3 घंटे स्ट्रेचर पर शव लेकर घूमता रहा परिवार:परिजनों ने नर्सिंग स्टाफ और पुलिस से मांगी मदद, कई घंटों तक सुनवाई नहीं हुई तो किया हंगामा, पुलिस ने मोर्चरी में रखवाया शव

बांसवाड़ा4 महीने पहले
ट्रॉमा वार्ड पोर्च में नर्सिंग स्टाफ से बात करते परिजन।

महात्मा गांधी राजकीय हॉस्पिटल में मरीज की मौत के बाद शव मोर्चरी में रखवाने के लिए रात में हंगामा हुआ। परिजनों के हंगामे के बाद कोतवाली पुलिस की नींद उड़ी। करीब साढ़े 3 घंटे बाद कोतवाली थाने से जवान पहुंचे। तब कहीं जाकर शव को मुर्दाघर में पहुंचाया गया। इससे पहले परिजन शव को लेकर पूरे अस्पताल में लेकर घूमते रहे। बाद में ट्रॉमा वार्ड के एंट्री पॉइंट के पर्ची काउंटर के पास स्ट्रेचर पर शव छोड़कर खड़े हो गए। परिवार का आरोप है कि उन्होंने सही समय पर शहर कोतवाल को घटना की सूचना दी। इसके अलावा नर्सिंग स्टाफ से भी विनती की, लेकिन किसी ने एक नहीं सुनी।

दरअसल रविवार रात को मेल वार्ड में भर्ती प्रतापनगर, डेरी निवासी कालू (50) पुत्र फूलजी की मौत हो गई। परिजनों ने कालू को 2 दिन पहले यहां भर्ती कराया था। वार्ड से कालू का शव ले जाने के लिए नर्सिंग स्टाफ निरंतर दबाव बनाता रहा। परिजनों से हस्ताक्षर भी करा लिए। मन में किसी आशंका के चलते परिवार ने शव का पोस्टमार्टम कराने का निर्णय किया। इसलिए रात में शव को मुर्दाघर में रखवाने के प्रयास किए। सबसे पहले परिवार ने नर्सिंग स्टाफ से सहयोग मांगा। इसके बाद अस्पताल चौकी पहुंचे तो वहां कोई मिला ही नहीं। तब नर्सिंग स्टाफ के कहने पर परिवार कोतवाली पहुंचा। वहां मामले की लिखित में जानकारी दी। उनके गांव की पाड़ला चौकी को भी इस बारे में सूचित किया, लेकिन 3 घंटे तक न पुलिस पहुंची और न ही नर्सिंग स्टाफ ने शव को मुर्दाघर पहुंचाने में मदद की। इससे नाराज परिजनों ने शव को ट्रॉमा वार्ड के एंट्री गेट पर रख दिया। इसके बाद उनकी नर्सिंग स्टाफ से बहस होने लगी। सूचना पर कोतवाली थाना पुलिस मौके पर पहुंची। कालू के भतीजे रमणलाल डिंडोर ने आरोप लगाया कि वह शाम 7 बजे से शव लेकर घूम रहे थे। अब 10.30 बजे शव को मुर्दाघर में रखवाया गया है।

नर्सिंग स्टाफ के सामने मजबूरी बताते परिजन।
नर्सिंग स्टाफ के सामने मजबूरी बताते परिजन।

चौकी में एक मात्र जवान, वह भी छुट्‌टी पर
एमजी हॉस्पिटल चौकी में एक मात्र जवान है। वह भी जरूरी कारणों के चलते बीते दो दिन से छुट्टी पर है। ऐसे में अस्पताल की चौकी में कोई जवाब देने वाला नहीं मिला। वहीं मुर्दाघर में पोस्टमार्टम करने वाले हेल्पर का फोन भी रात को स्वीच ऑफ आता रहा। इन दोनों के अभाव में नर्सिंग स्टाफ ने हाथ खड़े कर दिए।

अब होगा पोस्टमार्टम
बीमारी के चलते होने वाली मौतों का अक्सर पोस्टमार्टम नहीं होता है। लेकिन, इस मामले में परिजनों ने आगे होकर पोस्टमार्टम कराने की इच्छा जताई है। इसलिए शव को सीधे घर नहीं ले जाकर मुर्दाघर में रखवाया। अब आज दोपहर तक पोस्टमार्टम की कार्रवाई होगी।