कोरोना विजयी ने कहा / काेराेना काे हराने के लिए असरदार दवा है आत्मविश्वास

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दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 07:17 AM IST

बांसवाड़ा. ये है कुशलगढ़ के वार्ड 12 में रहने वाले 47 वर्षीय मुस्तफा पुत्र सजाउद्दीन राेउनक। 40 दिन अस्पताल में क्वारेंटिन रहने के बाद 12 मई काे पूरी तरह ठीक हाेकर घर लाैटे है। मुस्तफा बताते है कि भले ही इस महामारी की दवा अभी तक इजाद नहीं हाे पाई हाे लेकिन सेल्फ काॅफिडेंस से इसे हराया जा सकता है। बस, इसका बेवजह तनााव ना पाला जाए। मेरा मानना है कि हर वाे इंसान जाे इस बीमारी से ग्रसित हाे चुका है वह दाेबारा पूरी तरह ठीक हाे सकता है। मुझे पहले बुखार आया था फिर खासी भी हाे चुकी थी।

12 दिन कुशलगढ़ चुड़ादा में क्वारेंटिन रहा। फिर 8 दिन उदयपुर और फिर 20 दिन बांसवाड़ा एमजी अस्पताल। 40 दिन के इस सफर में मैंने कहीं पर भी खुद काे बीमार महसूस नहीं हाेने दिया। जब मुझे कुशलगढ़ से उदयपुर रैफर किया गया, तब मुझे बुखार और खासी दाेनाें हाे चुके थे। लेकिन, उदयपुर में 8 दिन में ही इतना रिकवर हाे गया कि दाेनाें ही रिपाेर्ट निगेटिव आई और मुझे बांसवाड़ा भेज दिया गया। वार्ड में कई लाेग तनाव में रहते, मैं उन्हें भी दिलासा देता रहता। मुस्तफा के अात्म विश्वास का पता इसी से चलता है कि जब उनसे पूछा गया कि जब उनकी पहली रिपाेर्ट काेराेना पाॅजिटिव आई ताे क्या मससू किया। इस पर उन्हाेंने कहा कि रिपाेर्ट भले कुछ भी अाई हाे लेकिन मेरा दिल कहता है कि मैं कभी बीमार था ही नहीं। मैंने खुद आगे चलकर कुशलगढ़ से उदयपुर रैफर करने के लिए कहा था। 

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