पेड़ों के बीच छिपे ट्रक से बांटा पोषाहार:टैंपो में लदाई मां-बाड़ी केंद्रों की सामग्री, किराया भी नहीं मिलेगा, गड़बड़ी की आशंका

बांसवाड़ा7 महीने पहले
बांसवाड़ा-रतलाम रोड से जुड़े बायतालाब रोड पर कल्पवृक्ष के नीचे खड़े ट्रक की होती अनलोडिंग।

मां-बाड़ी केंद्रों की मासिक पोषाहार सामग्री को चोरी छिपे बांटने का मामला तूल पकड़ रहा है। सूनसान इलाके में पेड़ों की आड़ में ट्रक खड़ाकर पोषाहार बांटने का ये मामला रविवार दोपहर बाद का है, जहां पोषाहार लदे ट्रक से सामग्री को टैंपों में लादा गया। एक के बाद एक कर टैंपो यहां पहुंचते गए और सामान उसमें खाली होता गया। मामला लोगों की नजरों में आया तो इसकी शिकायतें भी हुईं, लेकिन किसी ने भी इसकी जिम्मेदारी नहीं ली। जानकारी जुटाने पर पता चला कि TAD विभाग के अधीन संचालित स्वच्छ परियोजना के अधीन ये सामग्री मां-बाड़ी केंद्रों पर पहुंचाई जानी थी, लेकिन दूरदराज के इलाकों में ट्रक नहीं पहुंचने की असुविधा बताते हुए ठेकेदार ने यहां एकांत में सामान वितरण किया। लेकिन, एकांत और सूनसान में राशन सामग्री बांटने का मामला संदिग्ध बना हुआ है।

मां-बाड़ी केंद्र में पहुंचाए जाने वाले सामान की नियम विरुद्ध लोडिंग।
मां-बाड़ी केंद्र में पहुंचाए जाने वाले सामान की नियम विरुद्ध लोडिंग।

दरअसल, रविवार दोपहर बाद रतलाम रोड को बायतालाब से जोड़ने वाले मार्ग पर कल्पवृक्ष के पेड़ के नीचे एक ट्रक में पोषाहार सहित अन्य राशन सामग्री का वितरण हो रहा था। एकांत में खड़े ट्रक के पास एक-एक कर टैंपो पहुंच रहे थे, जिनमें ये सामान खाली हो रहा था। पूछताछ करने पर ट्रक के साथ आया स्टाफ कुछ भी जानकारी देने से मना करता रहा। दैनिक भास्कर ने पड़ताल की ताे पता चला कि ये सामान मां-बाड़ी केंद्र में होने वाली मासिक सप्लाई है, लेकिन एकांत में सामान बांटने के मामले में ठेकेदार का कर्मचारी कोई जानकारी नहीं दे पाया।

कैमरे को देख सामान लोड कराने की बजाय मुंह घूमाकर खड़े हो गए जिम्मेदार।
कैमरे को देख सामान लोड कराने की बजाय मुंह घूमाकर खड़े हो गए जिम्मेदार।

मां-बाड़ी केंद्र पर नन्हे बच्चों के लिए इतना सामान
मां-बाड़ी केंद्र पर आंगनबाड़ी जैसे ही पोषाहार सहित अन्य सामग्रियों का बच्चों के लिए वितरण होता है। ट्राइबल एरिया डवलपमेंट विभाग की ओर से यहां हर माह 150KG आटा, 40KG चावल, 5-5KG वाली चार तरह की दाल (कुल 20 KG), करीब 15KG तेल, सब्जी व दाल में डालने वाले मसाले, साबुन, हेयर ऑइल, टूथपेस्ट जैसी चीजें यहां नियमित वितरित होती हैं।
जिले में 645 ऐसे केंद्र
स्वच्छ परियोजना के अधीन जिले में करीब 645 ऐसे मां-बाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें बहुत से इलाके दूरदराज में पड़ते हैं। व्यवस्था के तहत ठेकेदार को इन केंद्रों पर ट्रक से सामान पहुंचाना होता है, लेकिन बहुत सी जगहों पर ट्रक की एप्रोच नहीं होती। जिले में 11 पंचायत समिति मुख्यालयाें के हिसाब से 4-4 यानी 44 कोर्डिनेटर इस व्यवसथा को देखते हैं। यहां एक ग्राम पंचायत मुख्यालय के हिसाब से उस क्षेत्र में पड़ने वाली मां-बाड़ी केंद्र का एक संकुल भी होता है।
टैंपो के किराया नहीं मिलता
व्यवस्था के तहत ठेकेदार पर सामान पहुंचाने की जिम्मेदारी होती है, लेकिन चोरी छिपे हुए वितरण के दौरान केंद्रों पर काम करने वाले शिक्षा सहयोगी उनके स्तर पर टैंपाे कर यहां तक पहुंचे। व्यवस्था के हिसाब से शिक्षा सहयोगियों को लोड ले जाने के लिए टैंपो के भाड़े का भुगतान करने का प्रावधान नहीं है। ऐसे में शिक्षा सहयोगी भाड़े के 500 से एक हजार रुपए कहां से अदा करेगा। इसका किसी के पास जवाब नहीं है। बता दें कि केंद्र पर एक शिक्षा सहयोगी को उसकी शैक्षणिक योग्यता के हिसाब से न्यूनतम 9 हजार रुपए और अधिकतम 10 हजार 4 सौ रुपए का भुगतान होता है।
गलत है तरीका
मामले में स्वच्छ परियोजना के परियोजना अधिकारी (PO) मुकेश पाटीदार का कहना है कि दूरदराज के इलाकों में जहां ट्रक नहीं जाता। वहां टैंपो से पोषाहार जाता है। इसके एवज में शिक्षा सहयोगियों को टैंपो का किराया नहीं मिलता। वह स्वप्रेरित होकर ऐसा करते हैं। पाटीदार ने कहा कि ठेकेदार को ट्रक सूनसान जगह में नहीं खड़ा करना चाहिए था। वितरण का ये तरीका गलत है। जांच कराएंगे और सभी केंद्रों पर हुई सप्लाई भी जांचेंगे।