नवरात्र विशेष:लाेहारिया में ऊंचे पहाड़ पर वैष्णोदेवी मंदिर जैसी पिंडिया स्थापित है खेमेज माता मंदिर में

बांसवाड़ा10 दिन पहलेलेखक: प्रशांत जोशी
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खेमेज माता। - Dainik Bhaskar
खेमेज माता।
  • किंवदंती कि यहां घूमा था देवी माता का रथ, जिसका निशान आज भी है

मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। ब्रह्म का अर्थ होता है तपस्या और चारिणी का अर्थ है आचरण करने वाली। ब्रह्मचारिणी का अर्थ है तप का आचरण करने वाली। मां के इस स्वरूप की पूजा करने से तप, त्याग, सदाचार, संयम आदि की वृद्धि होती है।

इसलिए आज हम आपको लेकर चलेंगे खेमेज माता मंदिर। मां 100 हैक्टेयर घने जंगलों के बीच विराजमान है। मां स्वयं भू शिवालय कपालेश्वर मंदिर के ठीक पीछे की पहाड़ी पर स्थित है। इन्हें क्षेमकरी, खेमल, खेमेज, खीमजी देवी माता आदि नामाें से भी जाना जाता है। सबसे खास बात यह है कि खेमेज माता मंदिर में वैष्णोदेवी मंदिर की तरह मां की प्रतिमा पिंडियों के रूप में स्थापित है। यहां पैंथरों की चहल कदमी आए दिन दिखती है। लोहारिया के शिक्षक जयेश आमेटा बताते हैं-ऐसी मान्यता है कि मां जगत जननी स्वयं रथ पर सवार होकर प्रकट हुई थी। इसके कारण अगाध श्रद्धा के कारण सोलंकी राजपूतों और अन्य समाजजनों की कुलदेवी इस स्थान पर राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात के श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते हैं।

मां नाराज हुई, जहां रथ घुमाया, वहां आज भी निशान मौजूद
कथा है कि अमेज माता भक्तों की परीक्षा लेने के लिए रथ पर सवार होकर पहुंची। यहां तलहटी में रथ रोका और भिखारिन का रूप लेकर भिक्षा की इच्छा व्यक्त करते हुए एकत्रित लोगों के समक्ष पहुंची। सबने इनकार किया तो मां क्रोधित हो गई और रथ रोककर पुन: लौट गई। जहां मां ने रथ रोका, वहा रथ के घुमाव का मार्ग आज भी मौजूद है।

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