हैंडपंपाें में घटता पानी:मार्च में ही कुएंं व ट्यूबवैल सूखे, हमीरगढ़ में 10वें व गाडरमाला में तीसरे दिन पानी सप्लाई

भीलवाड़ा9 महीने पहले
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जीवन उपयाेगी पानी ने गर्मी आने से पहले मार्च में ही अपनी सतह छाेड़कर नीचे जाना शुरू कर दिया है। पेयजल के साथ-साथ गांव हाे या खेत इसका असर बनास के किनारे के ग्रामीण इलाकाें में भी दिखने लगा है। कुएं, ट्यूबवैल व हैंडपंपाें में घटता पानी पेयजल संकट ताे बढ़ा ही रहा, किसानाें के लिए गेहूं की फसल काे बचाना मुश्किल हाे रहा है। बनास नदी में खुदे तीन में से एक कुआं सूखने तथा दाे में पानी घटने से हमीरगढ़ में 10 दिन के अंतराल में जलापूर्ति हाे रही। वहीं गाडरमाला में भी नदी पेटे में दाे में से एक ट्यूबवैल सूखने से लाेगाें काे 72 घंटे में एक बार पानी मिल रहा है। अगले कुछ दिनाें में यह अंतराल भी बढ़ने की संभावना है।

पिछले साल पर्याप्त बारिश नहीं हाेने से बनास नदी में पानी नहीं बहना व लगातार बजरी दाेहन से कुओं, टयूबवैल व हैंडपंपाें का भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। नदी में रेत के बजाय केवल चट्टाने दिख रही हैं, जाे पानी काे राेक नहीं पा रही है। लगातार गिरते भूजल स्तर के चलते किसानाें के समक्ष गेहूं की फसल की पिलाई करना भी मुश्किल हाे रहा है। पहले एक बीघा फसल की पिलाई चार-पांच घंटे में कर दी जाती थी, लेकिन अब उसमें दुगुना समय लग रहा है। अप्रैल-मई में यह स्थिति और भी भयावह हाेने वाली हैं। इस समय हैंडपंपाें का जलस्तर भी नीचे पहुंचने से ग्रामीण क्षेत्राें के हैंडपंपाें काे पांच से सात मिनट तक चलाने पर पानी बाहर आता है।

{हमीरगढ़ में 10 लाख लीटर पानी चाहिए, मिल रहा 1 लाख ही, चंबल का पानी पहुंचेगा तभी राहत
चंबल के पानी की सबसे अधिक आवश्यकता इस समय हमीरगढ़ काे है। वहां सप्लाई के लिए राेज 10 लाख लीटर पानी की आवश्यकता है, लेकिन दाे कुओं व दाे ट्यूबवैल से एक लाख लीटर पानी ही मिल रहा है। अगर जल्द चंबल का पानी नहीं पहुंचा ताे स्थिति भयावह बन जाएगी। टैंकराें से भी सप्लाई समस्या का समाधान नहीं है। क्याेंकि क्षेत्र के कुएं भी कुछ ही दिन टैंकर भर पाएंगे। जलदाय विभाग के अनुसार टैंकराें से जलापूर्ति के लिए प्रस्ताव स्वीकृति के लिए भेजा है।

{दाे ट्यूबवैल में से एक बंद, एक से ही गाडरमाला में जलापूर्ति
गाडरमाला में जलापूर्ति के लिए जलदाय विभाग ने दुड़िया के पास बनास नदी में दाे ट्यूबवैल करा रखे हैं। इनमें से पुलिया के पास स्थित एक ट्यूबवैल पिछले कुछ दिनाें से सूखने से पानी मिलना बंद हाे गया। नदी में खुदे एक अन्य ट्यूबवैल अभी भी पानी मिल रहा है, जिससे गाडरमाला पानी पहुंच रहा है। इसका पानी भी गर्मी बढ़ने के साथ ही घटेगा। ऐसे में जलापूर्ति का यह अंतराल बना रहेगा, इसमें भी संदेह है। हर बार बारिश के दिनाें में नदी में पानी बहने से ट्यूबवैलाें के पास मार्च तक पानी भरा रहता है, लेकिन इस बार बारिश की कमी के कारण पानी नहीं भरने से यहां से माफिया बजरी भी खाेद ले गए। इसके चलते एक ट्यूबवैल ने जवाब दे दिया।

{भग्गा का खेड़ा में नदी के किनारे कुएं में पानी घटा, दाे दिन के अंतराल में जलापूर्ति
पीपली ग्राम पंचायत के सरपंच जगदीशचंद्र जाट का कहना हैं कि बारिश की कमी व बनास नदी से लगातार बजरी निकलने से नदी किनारे गांवाें के कुओं व ट्यूबवैल का पानी सूखने लगा है। भग्गा का खेड़ा गांव की पेयजल याेजना के कुएं में लगातार पानी घट रहा है। पहले गांव काे राेज पानी मिलता था, लेकिन अब पानी घटने से ग्रामीणाें काे दाे दिन में एक बार जलापूर्ति की जा रही है। भूजल स्तर गिरने की यही स्थिति रही ताे टैंकराें का सहरा लेना पडे़गा। उनका कहना हैं कि जब तक चंबल का पानी नहीं मिलेगा समस्या का समाधान हाेने वाला नहीं है। क्याेंकि उनके क्षेत्र के पेयजल स्त्राेताें में रसायनयुक्त पानी हाेने से लाेगाें काे कई राेगाें का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा नदी किनारे निजी कुओं व ट्यूबवैल में पानी घटने से किसानाें काे गेहूं की फसल के साथ ही सब्जियाें आदि की फसल काे बचाना भी मुश्किल हाे रहा है।

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