्पतालों में मुफ्त इलाज मिलेगा। याेजना में पैकेज कवर करने के लिए जिले के 23 सरकारी अस्पताल सीएचसी से जुड़े हुए हैं। इसके अतिरिक्त 4 निजी अस्पतालों ने योजना से जुड़ने के लिए आवेदन किया।

इसमें लड्ढा हॉस्पिटल का आवेदन पेंडिंग चल रहा है। वहीं दूसरा अस्पताल श्रीजी हॉस्पिटल है जाे जिसकी एसईसी में क्वेरी चल रही है। मेवाड़ हॉस्पिटल डीईसी से अप्रूव्ड हाे चुका है और ज्ञायक हॉस्पिटल के संबंध में एचओएस से एसईसी में रिप्लाई दिया है। यानि अगले दाे से तीन दिन में इन्हें योजना से जाेड़ने की कार्रवाई पूरी हाे जाएगी। योजना के शुभारंभ अवसर पर बांसवाड़ा से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्यमंत्री अर्जुनसिंह बामनिया, विधायक महेंद्रजीत सिंह बामनिया, सभापति जैनेंद्र त्रिवेदी, कलेक्टर अंकित कुमारसिंह, एडीएम नरेश बुनकर, एसीईओ राजकुमारसिंह, एसडीएम पर्वतसिंह चुंडावत, सीमएमएचओ डाॅ. एचएल ताबियार सहित विभाग के कर्मचारी भी जुड़े रहे।

मंत्री ने कहा- लड्ढा अस्पताल का नाम हटाओ, यहां अवैध वसूली हाेती है

कार्यक्रम की शुरुआत में सीएमएचओ डाॅ. एचएल ताबियार ने मंत्री अर्जुन बामनिया और विधायक महेंद्रजीत मालवीया काे योजना से संबंधित जानकारी और योजना से बांसवाड़ा में जुड़े अस्पतालों के बारे में बताया। निजी अस्पतालों की सूचना में पहला नाम लड्ढा गायनिक हॉस्पिटल का आया।

जिसे देखकर मंत्री ने नाराजगी जताई। बामनिया ने सीएमएचओ से कहा कि इस अस्पताल काे प्राथमिकता किस आधार पर दी है। इसे पैनल से हटा देना चाहिए, क्याेंकि यह अस्पताल क्राइटेरिया पर खरा नहीं उतरता है। दूसरा यहां अवैध वसूली ज्यादा हाेती है। अस्पताल में मरीजों से भी राशि ली जाती है और बीमा कंपनी से भी पैसा उठा लिया जाता है। जब लाेग योजना का लाभ देने की बात कहते हैं ताे उन्हें इनकार कर दिया जाता है।

याेजना से जुड़े सवालों के जवाब

निशुल्क दवा-जांच योजना पहले से चल रही है?
- निशुल्क दवा-जांच योजना में जाे लाेग आते हैं उन्हें और हॉस्पिटल में जाे भर्ती हाेते हैं उन्हें भी इस बीमा योजना का फायदा मिलेगा।
नई याेजना काे शुरू करने में देरी क्याें?
- काेराेना संक्रमण के कारण टेंडर में देरी हुई। पुरानी योजना में जाे खामियां सामने आई थी, उसमें संशाेधन करने से समय लगा।

पहले सरकार की ओर से प्रीमियम नहीं देने से परेशानी हुई थी?
- इस स्कीम में प्रीमियम कब और कितना दिया जाएगा वाे स्कीम की गाइडलाइन में निर्धारित है। इसके अलावा इंश्योरेंस कंपनी अस्पताल का क्लेम कितने समय में डिस्पोज करेगी उसकी भी टाइमलाइन सॉफ्टवेयर में शामिल की गई है।

सख्ती... फर्जीवाड़ा राेकने के लिए एंटी फ्रॉड यूनिट बनाई
योजना में गड़बड़ी रोकने के लिए एंटी फ्रॉड यूनिट बनाई गई है। पहले भामाशाह योजना में भी खूब गड़बड़ियां सामने आई थीं। एंटी फ्रॉड यूनिट कई स्तर पर निगाह रखेगी। योजना में दो साल पुराने अस्पतालों को ही इंपेनल किया गया है। जिला और राज्य स्तर की कमेटी मिलकर अस्पताल का चयन करेगी।

भर्ती से 5 दिन पहले, डिस्चार्ज के बाद 15 दिन तक का मेडिकल खर्च भी मिलेगा
अस्पताल में भर्ती से 5 दिन पहले और डिस्चार्ज के 15 दिन बाद तक का मेडिकल खर्च भी मुफ्त पैकेज में शामिल किया गया है। लाभार्थी को अस्पतालों में योजना का लाभ लेने के लिए आधार कार्ड या जनाधार कार्ड दिखाना होगा। सरकार का दावा है कि स्वास्थ्य बीमा योजना में सालाना 1.10 करोड़ परिवारों को मुफ्त इलाज मिल सकेगा। योजना पर सरकार हर साल 1400 करोड़ रुपए वहन करेगी। योजना के नए फेज में 1401 की जगह 1572 पैकेज शामिल होंगे। कुछ समय बाद इंटर स्टेट पोर्टिबिलिटी भी शुरू करने की तैयारी है, जिससे अन्य राज्यों में भी मुफ्त इलाज करवाया जा सकेगा।

खाद्य सुरक्षा योजना में जुड़े लाेग पात्र
केंद्र की प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना लागू करने की जगह सरकार ने हाइब्रिड स्वास्थ्य बीमा योजना बनाई है। कार्यक्रम में सीएम गहलोत ने बताया कि केंद्र की बीमा योजना अगर लागू करते तो सामाजिक आर्थिक सर्वे 2011 में शामिल 60 लाख परिवार ही पात्र होते। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के पात्र 98 लाख परिवार हैं। राजस्थान सरकार ने केंद्र की योजना में पात्र लोगों के साथ खाद्य सुरक्षा के पात्र लोगों को भी स्वास्थ्य बीमा योजना में जोड़ा है। राजस्थान की स्वास्थ्य बीमा योजना में सामाजिक आर्थिक जनगणना और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना दोनों के पात्रों को शामिल किया है।

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