ऑक्सीजन सिलेंडरों की कालाबाजारी:अब ऑक्सीजन सिलेंडर के रेगुलेटर की भी कालाबाजारी जिले में खत्म, 300 का रेगुलेटर 5400 रुपए में बेच रहे

बांसवाड़ा6 महीने पहले
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  • दाे साल में जिला अस्पताल में 79 रेगुलेटर ही हुए सप्लाई, 34 रेगुलेटर अप्रैल में ही प्राप्त हुए

प्रदेशभर में बढ़ते काेराेना संक्रमितों काे ऑक्सीजन की जरूरत काे देखते हुए पहले ऑक्सीजन सिलेंडरों की कालाबाजारी शुरू हुई। मारामारी काे देखते हुए कलेक्टर अंकित कुमार सिंह ने सिलेंडर के स्टॉक और सप्लाई का जिम्मा प्रशासन के अधीन कर उसकी कालाबाजारी पर ताे राेक लगाई, लेकिन स्टॉक की कमी के कारण अब ताे प्रशासन से भी ऑक्सीजन के प्रबंधन संभले नहीं जा रहे हैं।

प्रतिदिन जितने सिलेंडर की आवश्यकता है उसके महज 20 से 30 फीसदी ही सिलेंडर मिल पा रहे हैं। अब प्रशासन के सामने दूसरी समस्या खड़ी हाे गई है कि ऑक्सीजन सिलेंडरों पर लगने वाले रेगुलेटरों की कालाबाजारी शुरू हाे गई है। बांसवाड़ा में रेगुलेटर ही खत्म हाे गए हैं। सूत्रों की माने अब रेगुलेटर अहमदाबाद से मंगवाए जा रहे हैं। स्टाेर के जानकार बताते हैं कि सामान्य रूप से 300 रुपए का रेगुलेटर अब 5400 रुपए में बेचा जा रहा है।

जिला अस्‍पताल में उपलब्धता नहीं हाेने के कारण अब मरीजों के परिजन बाजार से किसी भी कीमत पर रेगुलेटर लाने काे मजबूर है। हालात यह है कि शहर में रेगुलेटर मिलना मुश्किल हाे रहा है। बीते दिनाें नगर परिषद सभापति जैनेंद्र त्रिवेदी ने रेगुलेटर अस्पताल प्रबंधन काे उपलब्ध कराए थे वाे भी खत्म हाे चुके हैं। जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल में मई 2019 से लेकर अप्रैल 2021 तक सिर्फ 79 रेगुलेटर प्राप्त हुए थे। इसमें भी 34 रेगुलेटर इसी माह में उपलब्ध हुए हैं।

बड़ी लापरवाही: डॉक्टर के लिखने के बाद भी 8 घंटे तक नहीं मिला सिलेंडर

एमजी अस्पताल के पॉजिटिव वार्ड में एक संक्रमित काे ऑक्सीजन की कमी हाेने पर डॉक्टर ने सुबह 5 बजे ही सिलेंडर के लिए लिखित पर्ची परिजनों को दी। वे सुबह से स्टोर के चक्कर काटता रहा, लेकिन आठ घंटे बाद दोपहर 3 बजे उसे ऑक्सीजन सिलेंडर दिया गया। नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर संक्रमित के परिजन ने बताया कि कई और भी परिजन दिनभर स्टोर के बाहर बैठे रहे।

इनाेवेशन... शहर के युवक ने पाइप की मदद से बनाए रेगुलेटर

लोगों को रोते देखा तो 70 रुपए में जुगाड़ से बनाए 1 हजार रेगुलेटर, 400 निशुल्क बांटे

शहर के गाेरखईमली निवासी आबिदभाई दुबई वाला ने ऑक्सीजन सिलेंडरों पर लगने वाले रेगुलेटर की कमी काे देखते हुए जुगाड़ से रेगुलेटर बनाना शुरू कर दिया। एक प्रोडक्ट तैयार करने में 70 रुपए का खर्च आया। उन्होंने ऐसे 1 हजार रेगुलेटर तैयार कर दिए हैं। वे बताते हैं कि 400 के करीब निशुल्क बांट भी दिए हैं।

आबिदभाई पिछले कुछ दिनाें से जिला अस्पताल में मरीजों की मदद में जुटे हुए हैं, शुरुआत में उन्होंने ऑक्सीजन सिलेंडर की आपूर्ति में भी मदद की थी। एमजी अस्पताल से राेज खराब रेगुलेटर ठीक हाेने के लिए आते थे। बीते 15 दिनाें में वह करीब 25 से 30 रेगुलेटर ठीक कर दे चुके हैं। वहीं आसमां और मिशन कम्पाउंड हॉस्पीटल के भी रेगुलेटर निशुल्क ठीक कर चुके हैं।

आबिद भाई ने बताया कि जब लाेगाें काे यह पता चला कि वह एमजी अस्पताल में रेगुलेटर दे रहे हैं ताे लाेग उनके पास आकर रेगुलेटर के बदले मुंहमांगे दाम चुकाने काे तैयार हाे गए। लाेग राेते, गिड़गिड़ाते थे। इस पर उन्हें रेगुलेटर की कालाबाजारी का भी पता चला। क्‍योंकि वह मूल रूप से मैकेनिक हैं इसलिए उन्होंने साेचा कि क्यों न सस्ता रेगुलेटर बनाया जाए।

इस पर उन्होंने जुगाड़ के पाइप काे काटकर महज 70 रुपए में रेगुलेटर बना दिया। आबिद भाई ने बताया कि एक पीवीसी पाइप काे काट कर उस पर आटे बनाए और उसे फिर ऑक्सीजन सिलेंडर के पाइप पर फिट कर दिया। पाइप का दूसरा सिरा 60 एमएल की सिरिंज में फिट किया। वहीं इसके बाद सिरिंज के निडल वाले हिस्से काे ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली नली में फीट कर दिया।

सिरिंज के अंदर खाली रहे हिस्से में पानी भर दिया, ताकि ऑक्सीजन सुखी हाेने बजाय लिक्विड फाॅर्म में मिल सके। उन्होंने बताया कि शुरुआत में करीब चार बार उनका प्रयोग फेल हुआ। इसके बाद सफलता मिली, लेकिन वह ड्राई ऑक्सीजन ही दे रहे थे।

इसका वीडियो वायरल हुआ ताे मुंबई से एक डॉक्टर ने उन्हें फाेन कर बताया कि किसी भी मरीज काे ड्राई ऑक्सीजन नहीं दे सकते हैं, इससे खांसी आती है। यदि मरीज गंभीर है ताे उसकी माैत भी हाे सकती है। इस पर उन्होंने पानी की एक बाेतल काे इसमें जाेड़ दिया। इससे मरीजाें काे महज 70 रुपए में मेडिकल ऑक्सीजन मिल रही है।

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