किसान गेहूं देने को तैयार, लेने वालों का इंकार:गेहूं खरीद केंद्रों पर स्टॉक जमा, तीन दिन से गेहूं की खरीदी रोकी

बांसवाड़ा6 महीने पहले
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ठीकरिया स्थित कृषि उपज मंडी पर - Dainik Bhaskar
ठीकरिया स्थित कृषि उपज मंडी पर
  • समर्थन मूल्य पर खरीदी का मामला, एफसीआई से पांच दिन में लौट रहे लदान ट्रक

समर्थन मूल्य पर गेहूं देने की रजामंदी के बावजूद बांसवाड़ा के खरीद केंद्रों पर किसानों का गेहूं लेने को कोई तैयार नहीं है। गेहूं देने के लिए यहां का किसान ऑफ लाइन टोकन वाली कतार में है। शुक्रवार को लगातार तीसरा दिन है, गेहूं खरीदी केंद्रों से किसानों को निराश लौटना पड़ा है। केंद्र व्यवस्थापकों की मानें तो एफसीआई के गोदामों में मजदूरों की कमी के बीच भंडारण प्रक्रिया धीमी है। इसके चलते लदान वाले ट्रकों को खाली करने में चार से पांच दिन लग रहे हैं। गर्मी के बीच मानसून में हो रहे बदलाव के बीच किसान खेत में पड़े हुए गेहूं को लेकर चिंतित है तो खरीदारों के पास निर्धारित जगह में आवश्यकता से अधिक स्टॉक जमा होने व्यवस्था चरमरा रही है। गौरतलब है कि बांसवाड़ा जिले में 11 गेहूं खरीदी केंद्र हैं। इनमें दो जगहों पर गेहूं उठाने की जिम्मेदारी राजफेड की है।

शहर के समीप के हाल

शहर के समीप ठीकरिया स्थित कृषि उपज मंडी परिसर में राजफेड कंपनी की ओर से समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी हो रही है। यहां स्टॉक रिकॉर्ड में शुक्रवार सुबह तक 5 हजार कट्‌टों में करीब 25 सौ क्विटंल गेहूं जमा है। दूसरी ओर एफसीआई के बाहर कई ट्रक कतार में खड़े हुए हैं। विषम परिस्थितयों के बीच तीन दिन से यहां पर गेहूं खरीदी अटकी हुई है। बाजार लागत से अधिक समर्थन मूल्य के बीच यहां विक्रेता किसानों की कतारें लगी हुई है। ऑफ लाइन टोकन सुविधा के तहत यहां किसानों को क्रम आवंटित किए हुए हैं। किसान परेशान नहीं हो, इसलिए उन्हें कतार के अनुसार दूरभाष से सूचित कर बुलाया जा रहा है।

अब तक का हिसाब

हिसाब की बात करें तो राजफेड के इस केंद्र से 26 अप्रैल तक करीब 7025 क्विंटल गेहूं एफसीआई में जमा कराया जा चुका है, जबकि स्टॉक में जमा गेहूं कतार में है। इस केंद्र से 268 किसानों को ऑफ लाइन टोकन जारी हो चुके हैं, जबकि अब तक केवल एक सौ किसान ही उनका गेहूं जमा करा पाएं हैं। बाकी सभी कतार में हैं।

एक बीघा में आठ क्विंटल

सरकारी व्यवस्था के हिसाब से आने वाले किसान को ऑफलाइन टोकन देने के साथ उसके गेहूं लेने की तारीख दी जा रही है। साथ ही किसान से उसका खसरा नंबर और गिरदावरी रिपोर्ट ली जा रही है। गेहूं लेने के साथ इन दस्तावेज को स्कैन किया जा रहा है। तय हिसाब से एक किसान प्रति बीघा अधिकतम आठ क्विंटल गेहूं ही दे सकता है। गेहूं लेने के बाद ऑनलाइन रिकॉर्ड के आधार पर किसान को उसके खाते में भुगतान दिया जा रहा है। यह भुगतान सात से 15 दिन में प्राप्त हो रहा है।

बांसवाड़ा के ठीकरिया स्थित खरीदी केंद्र पर मौजूद मजदूर एवं व्यवस्थापक।
बांसवाड़ा के ठीकरिया स्थित खरीदी केंद्र पर मौजूद मजदूर एवं व्यवस्थापक।

इसलिए रोकी खरीदी

राजफेड कंपनी के स्थानीय ठेका मैनेजर परेश पंड्या ने बताया कि खरीदी केंद्र पर गेहूं का स्टॉक आवश्यकता से अधिक है। मौसम खराबी के बीच ज्यादा गेहूं स्टॉक करना एक संकट है। एफसीआई में भंडारण की समस्या है। इसलिए तीन दिन से किसानों से गेहूं नहीं ले रहे हैं। एक मरीज के पॉजीटिव आना भी एक कारण रहा है।

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