बेणेश्वर में मंच पर होंगे 3 गांधी:3 नदियों के संगम पर गांधी परिवार की तीसरी सभा, 3 राज्यों पर नजर

बांसवाड़ा2 महीने पहलेलेखक: डॉ. सुशील सिंह चौहान

डूंगरपुर में तीन नदियों (माही, सोम व जाखम) के संगम पर स्थित बेणेश्वर में 16 मई को प्रस्तावित कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी की सभा के सियासी मायने भले कुछ भी हों, लेकिन इस मौके पर तीन के तालमेल वाले अनूठे समीकरण भी बन रहे हैं, जो एक संयोग है। वागड़ के प्रयागराज (बेणेश्वर) के त्रिवेणी संगम पर यह गांधी परिवार की ये तीसरी सभा होगी, जिसमें तीन गांधी (सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी) एक साथ मंच पर होंगे।

इस मंच के माध्यम से कांग्रेस तीन राज्य (गुजरात, राजस्थान व मध्यप्रदेश) के आदिवासी वोटर्स को लुभाने की कोशिश करेगी। तीन के समीकरण यहीं खत्म नहीं होते। इस वागड़ की धरा से तीन राजनीतिक पार्टियां (कांग्रेस, बीजेपी व बीटीपी) विधानसभा चुनाव पर निशाना साधेंगीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीते 14 साल के दौरान यहां तीन बार सभाएं कर चुके हैं।
14 साल बाद आएंगी सोनिया गांधी
बेणेश्वर में वर्ष 2008 में UPA चेयरमैन के तौर पर सोनिया गांधी ने चुनावी सभा को संबोधित किया था। इसके बाद 2018 और 24 अप्रैल 2019 को राहुल गांधी ने यहां सभा की। अब 2022 में एक बार फिर गांधी परिवार बेणेश्वर के मंच पर होगा। इसी प्रकार गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए नरेंद्र मोदी ने 14 साल में दो बार बेणेश्वर पर राजनीतिक सभाएं की हैं। नरेंद्र मोदी ने 26 नवंबर 2018 को सभा की थी।
इन जगहों पर रहेगा फोकस
इस मंच के माध्यम से गुजरात की 27 और राजस्थान की 25 आदिवासी सीटों पर फोकस रहेगा। दक्षिण राजस्थान के इस धाम से प्रदेश के अलावा पश्चिमी मध्यप्रदेश और उत्तरी गुजरात के आदिवासी बाहुल्य जिलों के समीकरण बनेंगे। राजस्थान के बांसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर, प्रतापगढ़, गुजरात के संतरामपुर, दाहोद, पंचमाल तथा मध्यप्रदेश के धार, रतलाम और झाबुआ जैसे जिले कवर हो सकेंगे।

यह स्थान आदिवासी संस्कृति से जुड़े इतिहास के कारण विशेष पहचान रखता है। यहां लगने वाले आदिवासी महाकुंभ में देश-दुनिया से श्रद्धालु पहुंचते हैं। (फाइल फोटो)
यह स्थान आदिवासी संस्कृति से जुड़े इतिहास के कारण विशेष पहचान रखता है। यहां लगने वाले आदिवासी महाकुंभ में देश-दुनिया से श्रद्धालु पहुंचते हैं। (फाइल फोटो)

विश्व का सबसे बड़ा आदिवासी मेला
बेणेश्वर के बहाने सोनिया गांधी की सभा में भीड़ जुटाने में भी कांग्रेस के जिम्मेदारों को दिक्कत नहीं आएगी। मावजी महाराज और मावपंथी विचारधारा के कारण ही बेणेश्वर में विश्व का सबसे बड़ा आदिवासी मेला भरता है। धार्मिक आस्था के बीच लोग इस सभा में मंदिर दर्शन के बहाने भी आ जाएंगे।
पुल पर भी बनेगा तिराहा
प्रदेश सरकार की ओर से बेणेश्वर में हाई लेवल ब्रिज के लिए 132 करोड़ रुपए मंजूर हुए थे। जनवरी 2022 में 96 करोड़ का वर्क ऑर्डर जारी हुआ है। यहां दो ब्रिज बनेंगे। पहला बांसवाड़ा साबला को जोड़ने वाला 1345 मीटर लंबा होगा, जबकि दूसरा ब्रिज धरियावद को जोड़ेगा, जो 385 मीटर लंबा होगा। फुटपाथ मिलाकर ब्रिज की चौड़ाई 16 मीटर होगी।

नदी क्षेत्र की गहराई के कारण पुल में अधिकतम लंबाई का 40 मीटर वाला स्पैन होगा तो सबसे छोटा स्पैन 20 मीटर का होगा। काम की शुरुआत एक अप्रैल 2022 को होनी थी, जो कि 21 मार्च 2024 को पूरा होगा। इन विशेषताओं वाले पुल की भी एक विशेषता होगी। यहां पुल पर एक तिराहा बनाया जाएगा, जो बांसवाड़ा, धरियावद और साबला रोड के पॉइंट पर होगा।

ड्रोन पर्सन : भरत कंसारा