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आपदा अवसर या मजबूरी !:लॉकडाउन में कमाई के लाले पड़े और महंगाई आम आदमी की कमर तोड़ रही, मिर्ची, नींबू और अदरक पहुंच के बाहर

बांसवाड़ाएक महीने पहले
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महामारी कोरोना जैसी वैश्विक आपदा में कमर तोड़ महंगाई ने आम आदमी की जिंदगी को दोराहे पर ला खड़ा किया है। एक ओर जहां हर सांस (ऑक्सीजन) कीमत मांग रही है। वहीं दो बार की भूख मिटाने की मजबूरी ने गरीब जिंदगी की नींद उड़ा रखी है। पीड़ित मरीज के लिए ऑक्सीजन और इम्यूनिटी बढ़ाने वाले नारियल पानी, अदरक और नींबू को जुटाना भारी पड़ रहा है।

इसकी एक वजह डीजल के दामों में आए उछाल को माना जा रहा है। वहीं दूसरा कारण ट्रांसपोटर्स को दूसरी ओर से नहीं मिलने वाला भाड़ा सामने आया है। इधर, बेलगाम फुटकर विक्रेताओं की नीतियाें से आमआदमी की रसोई पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

बाजार में खपत का रेशो गड़बड़ाने से फुटकर फल और सब्जी विक्रेता भी लोगों से औने-पौने दाम वसूलते दिख रहे हैं। कोरोनाकाल और लॉकडाउन के बीच खाद्य सामग्री में आए इसी उछाल को लेकर दैनिक भास्कर की टीम ने बांसवाड़ा का बाजार टटोला तो चौंकाने वाला सच सामने आया।

तेल के दाम 50 रुपए तक बढ़े
एक उदाहरण के तौर पर बीते डेढ़ महीने में सबसे सस्ते सोयाबीन तेल की कीमतों में प्रति लीटर करीब 50 रुपए तक का अंतर आया है। इसी हरी सब्जी का विकल्प मानी जाने वाली दालें फुटकर दुकानों में महंगी बिक रही है। लॉकडाउन में निर्धारित समय सीमा की बाध्यता से आम आदमी के विकल्प खत्म हो गए हैं। मजबूरी में आमजन को उसकी गली-मोहल्लों की दुकानों से किराने की फुटकर जरूरतों को पूरा करना पड़ रहा है।

पहले और अब (डेढ़ माह में लागत का फर्क) खाद्य सामग्री का नाम पहले (रुपए में) अब सोया तेल (एक लीटर) 100 150 काबुली चना 80 115 चना दाल 60 75 काला चना 60 75 मसूर दाल 70 85 शक्कर (चीनी) 34 36 मूंग दाल 90 105

लॉकडाउन के बीच कस्टम क्षेत्र में हरी सब्जी बेचता विक्रेता।
लॉकडाउन के बीच कस्टम क्षेत्र में हरी सब्जी बेचता विक्रेता।

सब्जी के भाव

सब्जीथोकरिटेल प्राइस
भिंडी15-20 - 4040
ग्वारफली30-3545
टिंडा25-3040
लौकी10-1225-30
अदरक30-3580
नींबू80-100200
मिर्ची40 80120
टमाटर8-1025
बाजार में बिक रहा नारियल।
बाजार में बिक रहा नारियल।
फलहोलसेल प्राइसरिटेल प्राइस
नारियल पानी50-5560-70
सेव200-250150-200
अंगूर80120
आम (बादाम)5080
आम (केसर)100150

एक महीने में डेढ़ा बिल फुटकर खरीदारी की मार उपभोक्ताओं पर केवल दालों के तौर पर ही देखने को नहीं मिल रही। हर सामान की कीमत में करीब एक से दो रुपए का फर्क आ गया है। एक आम आदमी के परिवार की मासिक जरूरतों के हिसाब से डेढ़ माह पहले करीब 5 हजार रुपए का बिल बन रहा था। अब महंगाई के बीच में वहीं बिल छह हजार के आस-पास पहुंच रहा है। समस्या इसलिए गंभीर है कि महामारी के दौर में हर आमआदमी का रोजगार छूट चुका है।

इसकी मार बड़ी फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूर वर्ग पर भी पड़ी है। ऐसे में लोगों की कमाई के साधन कम हो गए हैं। गरीब तबका तो दो जून की रोटी का इंतजाम नहीं कर पा रहा है। ऐसे में यह महंगाई नई मुसीबतों को जन्म दे रही है।

यहां भी अलग गणित

किराने के थोक विक्रेता महेंद्र गुप्ता की बात मानें तो कंपनी वाले सोया तेल की कीमत 153 रुपए तक है। चने की दाल में करीब चार रुपए कम हुए हैं। क्वालिटी वाला काला चना अभी भी 60 रुपए में मिल रहा है। इसी तरह मूंग की सबसे बढ़िया दाल 100 रुपए में मिल रही है। अब में ट्रांसपोर्टेशन महंगा हो गया है। पहले प्रति क्विंटल वस्तु पर 80 पैसा किराया लग रहा था, जो कि अब 1.60 रुपए लग रहा है।

खपत कम, सब्जी खराब
होलसेल सब्जी विक्रेता अयूब खान की मानें तो इन दिनों सब्जी की आवक और खपत दोनों ही कम है। फुटकर विक्रेता की 20 किलो सब्जी ले जाता है तो 15 किलोग्राम ही औसत बिकती है। बाकी सब्जी उसे फेंकनी पड़ रही है। होलसेल के हिसाब से सब्जी की दरों में बहुत ज्यादा फर्क नहीं आया है। फुटकर विक्रेता मजबूरी में ज्यादा वसूली कर रहा है।

गजब का महंगा हरा नारियल
होलसेल फल व्यापारी रोचीराम सिंधी बताते हैं कि फलों में सबसे नारियल पानी में उछाल आया है। डेढ़ माह पहले एक नारियल 25-30 रुपए था, जो अब बढ़कर होलसेल में 50 से 55 रुपए में पड़ रहा है, जो फुटकर में 70 रुपए तक बिक रहा है। अन्य फलों के दामों में भी इजाफा हुआ है, लेेकिन उनमें बहुत ज्यादा फर्क नहीं है। तरबूज और आम पहले ज्यादा में थे, जो सीजन के हिसाब से अभी उसी दर पर चल रहे हैं।

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