माफिया के खिलाफ पुलिस की संयुक्त कार्रवाई:माफिया प्रति टन 400 रुपए कमाने के लिए पानी से बजरी खींच जलीय जंतु मार रहे हैं

बांसवाड़ा9 महीने पहले
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  • वैक्यूम से खींच रहे, इससे पर्यावरण को खतरा, खनन विभाग के अधिकारी जिम्मेदार

दाे साल बाद आसपुर के साेमकमला आंबा बांध के बहाव क्षेत्र में बजरी माफिया के खिलाफ पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में बडे़ स्तर पर अवैध बजरी और नावाें काे जब्त किया गया हैं। अब तक पुलिस ने दाे बार कार्रवाई की गई। जबकि, खनन विभाग की टीम ने कभी भी इतनी बड़ी कार्रवाई नहीं की हैं। आसपुर और साबला पंचायत समिति भले ही डूंगरपुर जिले में है। पर, इन यह दाेनाें केन्द्र खनन विभाग के सलूम्बर उदयपुर डिवीजन में आता हैं।

ऐसे मे जिले का खनन विभाग खामाेश है और सलूम्बर की टीम काेई कार्रवाई करती ही नहीं है। इसके चलते यह बजरी माफियाओं की लगातार बजरी खनन के बाद भी काई कार्रवाई नहीं हाे पाती है। यहां वैक्यूम के माध्यम से नदी के पेठे से बजरी काे खींचा जाता हैं। जिससे नदी में पेठे में विकसित हुए जलीय पादप, जीव जंतु इन मशीनाें में फंसकर मर जाते हैं। कई बार कई जलीय बडे जीव जैसे मछली, मगरमच्छ भी इस वैक्यूम से अपने भाेजन काे प्राप्त नहीं कर पाते हैं। जिससे वाे अक्सर बांध के किनाराें वाले क्षेत्र में आते हैं। डीएसटी टीम की ओर से शनिवार काे बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब पांच बिंदुओं पर कार्रवाई की गई। जिसमें दिनभर में 32 लाख की लागत से 4800 टन बजरी जब्त की गई।

बजरी डूंगरपुर, सलूंम्बर, सागवाड़ा, बांसवाड़ा होते गुजरात के कई जिलों में भी भेजी जा रही
साेमकमला आंबा बांध और गलियाकाेट बैक वाटर में बजरी काे आसपुर, दाेवड़ा, डूंगरपुर, सलुम्बर, केसरीयाजी, बांसवाड़ा और गुजरात के मेघरेज तक पहुंचाई जाती हैं। इस दरम्यान करीब तीन खनन विभाग के क्षेत्राधिकार, एक दर्जन से अधिक पुलिस थाने और प्रशासनिक अधिकारियाें के कार्यालय के सामने से वाहन गुजरते हैं। जिसमें राॅयल्टी, ईरवन्ना और कई राजस्व नुकसान पहुंचाते हुए बजरी बेची जाती हैं। साेम कमला आंबा और गलियाकाेट कड़ाणा बांध से निकलने वाली बजरी माेटी और साफ हाेने के कारण इस उपयाेग सरकारी कार्य, सड़क निर्माण और बडे प्राेजेक्ट में किया जाता हैं। जिससे अधिकांश शहरी क्षेत्र में सप्लाई बहुत कम हाेती हैं। इसकी रेट गुजरात बजरी से कम हाेने के कारण उपयाेग ज्यादा होता है। यह नदी के पेटे से सक्शन यानी मशीन से खींच कर एकत्रित की जाती हैं। बड़े पत्थर की मात्रा बहुत कम हाेती हैं। जिले में दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र बजरी खनन का सागवाड़ा के वगेरी से गलियाकाेट माही नदी हैं। जहां पर बांसवाड़ा के माही पुल से निकलने वाली नदी पर सबसे ज्यादा बजरी निकालने का काम वगेरी पुल से गलियाकाेट बेकवाटर तक हाेता हैं।

16 नावें चिन्हित ,तीन नावें थाने में रखवाई
डूंगरपुर। साेमकमला आंबा बांध क्षेत्र में अवैध बजरी खनन में शनिवार काे हुई कार्रवाई में रविवार काे नाव जब्ती की कार्रवाई माइनिंग विभाग से की गई। माइनिंग विभाग के अधिकारी नरेंद्र खटीक ने बताया शनिवार काे पुलिस विभाग की डीएसटी टीम की कार्रवाई के बाद माइनिंग विभाग की टीम पहुंची थी। जिसमें रविवार काे माैके पर एनडीआरएफ की टीम नहीं थी। जिसके कारण बांध क्षेत्र में करीब 13 नावें डूबी हुई थी।

चुनौती : हाईकोर्ट ने रोक लगा रखी है ग्रीन ट्रिब्यूनल के नियम भी नहीं मानते
बजरी खनन में सबसे बड़ी बात यह है इसमें लाभांश दाे गुना से चार गुना मिलता हैं। बजरी खनन पर हाईकाेर्ट की ओर से पूर्ण राेक लगी हुई हैं। राज्य सरकार काे ग्रीन ट्रिब्यूनल के नियमाें की पालना करते हुए खनन के नए नियम बनाने हैं। जिसमें आज तक काेई सफलता नहीं मिली हैं। ऐसे में बजरी माफिया से जुड़े लाेग साेम नदी के बहाव क्षेत्र से साेमकमला आंबाबा बांध तक करीब एक दर्जन से अधिक केंद्राें पर अवैध खनन कर बजरी एकत्रित करते हैं। इसमें दाे मजदूर एक नाव में करीब 10 लीटर डीजल भरकर दिनभर में दाे से तीन बार में 45 टन बजरी खींचकर किनारे तक लाते हैं। जिसमें करीब 700 रुपए खर्चा आता हैं। इसके बाद भंडारण में लगे पंप सेट भी 10 लीटर डीजल से नाव में एकत्रित बजरी काे खिंचकर किनारे में जमा करती हैं। जहां इसमें भी 1000 रुपए का खर्चा आता हैं। इसके बाद डंपर, ट्रक या ट्रेक्टर में भरने के लिए जेसीबी दिनभर प्रयाेग में लाते हैं। जिससे करीब 45 टन बजरी में एक दिन में एकत्रित करने में 5 से 6 हजार तक का खर्चा आता हैं।

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