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इन जगहों पर बनेंगी SDRF चौकियां:आईपीएस पंकज चौधरी ने तय किए राजस्थान के हॉट स्पॉट क्षेत्र, हादसो के गढ़ बनीं इन जगहों पर चौकियां बनाने के रखे प्रस्ताव

बांसवाड़ा3 दिन पहले
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बांसवाड़ा का माही बांध। - Dainik Bhaskar
बांसवाड़ा का माही बांध।

एसडीआरएफ की ओर से प्रदेश में 10 जगहों पर हॉट स्पॉट चौकियां स्थापित करने के प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। एसडीआरएफ के एडीजीपी के निर्देश पर कमाडेंट पंकज चौधरी ने संभागवार दौरा कर इन स्थानों का चयन किया है।

इसके तहत बांसवाड़ा के माही बांध स्थल क्षेत्र (भूंगड़ा थाना) में चौकी की आवश्यकता जताई गई है। इसी तरह अलवर की सिलीसेढ़ झील के समीप, बारां के किशनगढ़, झालावाड़ के अकलेरा में, धौलपुर में पुराने चंबल पुल के समीप (कोतवाली थाना), उदयपुर में फतहसागर झील परिसर में, अजमेर में आनासागर झील के समीप, जालौर के सांचौर में, जोधपुर की कायलाना झील, हनुमानगढ़ में मसीतावाली हेड के समीप चौकी की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इसका प्राथमिक खाका तैयार हो चुका है। मुख्यालय से इसकी सहमति मिल चुकी है। अब स्थानीय जिला प्रशासन को इस प्रस्ताव को अमलीजामा पहनाना है। चौकी स्थापना के लिए नीचे बताए गए तर्क को स्थान दिया गया है।

यहां के लिए बने हैं प्रस्ताव।
यहां के लिए बने हैं प्रस्ताव।

गेमन पुलिया पर बाढ़ के हालात
बांसवाड़ा में माहीडैम और गेमन पुलिया पर बरसात में बाढ़ के हालात बनते हैं। गेमन पुलिया पर अक्सर हादसे होते हैं। यहां डूबे हुओं को पानी से निकालने के लिए नजदीकी उदयपुर मुख्यालय से एसडीआरएफ टीम बुलाई जाती है। यह दूरी करीब 165 किलोमीटर पड़ती है। बीते 5 साल में बांसवाड़ा में 13 रेस्क्यू ऑपरेशन हुए। इसमें 12 शव निकालने के साथ दो लोगों को जिंदा बचाया गया। डेम के गेट खोलने के दौरान भी अगले हिस्सों में बाढ़ के हालात होते हैं।

सिलीसेढ़, अकलेरा व किशनगंज वाले प्रस्तावित स्थान।
सिलीसेढ़, अकलेरा व किशनगंज वाले प्रस्तावित स्थान।

सिलीसेढ़ झील के लिए तर्क

सिलीसेढ़ झील, अलवर मुख्यालय से 12 किलोमीटर दूर है। करीब 35 किलोमीटर के दायरे में नटनी का बारां, अलेवा धाम राजगढ़, पांडुपोल मंदिर के मेले के समय, सागर स्थित मूसी महारानी की छतरी तथा नंदेश्वर महादेव मंदिर जैसे इलाकों में आत्महत्या के मामले सामने आते रहे हैं।

हर साल करीब 15-20 आत्महत्या की घटनाएं होती हैं। अकेले सिलीसढ़ में वर्ष में 12 घटनाएं डूबने की होती हैं। एसडीआरएफ कंपनी की ओर से 10 शवों को निकाला जा चुका है तथा एक को रेस्क्यू किया गया है। यहां चौकी बनने से ऐसे लोगों को तत्काल मदद मिल सकेगी।

किशनगंज की आवश्यकता
किशनगंज क्षेत्र में पार्वती एवं परवन बरसाती नदियां हैं। बाढ़ के अलावा यहां डूबने और आत्महत्या के मामले काफी हैं। जरूरत पर कोटा मुख्यालय यानी 130 किमी दूर से टीम को भेजा जाता है। बीते 5 साल में किशनगढ़ के अलावा पुलिस थाना सारथल, मोठपुर, छिपाबड़ोद, छबड़ा, कवाई, अटरु, नाहरगढ़, शाहबाद, बापचा इलाकों में एसडीआरएफ टीम ने 56 अभियान चलाकर 193 लोगों को सुरक्षित बचाया है। वहीं 38 शव निकाले हैं।
अकलेरा में बरसाती नदियां

झालावाड़ के अकलेरा क्षेत्र में परवन, नेवज, गुलन्डी एवं छापी जैसी नदियां हैं। बाढ़ के अलावा नदियों में डूबने के खूब किस्से होते हैं। छापी डेम, गुलन्डी डेम, अकावद डैम पिकनिक स्थल एवं पेयजल सिंचित परियोजना भी है। आवागमन के साथ जाम की घटनाओं के बीच डूबने के मामले सामने आते हैं। कोटा मुख्यालय, जहां से एसडीआरएफ टीम आती है करीब 160 किमी है। एसडीआरएफ टीम ने 26 अभियान के माध्यम से यहां 46 लोगों को बचाया है। वहीं 27 शव निकाले हैं।

चंबल, माहीडेम और फतहसागर।
चंबल, माहीडेम और फतहसागर।

चंबल का है बहाव क्षेत्र
पुराना चंबल पुल धौलपुर में चंबल का बहाव क्षेत्र है। नदी में डूबने की घटनाएं आम हैं। एसडीआरएफ ने 6 रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर यहां डूबे आठ शव निकाले हैं। सामान्य स्थिति में सर्च ऑपरेशन के बावजूद शव नहीं मिलते। मदद के लिए काेटा से करीब 110 किलोमीटर दूर से टीम का तत्काल पहुंचना मुश्किल होता है। कोतवाली थाना क्षेत्र में दमोह झरना भी है। पर्यटन के हिसाब से यहां डूबने की घटनाएं होती हैं।
फतहसागर झील पर पर्यटक
उदयपुर की फतहसागर झील मुख्य पर्यटन स्थल है। यहां पर्यटकों की भीड़ रहती है। आम लोग भी आते-जाते हैं। झील में तैराकी व नाव प्रतियोगिता भी होती है। वाेटिंग जैसी सुविधा भी झील में है। इसके चलते दुर्घटना की आशंकाएं बनी रहती हैं। इसके अतिरिक्त उदयपुर के बड़ी तालाब में इकोटोन पार्क में भी अक्सर डूबने की घटनाएं हुई हैं। फतहसागर झील एवं बड़ी तालाब में फाइबर बोट उतारकर अस्थाई चौकी स्थापित की जा सकती है। ताकि त्वरित रेस्पांस मिल सके।

आनासागर, सांचौर और कायलाना वाले प्रस्तावित स्थल।
आनासागर, सांचौर और कायलाना वाले प्रस्तावित स्थल।

शहर के मध्य में आनासागर

शहर के मध्य में आनासागर है। सारा बरसाती पानी यहां पहुंचता है। अजमेर शरीफ में उर्स और पुष्कर में मेला भरता है। पूरे देश से जायरीन यहां पर स्नान करने आते हैं। जायरीनों के डूबने की घटनाएं होती हैं।

शहर के मध्य में स्थित झील पर स्थानीय लोग भी सुबह शाम घूमने आते हैं। भीड़ के कारण दुर्घटना की आशंका रहती है। आत्महत्या के मामले भी रहते हैं। 5 साल में किशनगंज व वेद गंज थाना क्षेत्र के 78 लोगों के झील में डूबने का आंकड़ा है। झील में एसडीआरएफ की फाइबर बोट उतार कर अस्थाई चौकी चलाई जा सकती है।

नर्मदा नहर से सिंचित इलाका
जालौर का सांचौर इलाका नर्मदा नहर से सिंचित है। मानसून के समय बाढ़ और नर्मदा नहर में डूब के खूब मामले सामने आते हैं। अक्सर एसडीआरएफ टीम जोधपुर से बुलाते हैं। जोधपुर करीब 3 सौ किमी दूर है। बीते 5 साल में सांचौर, चितलवाना, सरवाना, बागोड़ा आदि थाना क्षेत्रों में टीम ने 10 बचाव अभियान चलाकर 102 लोगों को सुरक्षित बचाया। वहीं 10 शव निकाले। समीपवर्ती भीनमाल, रानीवाड़ा, जसवंतपुरा में भी इस प्रकार की घटनाएं होती हैं।
राजीव गांधी लिफ्ट कैनाल
कायलाना झील से राजीव गांधी लिफ्ट कैनाल जुड़ी हुई है। पेयजल का बड़ा माध्यम है। पर्यटन केंद्र भी है। पहाड़ियों से घिरा हुआ इलाका है। वोटिंग और रोप-वे भी है। माचिया सफारी पार्क जैविक विज्ञान केंद्र भी पास है। लोगों का आवागमन रहता है। डूबने की घटनाएं होती हैं। करीब तीन किलोमीटर वाले इलाके में आत्महत्या के भी मामले आते हैं। झील में 13 बचाव अभियान चलाकर 13 शव बरामद किए गए हैं। यहां पर डूबने की 43 घटनाएं हुई हैं।

इंदिरा गांधी नहर।
इंदिरा गांधी नहर।

इंदिरा गांधी नहर
हनुमानगढ़ में इंदिरा गांधी नहर व घग्घर नदी में डूबने के बहुत से मामले हैं। नहर में दुर्घटना से, आत्महत्या के हिसाब से या वाहन सहित गिरने के बहुत से मामले हैं। स्थानीय पुलिस चौकी के हिसाब से यहां एक साल में औसतन 10 से 15 घटनाएं होती हैं। एसडीआरएफ ने यहां 3 बचाव अभियान चलाकर 9 शव बरामद किए हैं। उक्त स्थल बीकानेर मुख्यालय से लगभग 300 किलोमीटर दूर होने से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू करने में काफी समय लगता है।
हम हैं तैयार
एसडीआरएफ कमांडेंट पंकज चौधरी ने बताया कि प्रदेश में आवश्यकता वाली जगहों पर एसडीआरएफ चौकियां बनाने के प्रस्ताव तैयार हैं। इसकी जरूरतों के लिए आवश्यक कारण भी बताए गए हैं। इस पर एसडीआरएफ मुख्यालय ने मंजूरी दे दी है। स्थानीय जिला प्रशासन को मुहर लगानी है।

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