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कावड़ यात्रा का 36 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा:अंतिम बार 45 हजार पदयात्री हुए थे शामिल, पहली बार साढ़े 12 कावड़ के साथ शुरू हुई थी यात्रा, अबकी बार कोरोना के कारण नहीं होगी कावड़ यात्रा

बांसवाड़ा2 महीने पहले
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डेमो पिक। - Dainik Bhaskar
डेमो पिक।

सावन मास में भगवान मंदारेश्वर को त्रिवेणी संगम, बेणेश्वर धाम (डूंगरपुर) से जल भरकर चढ़ाने वाली हजारों लोगों की श्रद्धा (मानता) इस बार पूरी नहीं हो पाएगी। कोरोना संक्रमण और सरकार की गाइड लाइन के चलते इस बार भक्तजन इस यात्रा में शामिल नहीं हो सकेंगे। इससे पहले वर्ष 2019 में तो लोगों ने भगवान को जल चढ़ाने के फिर भी प्रयास किए थे, लेकिन इस बार हालात कुछ ओर ही बने हुए हैं।

गौरतलब है कि बांसवाड़ा में कावड़ यात्रा की शुरुआत वर्ष 1986 में हुई थी। तब पहली बार कुल 13 लोगों ने संकल्प के साथ बेणेश्वर धाम से साढ़े 12 कलश में भगवान शिव पर जल चढ़ाया था। इसके बाद यह कारवां लगातार आगे बढ़ता गया।

साल 2019 में इस यात्रा में 45 हजार से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया था। वर्ष 2020 में कुछ लोगों ने उनकी श्रद्धा के हिसाब से इस दस्तूर को बनाए रखा, लेकिन इस बार प्रशासन की ओर से महामारी को देखते हुए यात्रा को पूरी तरह विराम लगाया गया है। इस बार कोरोना के कारण कोरोना महामारी ने बांसवाड़ा में कावड़ यात्रा से जुड़े 36 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़ दिया।

बेणेश्वर के इस त्रिवेणी संगम से कावड़िए लाते हैं शुद्ध जल।
बेणेश्वर के इस त्रिवेणी संगम से कावड़िए लाते हैं शुद्ध जल।

तब बना था कावड़ यात्रा संघ

वर्ष 1986 के सफल अनुभव के बाद भक्तों का काफिला लगातार बढ़ता गया। बेणेश्वर से बांसवाड़ा के बीच की करीब 47 किलोमीटर दूरी को तय करने के लिए भक्तों में उत्साह देख यहां व्यवस्था के लिए वर्ष 1989 में कावड़ यात्रा संघ मंदारेश्वर का गठन हुआ।

संघ का कार्य यात्रा में शामिल होने वाले भक्तों को मार्ग में रोशनी की सुविधा देना, चिकित्सा सेवाएं मुहैया कराना, पानी, भोजन, कावड़ स्टैण्ड, यातायात व्यवस्था एवं अन्य सुविधाएं जुटाना होता है। नंगे पैर चलने वाले भक्तों को सकुशल मंदारेश्वर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी संगठन पूरी तरह निभाता है। वर्तमान में इस संगठन में कुल 35 सक्रिय सदस्य हैं।

नंगे पैर 47 किलोमीटर का सफर तय कर इस शिवलिंग पर चढ़ाते हैं जल।
नंगे पैर 47 किलोमीटर का सफर तय कर इस शिवलिंग पर चढ़ाते हैं जल।

तब गूंजता है बम बम भोले

बांसवाड़ा में कावड़ यात्रा से एक और आस्था जुड़ी हुई है। बीते वर्षों में कई ऐसे मौके आए हैं, जब बांसवाड़ा में औसत से कम बारिश हुई है या फिर बारिश देर से शुरू हुई हो, लेकिन सावन में कावड़िओं की यात्रा के समय यहां देवराज इंद्र बरसात जरूर करते हैं।

वर्तमान में बांसवाड़ा से मानसून रूठा हुआ है। बादल तो छाए हैं, लेकिन बरस नहीं रहे। ऐसे में हजारों धर्मप्रेमी घर से भगवान शिव को जल चढ़ाने का बोलमां कर रहे हैं। कुछ तो एक साथ तीन साल का जल चढ़ाने का भी बोलमां कर रहे हैं। गौरतलब है कि कावड़ यात्रा के दौरान पूरे मार्ग पर बम बम भोले के स्वर सभी पदयात्रियों को मंजिल की ओर बढ़ते रहने की ऊर्जा देते हैं।

पहला धर्म है गाइड लाइन
संगठन में बीते 18 साल से महामंत्री बने हुए प्रफुल्ल कुमार दक का कहना है कि कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुए सरकारी गाइड लाइन की पालना करना पहला धर्म है। भक्ति के साथ लोगों का स्वस्थ रहना भी जरूरी है। हालात सामान्य होने पर एक बार फिर भक्तों की मनोकामना पूरी होगी।

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