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गुटखा तंबाकू:3 साल में 2600 युवाओं ने तंबाकू उत्पाद नहीं खाने का संकल्प पत्र भरा

बांसवाड़ा18 दिन पहले
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जिले में जन जाग्रति अभियान की ओर से गुटखा तंबाकू खाने से होने वाले दुष्प्रभावों और नुकसान को लेकर कई बरसों से जन जागरण किया जा रहा है। अभियान के संस्थापक और संयोजक राज्य स्तरीय श्री गुरुजी सम्मान से नवाजे गए गढ़ी उपखंड के जौलाना निवासी रमेशचंद्र बलाई पिछले कुछ साल से युवाओं को तंबाकू गुटखा नहीं खाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

उन्होंने तीन साल में 2600 युवाओं से तंबाकू उत्पाद नहीं खाने का संकल्प पत्र भरवाया। साथ ही जिले के 50 से अधिक स्कूलों में जाकर प्रार्थना सभा में तंबाकू व उससे बने उत्पादों से दूर रहने का संकल्प दिलाया। साथ ही कई गांवों मंे घर घर जाकर युवाओं को तंबाकू गुटखा छोड़ने के लिए प्रेरित किया गया। इसके अलावा जिले में खेलकूद प्रतियोगिता में खिलाड़ियों को खेल से पूर्व तंबाकू नहीं खाने और दूसरों को भी नहीं खाने देने का संकल्प कराया। वहीं जिला स्तरीय निबंध प्रतियोगिता तंबाकू हटाओ, जीवन बचाओ का भी आयोजन किया गया।

तंबाकू छुड़ाने के अभियान में पूरी टीम का सहयोग मिल रहा है। जिस गांव में बैठक होती है, वहां निगरानी टीम गठित की जाती है। रमेशचंद्र ने लॉकडाउन के दौरान भी कई लोगों को जागरूक कर तंबाकू छुड़वाई है। जो युवक तंबाकू गुटखा बीड़ी सिगरेट छोड़ने के लिए सहमत हो जाता है, उसका नाम पता, मोबाइल नंबर लेकर रिकॉर्ड रखा जाता है। साथ ही समय समय पर उससे फीडबैक लिया जाता है ताकि कौन कौन अपने संकल्प पर कायम है। तंबाकू उत्पाद छोड़ने वाले व्यक्ति को आदर्श व्यक्ति मानते हुए माल्यार्पण और प्रशस्ति पत्र देकर अभिनंदन भी किया जाता है।

देश में हर साल तंबाकू खाने से 12.80 लाख की मौत

तंबाकू की थूक, सिगरेट की फूंक, यही जीवन की बड़ी चूक, तंबाकू उत्पादों ने हमेशा मानव के स्वास्थ्य को बुरी तरह से प्रभावित किया है। व्यक्ति पहले जाने अनजाने या शौक मौज मस्ती के लिए इसका उपयोग करता है, फिर धीरे धीरे इन वस्तुओं का आदि हो जाता है, आगे चलकर यही तंबाकू सेवन की लत व्यक्ति को बुरी तरह से अपनी गिरफ्त में ले लेती है। इसके निरन्तर इस्तेमाल से व्यक्ति की शारीरिक, मानसिक क्षमता के साथ-साथ आर्थिक स्थिति भी प्रभावित होती है। इसके दुष्प्रभाव से व्यक्ति कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों का घर बन जाता है।

इससे व्यक्ति की असमय मौत से पूरे परिवार पर संकट आ जाता है। भारत में हर साल तंबाकू गुटखा खाने से करीब 12.80 लाख लोगों की मौत हो जाती है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार विश्व में तम्बाकू और उसके उत्पादों के उपयोग के दुष्प्रभावों के कारण हर चार सेकंड में एक व्यक्ति की असमय मौत हो जाती है। आइए विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर राष्ट्र के नाम एक संकल्प ले कि हम तंबाकू उत्पादों का इस्तेमाल नहीं करेंगे।

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