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देवों के स्वागत में रोशन शहर:मान्यता स्वर्ग से देवता पृथ्वी पर आते हैं, स्वागत में करते हैं दीपदान

बांसवाड़ा6 महीने पहले
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कार्तिक मास की अंतिम तिथि पूर्णिमा साेमवार काे जिलेभर में मनाई गई। यह पूर्णिमा देव दीपावली के रूप में मनाई गई। काेराेनाकाल हाेने के कारण जिलेभर के अंदेश्वर मेले के आयाेजन काे स्थगित रखा गया था। लोगों ने मंदिराें की पूजा-अर्चना कर धार्मिक कार्यक्रम मनाए। कार्तिक मास काे भगवान शिव के पुत्र के रूप में पूजन कर मनाया जाता है। जिसमें दीपदान का विशेष महत्व है। महिलाएं इस पूरे मास काे व्रत कर दीपदान करती है। इसमें सराेवर, नदी, तालाब और कुओं के पानी से नहाकर भगवान शिव और विष्णु की उपासन का विशेष महत्व हाेता है। इसके बाद कार्तिक पूर्णिम पर उद्घापन किया जाता है। इसके अलावा कार्तिक पूर्णिमा पर जिलेभर के देवालयाें की ध्वजा परिवर्तन भी किया जाता है।

कार्तिक पूर्णिमा पर दान-पुण्य और दीपदान का महत्व

कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दीवाली का त्योहार मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन स्वर्ग लोक से सभी भगवान पृथ्वी पर आते हैं। इन्हीं के स्वागत में दीप जलाकर खुशियां मनाते हैं। इसके अलावा कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही शिवजी ने त्रिपुरासुर नामक राक्षक का वध किया था। कार्तिक पूर्णिमा पर दान पुण्य और दीपदान का विशेष महत्व हैं।

चंद्रपोल गेट से कागदी पिकअप तक किया दीपदान

देव दीवाली कार्तिक पूर्णिमा की संध्या पर शहर के चंद्रपोल दरवाजे से मोक्ष धाम तक सड़क के दोनों तरफ दोनों तरफ महिलाओं ने जलाए गए दीए। सड़क के दोनों तरफ दीयो का यह नजारा बेहद आकर्षक होता है। ऐसा बताया जाता है कि स्थानीय महिलाएं अपने-अपने घरों के बाहर सड़क किनारे दीये जलाती है। जिससे दीयों की ये लंबी कतार बन जाती है।

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