कांग्रेस की लड़ाई में BTP का बड़ा दांव:​​​​​​​ वेलाराम बोले - घोघरा को कांग्रेस का सच पता चला, इसलिए दिया इस्तीफा

बांसवाड़ाएक महीने पहले
बांसवाड़ा में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे BTP नेता। - Dainik Bhaskar
बांसवाड़ा में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे BTP नेता।

डूंगरपुर MLA गणेश घोघरा को लेकर कांग्रेस में चल रही गहमागहमी के बीच BTP (भारतीय ट्राइबल पार्टी) अपने भविष्य को सुरक्षित करने जुट गई है। यूथ कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष घोघरा की नाराजगी और CM गहलोत को भेजे गए इस्तीफे को तूल देकर BTP कांग्रेस की लड़ाई को लंबा खींचना चाहती है ताकि बगावत के साथ कांग्रेस से नाराज नेता BTP की शरण में आ जाएं। इसके लिए BTP बकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रही है। विवाद को हवा देकर BTP कांग्रेस से उस बात का बदला भी लेना चाहती है, जब जिला परिषद के चुनाव में बहुमत में आगे रही BTP को समर्थन नहीं देकर कांग्रेस ने धुरविरोधी भाजपा के साथ खड़ी हो गई थी। सही मौका तलाशते हुए BTP ने दो साल पुराने कांकरी डूंगरी प्रकरण को भी हवा दे दी है। प्रदेशाध्यक्ष घोघरा से सहानूभूति दिखाते हुए BTP कांकरी डूंगरी प्रकरण का असली सूत्रधार डूंगरपुर में कांग्रेस के दूसरे गुट (दिनेश खोड़निया) को बताने का मौका भी नहीं खोना चाहती। सियासी गणित के समीकरण बनाने में जुटी BTP उदयपुर में हुए कांग्रेस के चिंतन शिविर पर सवाल खड़े करते हुए पार्टी की कमजोर कड़ी पर वार करने की कोशिश भी कर रही है।

वार्ता में मौजूद पार्टी के सिपहसलार।
वार्ता में मौजूद पार्टी के सिपहसलार।

प्रेस काॅन्फ्रेंस में बोले BTP नेता
BTP प्रदेशाध्यक्ष डॉ. वेलाराम ने आरोप लगाया कि कांग्रेस को चिंतन शिविर की जरूरत यहां इसलिए पड़ी कि आदिवासी, माइनोरिटी, दलित, मजदूर, किसान सबका कांग्रेस से विश्वास उठा गया है। MLA घोघरा को जब ये पता चला कि आदिवासी परिवार कांग्रेस से नाता तोड़ चके हैं कांकरी डूंगरी प्रकरण में कांग्रेस ने बेकसूर आदिवासियों को झूठे मुकदमों में फांसा है। धरातल पर सच सामने आने के बाद MLA घोघरा ने खुद की सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। घोघरा जनता के बीच सारा सच ले आए। वेलाराम ने कहा कि आदिवासी को वेदों का ज्ञान नहीं चाहिए। मुख्यधारा में आदिवासी को लाने वाला ज्ञान मत थोपो। हमारी संस्कृति से हमें ही निर्णय लेने दो कि उन्हें कैसे जीना है।
दूसरे नेताओं के कड़वे बोल

BTP के राष्ट्रीय नेताओं ने कहा कि BJP का बनाया हुआ जनजाति सुरक्षा मंच धर्मांतरण के नाम पर डिलिस्टिंग का अभियान चला रही है। ये एक सोची समझी साजिश है। धर्मांतरित और हिन्दू आदिवासी को तोड़कर भाजपा शिड्युल-5 और 6 के तहत मिले हुए आदिवासी अधिकारों को खत्म करना चाहती है। MLA घोघरा के प्रकरण में भी सरकार आदिवासी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने में लगी है। तहसीलदार को टारगेट किया जा रहा है। कांकरी डूंगरी प्रकरण में भी SP कालूराम रावत का तबादला हुआ। उन्होंने कहा कि 70 साल में कांग्रेस आदिवासियों का विकास नहीं कर सकी है। वहीं BJP आदिवासियों को नक्सली बताती है। पेपर लिक कराने में भी कांग्रेस का हाथ है। बेरोजगार के पास पेपर के नाम पर देने के लिए लाखों रुपए नहीं होते। सरकार के आदमी और उनके ही लॉकर के बीच से पेपर गायब हो रहे हैं।

इसलिए चुना बांसवाड़ा

प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए भी BTP ने बांसवाड़ा इसलिए चुना कि डूंगरपुर में कांग्रेस विधायक खुद कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। वहीं बांसवाड़ा से राज्य के दो मंत्री महेंद्रजीतसिंह मालवीया और अर्जुन बामनिया का रिश्ता है। मंत्रियों के गढ़ में आकर बीटीपी ने सीधे चुनौती देने की कोशिश की है।