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  • Last Year There Were 4 Opportunities In Mains, This Time The Situation Is Not Clear, The Notification Has Not Come On 12th Marks Yet.

जेईई-2022:पिछले साल मेन में 4 अवसर मिले थे, इस बार स्थिति स्पष्ट नहीं, 12वीं के अंकाें पर भी अभी तक नहीं आया नोटिफिकेशन

बांसवाड़ा2 महीने पहले
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  • ज्वॉइंट एंट्रेंस एग्जाम की योग्यता और अवसर को लेकर अभी तक असमंजस की स्थिति

देश की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई मेन और एडवांस्ड-2022 को लेकर स्टूडेंट्स में उत्सुकता बनी है। लेकिन, एनटीए की ओर से अभी तक जेईई-2022 को लेकर स्पष्ट निर्देश नहीं दिए जाने को लेकर स्टूडेंट्स और पैरेंट्स चिंतित हैं। एनटीए की ओर से पिछलेे साल स्टूडेंट्स काे जेईई-मेन के लिए 4 अवसर दिए। वर्ष 2022 में 4 अवसर दिए जाएंगे या नहीं या फिर 2020 और 2019 की तरह दो अवसर होंगे या किसी और पैटर्न पर जेईई मेन एग्जाम होगा। इसे लेकर अभी तक कोई स्पष्टीकरण एनटीए की ओर से जारी नहीं किया गया है।

कॅरिअर काउंसलिंग एक्सपर्ट के अनुसार अटेम्पट के अलावा 12वीं बोर्ड के प्राप्तांकों की योग्यता को लेकर भी बड़े सवाल हैं। स्टूडेंट्स का कहना है कि कोविड से पहले तक 12वीं बोर्ड में टॉप-20 पर्सेंटाइल या 75 प्रतिशत प्राप्तांक की पात्रता थी। कोविड में स्टूडेंट्स को छूट देते हुए 12वीं पास ही रखा गया है। वर्ष 2021 में स्टूडेंट्स को प्रमोट किया गया।

कई स्टूडेंट्स प्रमोट होने के बाद भी 75 प्रतिशत पात्रता पूरी नहीं कर पाए हैं। ऐसे स्टूडेंट्स अब इम्प्रूवमेंट देना चाह रहे हैं। इन स्टूडेंट्स के लिए सीबीएसई द्वारा 12वीं के इम्प्रूवमेंट के लिए आवेदन भी शुरू कर दिए हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 20 दिसंबर तक है। ऐसे में स्टूडेंट्स इम्प्रूवमेंट के लिए आवेदन करने पर भी असमंजस है। पिछले साल 15 दिसंबर तक जेईई मेन संबंधित जानकारी उपलब्ध करवा दी गई थी।

इधर, नीट यूजी परीक्षा में विवादों के कारण पूरे देश में मेडिकल शैक्षणिक सत्र हुआ बेपटरी

नीट यूजी से संबंधित विवादों के चलते मेडिकल संस्थानों का वर्तमान शैक्षणिक सत्र बेपटरी हो चुका है। इस वजह से एम्स और जिप्मेर की प्रवेश-प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है। एजुकेशन एक्सपर्ट ने बताया कि वर्ष-2020 से पूर्व एम्स तथा जिप्मेर में प्रवेश के लिए अलग प्रवेश परीक्षा हाेती थी। अब यहां भी नीट यूजी के आधार पर ही प्रवेश हाेता है।

नीट यूजी शुरू से ही विवादपूर्ण रही। यह विवाद प्रश्न पत्रों में त्रुटियों, प्रश्न पत्र के लीक होने, ओएमआर शीट संबंधी गड़बड़ियों, अधिकतम आयु सीमा तथा डमी कैंडिडेट द्वारा परीक्षा दिए जाने से संबंधित रहे हैं। इन विवादों के शैक्षणिक सत्र पर लगातार प्रतिकूल प्रभाव पड़ता रहा है तथा मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता भी प्रभावित हुई है। वहीं एम्स तथा जिप्मेर यूजी मेडिकल प्रवेश परीक्षाएं कभी विवादों में नहीं रहीं। पूर्व निर्धारित समय के अनुसार परीक्षाएं आयोजित होती रहीं और समय पर परिणाम जारी कर एमबीबीएस मेडिकल शिक्षा सत्र शुरू किए जाते रहे।

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