आज से नवरात्र:400 फीट ऊंचे पहाड़ पर गुफा में विराजित मां काली, माही नदी करती है चरण वंदन

बांसवाड़ा15 दिन पहलेलेखक: प्रियंक भट्‌ट/चिराग द्विवेदी
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फोटो : राहुल शर्मा (घाटोल) - Dainik Bhaskar
फोटो : राहुल शर्मा (घाटोल)
  • आज से नवरात्र की शुभ शुरुआत पर चंदोलीखेड़ा गांव के पहाड़ पर विराजित काली मां के दर्शन पहली बार दैनिक भास्कर में

आज से नवरात्र की शुरुआात हाे जाएगी। दैनिक भास्कर आपको चंदोलीखेड़ा गांव की 400 फीट ऊंची पहाड़ी पर विराजित मां काली के दर्शन कराएंगे। जहां दर्शनों के लिए आपको दुर्गम रास्तों से होते हुए गुजरना पड़ता है। मां के मंदिर तक पहुंचने का रास्ता बेहद कठिन है। क्योंकि-आपको डेढ़ी-मेढ़ी पहाड़ी पर बनी सीढ़ियों से चलकर जाना होता है। यहां थोड़ी सी चूक आपको बड़े संकट में डाल सकती है, लेकिन मां के अलौकिक स्वरूप की हर तस्वीर पहुंचाने के लिए भास्कर टीम इन मुश्किल भरे रास्तों से गुजरी।

डूंगरपुर के पाटनपुरा पंचायत के घने जंगलों व मार्बल खदानों के बीच यह जगह इतनी भीतर है कि यहां बिना पूर्व जानकारी के कोई नहीं पहुंच सकता। गुफा की ओर जाने वाले रास्ते पर ही तेज झरना बहता है। जिसके ठीक नीचे गहरी माही नदी है। 400 फीट से भी ऊंचे पहाड़ के बीच में स्थित गुफा में मां काली की काले पत्थर की आकर्षक मूर्ति है। गुफा में चढ़ने के लिए लाेहे की सीढ़ी और पाइप लगाए गए हैं। पुजारी जगला उर्फ जगदीश महाराज बताते हैं-यह मूर्ति महर्षि गौतम ऋषि के काल की है। पास में ही टाेरेश्वर महादेव मंदिर भी है।

संकरा रास्ता, चट्टानों से झरता पानी, गहरे अंधेरे से गुजरने पर होते हैं मां के दर्शन

  • 1. काली मां की गुफा तक पहुंचने के लिए पहले कच्चा रास्ता है। जहां झरना बहता है। जिसे पार करने के बाद नीचे की ओर सीढ़ियां हैं, जाे सीधे गुफा की ओर ले जाती है। सुरक्षा लिहाज से सीढ़ियाें पर लाेहे के पाइप लगाए गए हैं।
  • 2. सीढ़ियाें के ठीक सामने गुफा। उसके बाद खड़ी चढ़ाई है। ऊपर चढ़ते ही अंधेरा बढ़ गया। ऊपर जगह काफी संकरी थी। यहां मां की सवारी शेर की मूर्ति लगी है। शेर का मुंह गुफा में काली मां की ओर जाने वाले रास्ते की तरफ है। शिलाओं से पानी टपक रहा था।
  • 3. शेर के दर्शन के बाद ऊपर की ओर जाने वाली सीढ़ियाें पर चढ़े। भीतर जाने पर मां काली की काले पत्थर की प्रतिमा विराजित है।

मान्यता : शांति के लिए बनाते हैं पत्थरों के घर

काली मां की इस गुफा काे लेकर एक राेचक मान्यता है। यहां श्रद्धालु घर की शांति और नए मकान की मन्नत में पत्थरों का घर बनाते हैं। यहां 3 महीनाें तक झरना बहता है।

यहां तक कैसे पहुंचे : घाटाेल से देलवाड़ा, जगपुरा हाेते हुए निठाउवा जाने वाले रास्ते पर भुंगा भट्ट माइंस की ओर जाने वाला रास्ता आपको सीधे मंदिर ले जाएगा। यहां कुछ दूरी पर एक प्रवेश द्वार दिखेगा। यही मंदिर जाने का रास्ता है। डूंगरपुर की ओर से आने वाले श्रद्धालु साबला से नीठाउवा गामड़ी से जगपुरा जाने रास्ता चुनें। जहां से भुंगा भट्ट माइंस की ओर जाने वाला रास्ता दिखेगा।

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