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फिर स्कूल में कैसे सुरक्षित रहेंगे हमारे बच्चे:ओमिक्राॅन से बेपरवाह स्कूल; न मास्क मिले न साेशल डिस्टेंस शिक्षक बाेले-हमें बाेलना पड़ता है, इसलिए मास्क नहीं लगाया

बांसवाड़ा2 महीने पहले
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राउमावि मूंगाणा में बच्चे झुंड में बिना मास्क के बैठे हुए साथ ही कक्षा में बिना मास्क के पढ़ाते टीचर। - Dainik Bhaskar
राउमावि मूंगाणा में बच्चे झुंड में बिना मास्क के बैठे हुए साथ ही कक्षा में बिना मास्क के पढ़ाते टीचर।
  • जिलेभर में राजकीय और निजी स्कूलों में खुलेआम गाइडलाइन का कर रहे हैं उल्लंघन

राजस्थान में काेराेना के नए वैरिएंट ओमिक्राॅन के एक ही दिन में 9 नए मामलों सामने आ चुके हैं। इस नए वैरिएंट के तेजी से फैलने पर उन तमाम पैरेंट्स की फिक्र भी बढ़ा दी है। जिनके बच्चे राेजाना स्कूल आना-जाना कर रहे हैं। चिंता इसलिए भी है क्याेंकि, सरकार ने स्‍कूल संचालन काे लेकर गाइड लाइन जारी कर रखी हैं लेकिन असल में इसकी पालना हाेती नहीं दिख रही।

भास्कर ने जिलेभर में स्कूलों की पड़ताल की ताे ज्यादातर स्कूलों में काेविड प्राेटाेकाॅल की पालना हाेती नहीं दिखाई दी। कई स्कूलों में बच्चे ताे दूर शिक्षक और स्टाफ ही बिना मास्क के नजर अाए। सेनेटाइजर नहीं थे। इस संबंध में जब सवाल किया ताे शिक्षकों का कहना था कि हमें क्लास में बाेलना पड़ता है इसलिए मास्क नहीं लगाते। गौरतलब है कि जिले में काेराेना से 139 लाेगाें की माैत हाे चुकी हैं। ऐसे में स्कूलों में बरती जा रही लापरवाही इसे फैलने का माैका दे सकती है।

मूंगाणा : तीन बच्चाें काे सर्दी-खांसी होने पर भेजा घर

राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मूंगाणा में भास्कर टीम पहुंची ताे मौजूद स्टाफ ने मास्क नहीं लगाया था। बच्चों ने भी मास्क पहन नहीं रखा था। क्लास संचालन काे लेकर स्पष्ट आदेश है कि बच्चों काे दूर-दूर बैठाकर पढाई करवानी है, लेकिन इसकी भी पालना नहीं की जा रही है। प्रिंसिपल प्रियंका डामाेर से बात करने की काेशिश की, लेकिन कार्यवाहक बरखा जाेशी ने बताया कि वाे पीईईओ क्षेत्र की स्कूलों में जांच के लिए गई हुई हैं। स्कूल में कुल 283 विद्यार्थियों का नामांकन है, इसमें साेमवार काे 77 छात्र और 105 बालिकाएं उपस्थित हुई थी। 3 से 4 बच्चों काे सर्दी खांसी की शिकायत हाेने पर उन्हें घर भेज दिया था।

सुंदनी: स्टाफ और बच्चों ने नहीं पहना मास्क

राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सुंदनी में स्टाफ और विद्यार्थी दाेनाें ही बिना मास्क पहुंचे थे। स्कूल में स्टाफ और विद्यार्थी दाेनाें ही बिना मास्क पहुंचे थे। स्कूल के बाहर प्रवेश से पहले सेनेटाइजर की काेई व्यवस्था स्कूल प्रबंधन द्वारा नहीं की गई थी। कार्यवाहक प्रिंसिपल दिलीप कुमार व्यास ने कहा कि 1 से 12वीं तक कुल 513 का रोल है। जिसमें से आज बालिका 176 और बालक 149 उपस्थित थे। मास्क काे लेकर स्टाफ ने बताया कि वाे बच्चों काे मास्क लगाने के लिए हर बार पाबंद करते हैं, लेकिन वाे क्लास में जाकर मास्क निकाल देते हैं। हमें क्लास में पढ़ाना पड़ता है इसलिए मास्क निकाल देते हैं।

हाथ धाेने साबुन ताे दूर, सेनेटाइजर भी नहीं मिला

ग्रामीण इलाकों में स्थित स्कूलों में ही नहीं बल्कि काेराेना काे लेकर शहरी क्षेत्र की स्कूलों में भी स्कूल मैनेजमेंट द्वारा पर्याप्त प्रबंध नहीं किए जा रहे हैं। शहर की सबसे ज्यादा नामांकन वाली राजकीय नूतन उच्च माध्यमिक विद्यालय दाे पारियों में चलाई जा रही है। जहां सुबह भास्कर टीम पहुंची ताे वहां गिने चुने बच्चे ही मास्क पहले नजर आए। वहीं स्टाफ की भी यही स्थिति थी। जब स्कूल में सेनेटाइजर और साबुन से हाथ धाेने की सुविधाओं के बारे में बच्चों से पूछा ताे उन्होंने सेनेटाइजर नहीं हाेना बताया।

यहीं स्थिति माही काॅलाेनी के भीतर स्थित सरकारी स्कूल की भी रही। जहां बात निजी स्कूल की करें ताे हाउसिंग बाेर्ड स्थित स्मार्ट एज की करें ताे यहां पर स्कूल पहुंचते देखा ताे छाेटे-बड़े सभी बच्चे बिना मास्क के क्लास में बैठे थे। यहां शिक्षकों ने भी पूरी तरह से मास्क नहीं पहना था।

अनदेखी: 10 अधिकारी फिर भी नहीं हो रही मॉनिटरिंग

विभाग ने स्कूलों की बेहतर मॉनिटरिंग के लिए सरकार और निदेशालय ने 3 साल पहले ही मॉनिटरिंग सिस्टम काे अधिक प्रभावी बनाने के लिए कार्यालय में अधिकारियों की संख्या काे बढ़ाया। जिसमें एक मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी के अलावा दाे जिला शिक्षा अधिकारी, उनके नीचे 4 एडीईओ, 1 मुख्य ब्लाॅक शिक्षा अधिकारी और उनके अधीन 2 एसीबीईओ और पंचायत स्तर पर एक पीईईओ की व्यवस्था है। लेकिन इसके बाद भी इनके द्वारा स्कूलों की मॉनिटरिंग ठीक से नहीं हाेना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

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