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पेट्रोल-डीजल के रेट बढ़ने से महंगाई की मार:अब डीजल भी ‌100/ली. पार, 6 माह में औसत महंगाई 15% बढ़ी, सब्जियों के भाव दोगुना हुए

बांसवाड़ा24 दिन पहले
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सब्जियों की बात करें तो आलू-गोभी जैसी सब्जियां 5 से 10 और 15 से 40 रुपए तक पहुंच गई जो सौ फीसदी से भी ज्यादा है। - Dainik Bhaskar
सब्जियों की बात करें तो आलू-गोभी जैसी सब्जियां 5 से 10 और 15 से 40 रुपए तक पहुंच गई जो सौ फीसदी से भी ज्यादा है।
  • पेट्रोल के दाम 108.70 रुपए और डीजल 100.21 रुपए पहुंचे
  • कम आय वर्ग वाले परिवारों पर ज्यादा असर क्योंकि इतनी ही सेविंग कर पाते थे जो महंगाई खा गई
  • हाउस लोन की इंट्रेस्ट रेट में बदलाव नहीं हुआ लेकिन ईएमआई दो साल बढ़ने का असर पड़ रहा है

पिछले छह माह से महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है। जिसका प्रमुख कारण पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार बढ़ रहा है। 6 महीनों में पेट्रोल-डीजल 15 रुपए प्रति लीटर से ज्यादा बढ़ गया है। जिसका असर बाजार और रसोई पर भी पड़ रहा है। जहां सब्जियों की बात करें तो आलू-गोभी जैसी सब्जियां 5 से 10 और 15 से 40 रुपए तक पहुंच गई जो सौ फीसदी से भी ज्यादा है।

इसका असर भी रोजमर्रा के सामान की कीमतों पर पड़ रहा है। महंगाई के साथ थोड़ा असर हाउस लोन के ब्याज पर भी पड़ा है। हालांकि ब्याज दरों में कोई फर्क नहीं आया है लेकिन लॉकडाउन के कारण ईएमआई की अवधि 2 साल बढ़ी है उसके हिसाब से ब्याज पर प्रति लाख 500 रुपए ज्यादा भरना पड़ेगा। भास्कर ने सभी प्रकार की वस्तुओं के छह महीने के भावों का हिसाब लगाया तो पता चला कि प्रति परिवार ओवरआल महंगाई 15% तक बढ़ी है। निचले मध्यम वर्ग जिसकी आय 25 हजार से ज्यादा नहीं है, उस पर इसका सीधा असर डाला है।

चुनिंदा वस्तुएं जिनके भाव लगातार बढ़े

सब्जियां

प्याज 10 से 22 रु. किलो, बैंगन 10-25, टमाटर 12-20, शिमला 30-45, भिंडी 25 से 35 रुपए।

फल-फ्रूट

सेव 70 से 110 रुपए, पपीता 10 से 20, मौसमी 40-60, आम 40-60, केला 15 से 18, नारियल 20-26 रुपए।

किराणा

गेहूं 18 से 22, चना दाल 60-68, मूंग दाल 110-115, तेल 80 से 135, घी 410-425, चीनी 33 से 35 रु.।

पेट्रोल-डीजल

जनवरी में पेट्रोल 92.76 से जुलाई में 108.70 तक पहुंचा। डीजल 84.61 से 100.21 तक पहुंचा।

आय 25000 मासिक खर्च 3500 रु. बढ़ा

  • सब्जी-फ्रूट्स: औसत मासिक खर्च 1500 था जो 100% महंगाई बढ़ने से 3000 रु. हो गया। यानि 1500 का बोझ बढ़ा।
  • किराणा: मासिक खर्च 3000 रु. 15% महंगाई से 3500 हुआ। 500 का बोझ बढ़ गया।
  • तेल-घी: 5 किलो तेल, 2 किलो घी का औसत खर्च 2000 था जो 20% महंगाई बढ़ने से 2500 हो गया। यानि 500 बढ़ गया।
  • पेट्रोल: बाइक में 45 लीटर के हिसाब से 1000 रु. था जो अब 1500 हो गया यानि 500 बढ़ गया।

हाउस लोन: 1 बीएचके मकान। लॉकडाउन से ईएमआई आगे बढ़ी तो 1 लाख पर सालाना 500 रु. ब्याज बढ़ा। यानि 10 लाख के लोन पर 5000 बढ़े तो मासिक करीब 500 रुपए का भार बढ़ा।

आय 50000 मासिक खर्च 6500 रु. बढ़ा

  • सब्जी-फ्रूट्स: मासिक खर्च 3000 रु 100% महंगाई बढ़ने से 6000 हुआ। 3000 बोझ बढ़ा।
  • किराणा: औसत मासिक खर्च 5000 रुपए जो 15% महंगाई बढ़ने से 6000 रुपए हो गया। यानि 1000 का बोझ बढ़ गया।
  • तेल-घी: 5 किलो तेल व 2 किलो घी का खर्च 3000 था जो 20% महंगाई बढ़ने से 3600 हो गया। यानि 600 बढ़ गया।
  • पेट्रोल-डीजल: 1 बाइक, 1 एक्टिवा में 90 ली. के हिसाब से 8500 था। 9100 हुआ। कार का पेट्रोल का खर्च 1000 रु बढ़ा है।

हाउस लोन- 2 बीएचके मकान। लॉकडाउन से ईएमआई आगे बढ़ी तो 1 लाख पर सालाना 500 रु. ब्याज बढ़ा। यानि 25 लाख के लोन पर 12500 बढ़े तो मासिक करीब 1000 रु. का भार बढ़ा।

(कुल मिला कर 50 हजार की कमाई वाले व्यक्ति पर मंहगाई का भार 6500 रुपए हर माह बढ़ गया।)

आय 100000 मासिक खर्च 13000 रु. बढ़ा

  • सब्जी-फ्रूट्स- मासिक खर्च 8000 से 100% महंगाई बढ़ने से 16000। 6000 बोझ बढ़ा।
  • किराणा-ड्राईफ्रूट्स- औसत मासिक खर्च 10000 रुपए जो 15% महंगाई बढ़ने से 12000 हो गया। यानि 2000 का बोझ बढ़ा।
  • तेल-घी- 10 किलो तेल व 5 किलो घी का औसत खर्च 5000 था जो 20% महंगाई बढ़ने से 6000 हो गया। यानि 1000 बढ़ा।
  • पेट्रोल-डीजल- 1 कार, 1 बाइक व 1 एक्टिवा का 190 लीटर पेट्रोल 17000 था जो 19200 हो गया है। यानि 2200 का खर्च बढ़ गया है।

हाउस लोन- 3 बीएचके मकान। लॉकडाउन से ईएमआई आगे बढ़ी तो 1 लाख पर सालाना 500 रु. ब्याज बढ़ा। यानि 45 लाख के लोन पर 22500 रु. बढ़े तो मासिक 2000 रु. का भार बढ़ा।

(कुल मिला कर 1 लाख की कमाई वाले व्यक्ति पर मंहगाई का भार 13000 रुपए हर माह बढ़ गया।)