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रक्षाबंधन पर्व:काेराेना के कारण श्रावणी उपाकर्म ऑनलाइन

बांसवाड़ा2 महीने पहले
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  • यू-ट्यूब, जूम एप, फेसबुक लाइव से घर बैठे बदले जनेऊ, लीयाे काॅलेज में हुआ हेमाद्री श्रवण
  • गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश पुणे सहित वागड़ के लोग जुड़े

काेराेना महामारी का असर इस कदर बढ़ गया है कि विभिन्न समाजाें के धार्मिक और सामाजिक अनुष्ठान भी सामूहिक ताैर पर नहीं हाेकर अब डिजिटल माेड पर आ गए हैं। जी हां ब्राह्मण समाज में देखे ताे रक्षा बंधन ब्राह्मणाें का सबसे महत्वपूर्ण त्याैहार माना जाता है। जिस दिन सभी जनेऊधारी ब्राह्मण साल में एक बार अपने जनेऊ काे बदलते हैं।

यह माैका इसलिए खास हाेता है कि काेई भी व्यक्ति कहीं भी रहता हाे लेकिन इस विशेष दिन वाे अपने मूल गांव में पहुंचकर समाज के साथ ही इस श्रावणी कर्म में भाग लेता है। लेकिन इस बार काेराेना महामारी में साेशल डिस्टेंस काे ध्यान में रखते हुए ऐसा नहीं हाे सका। हालांकि आज के आधुनिक और डिजिटल युग में इस समस्या का समाधान भी हाे गया। अधिकांश लाेगाें ने चाहे शहर हाे या ग्रामीण, वहां लाेगाें ने अपने घर पर ही बैठे ऑनलाइन यू ट्यूब लाइव और फेसबुक और जूम एप के माध्यम से जनेऊ बदलने की पूरी विधि अपनाई।

शहर के में डांगपाड़ा स्थित लियाे काॅलेज परिसर में यह आयाेजन रखा गया। जहां मुख्य आचार्य पं. देवेंद्र शुक्ला, पं. हर्षवर्धन व्यास और पं. मनाेज त्रिवेदी प्रदीप भट्ट के मार्गदर्शन में श्रावणी कर्म का अनुष्ठान शुरू किया। इस दाैरान 10 से 20 लाेग आयाेजन स्थल पर रहे, वहीं शेष लाेगाें ने घर बैठे ही इस अनुष्ठान में भाग लिया।

निदेशक मनीष त्रिवेदी ने बताया कि जिले भर से पांच सौ से अधिक ब्राह्मणों ने भाग लिया। अनुष्ठान में बांसवाड़ा शहर के साथ ही तलवाड़ा, छींच, बड़ोदिया, बागीदौरा, नौगामा, घाटोल, कुशलगढ़, परतापुर के साथ ही डूंगरपुर जिले से भी बड़ी संख्या में ब्राह्मणों ने भाग लिया। यह नवाचार सभापति जैनेंद्र त्रिवेदी की पहल पर किया गया।

ताकि काेराेना महामारी में वायरस काे फैलने से राेका जा सके। त्रिवेदी ने बताया कि यह श्रावणी कर्म परंपरागत रूप से नदियों व सरोवर के किनारे पर की किया जाता रहा है। जिसमें ऋषियों का पूजन व तर्पण करने के साथ ही पुरानी यज्ञोपवीत को उतार कर नया यज्ञोपवीत धारण किया जाता रहा है। इस दाैरान लक्ष्मीकांत त्रिवेदी, देवेश त्रिवेदी, कमल पंड्या आदि माैजूद थे।

पहली बार ऑनलाइन श्रावणी उपाकर्म में 1 हजार लोग शामिल

जिले भर में रक्षाबंधन के पवित्र पर्व के अवसर पर सुबह से विविध धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो गए। कोरोना वायरस संक्रमण के दौर में सोशल डिस्टेंस की पालना करते हुए सोमवार को पहली बार ऑनलाइन श्रावणी उपाकर्म किया गया। कोरोना काल के चलते विप्र वरों द्वारा घर बैठे नवीन जनेऊ धारण किया गया।

पंडित कुलदीप शुक्ला के आचार्यत्व में यू ट्यूब लाइव पर गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, पुणे सहित वागड़ क्षेत्र के करीब एक हजार लोगों ने सुबह 9.45 बजे धार्मिक अनुष्ठान शुरू किया। दोपहर 12.45 बजे नवीन जनेऊ धारण किया गया। ऑनलाइन पूजा में विप्रवरो ने श्रावणी उपाकर्म के तहत हैमाद्री श्रवण व स्नान किया गया।

न्यास, तर्पण के बाद गणेश, गायत्री, विष्णु, सप्त ऋषि पूजन के बाद नवीन यज्ञोपवीत धारण किया। साथ ही आरती और विसर्जन के बाद अनुष्ठान पूर्ण किया गया। पंडित कुलदीप शुक्ला के सहयोग में अर्पित शुक्ला वेदांग त्रिवेदी, मोहनलाल शुक्ला, लक्ष्मीनारायण शुक्ला, किशोर शुक्ला, प्रवीण शुक्ला, बृज भूषण शुक्ला का भी सहयोग रहा।

पंडित कुलदीप शुक्ला ने बताया कि कोरोना काल में ऑनलाइन पूजा एक नया मार्ग प्रशस्त हो गया है। नया तरीका है। इसमें ज्यादा से ज्यादा धर्म के प्रति जागृति हो, धर्म के प्रति जुड़ाव हो। पंडित शुक्ला ने बताया कि ऑनलाइन पूजा यू ट्यूब लाइव पर मिली अच्छी प्रतिक्रिया के चलते अब आगामी दिनों में गणेश नवरात्रि की स्थापना विधि विधान के साथ यू ट्यूब पर लाइव घर बैठे करने का प्रयास किया जाएगा।

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