पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

सीएमएचओ कार्यालय है या भंगार की दुकान:झाडू-पोंछा तो कभी हुआ ही नहीं, शौचालयों की बदबू से बैठना मुहाल, बिल्डिंग में बीमारियों के फंगस का डेरा

बांसवाड़ा2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
सीएमएचओ कार्यालय के प्रथम तल प - Dainik Bhaskar
सीएमएचओ कार्यालय के प्रथम तल प

सीएचसी (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) और पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) पहुंचकर सफाई खामियों को लेकर अधीनस्थों को अक्सर फटकार लगाने वाले चिकित्सा विभाग के आला हुक्मरान खुद जिला मुख्यालय पर गंदगी के ढेर में बैठते हैं।

गंदगी भी ऐसी कि कार्यालय के आधे हिस्से में शौचालय की दुर्गंध बनी रहती है। भीतर कमरों में फाइलों के नाम पर पाेटलियों में बंधा ऐसा कचरा है, जिसे वर्षों से हाथ नहीं लगाया गया। मच्छरों से मलेरिया फैलने की सीख देने वाले चिकित्सा विभाग के कूलरों के हाल किसी कबाड़ खाने की गंदगी से कम नहीं है। कार्यालय में प्रवेश के साथ ही जमा निरोध का स्टॉक, चारों तरफ जाले और दीवारों की सीलन इन जिम्मेदारों की जिंदगी से जुड़ी असलियत को बयां करती है।

सीएमएचओ कार्यालय के प्रवेश द्वार पर निरोध के नाम पर महीनों से जमा स्टॉक।
सीएमएचओ कार्यालय के प्रवेश द्वार पर निरोध के नाम पर महीनों से जमा स्टॉक।

शहर मुख्यालय से करीब पांच किलोमीटर दूर उदयपुर रोड पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय है। इसके भीतर ग्राउंड फ्लोर में करीब 14 और प्रथम तल पर करीब 16 यानी कुल 30 कमरे बने हुए हैं। इनमें सीएमएचओ, अतिरिक्त सीएमएचओ, आरसीएचओ, डिप्टी सीएमएचओ, एनआरएचएम डीपीएम, एनयूएचएम डीपीएम जैसे जिले के बड़े अधिकारियों के कार्यालय हैं।

कार्यालय अधीक्षक से लेकर अन्य कक्ष बने हुए हैं। ग्राउंड फ्लोर पर स्वागत कक्ष के बेतरतीबी के अलावा पीसीपीएनडीटी कार्यालय में दो कुर्सियों को छोड़कर जमीन पर केवल गंदी और बंद फाइलों का कबाड़ पसरा है, लेकिन, हैरानी इस बात की है कि कार्यालय में घुसते से दिखने वाले कबाड़ या स्टॉक को लेकर यहां सबने आंखें मूंद रखी है।

फर्श को देखने से लगता है कि यहां महीनों से कभी झाडू पोंछा ही नहीं हुआ। दीवारों पर मकड़ी के जालों का डेरा है तो सीलन के चलते हर कक्ष की दीवारों पर सफेदा छूट रहा है। बरामदों में भंगार सामान जमा हुआ है। गौरतलब है कि यहां जिला स्तरीय अधिकारियों सहित एक सौ से अधिक का स्टाफ नियमित सेवाएं देता है।

सीएमएचओ कार्यालय के बरामदों में जमा स्टेशनरी एवं अन्य पैक सामग्री।
सीएमएचओ कार्यालय के बरामदों में जमा स्टेशनरी एवं अन्य पैक सामग्री।

प्रथम तल पर ज्यादा गंदगी
सीएमएचओ कार्यालय के प्रथम तल पर जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक नीचे से ज्यादा है। बावजूद इसके यहां बरामदे में वाहनों के पुराने टायर जैसी गंदगी का कबाड़ जमा है। आरसीएचओ के अधीन एक कक्ष में तो फाइलों की गंदगी को एक पर्दे से छुपाया हुआ है। विभाग के जिम्मेदारों का इस गंदगी से प्रतिदिन वास्ता पड़ता है। बावजूद इसके किसी स्तर पर व्यवस्था सुधार को लेकर जोखिम नहीं उठाया जाता। स्थिति जानकर तब ज्यादा हैरानी होती है कि गंदगी में बैठने वाले विभागीय सिपहसालार कमरों की हालत की तस्वीर लेते समय विरोध करते हैं। वह यह मानते हैं कि गंदगी से उनकी बदनामी होगी, लेकिन चाहकर भी कभी सफाई का जोखिम नहीं उठाते।

पीसीपीएनडीटी कार्यालय में जमीन पर फाइलों का ढेर। कूलर गंदगी के साथ हवा फेंकता है।
पीसीपीएनडीटी कार्यालय में जमीन पर फाइलों का ढेर। कूलर गंदगी के साथ हवा फेंकता है।

तीसरी लहर की तैयारी पर सवाल?
विभागीय जिम्मेदारों के कार्यालयों की इस बेहाली ने कोरोना की तीसरी लहर को लेकर जिले भर में की जा रही तैयारियों को भी सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है। ब्लैक और व्हाइट फंगस के लिए लोगों को सफाई रखने की सीख देने वाले इन जिम्मेदारों के कार्यालय में सीलन के साथ में बहुत से फंगस जन्म ले रहे हैं। दूसरों के लिए आदर्श बनने से पहले खुद की बैठक खामियों को दूर करने के लिए इनकी ओर से कोई जोखिम नहीं उठाया जाता है। सबसे ज्यादा फंगस कार्यालयों के शौचालयों की दीवारों पर पसरा हुआ है।

आरसीएचओ कार्यालय के एक कक्ष में गंदगी को छिपाने के लिए लगाया गया पर्दा।
आरसीएचओ कार्यालय के एक कक्ष में गंदगी को छिपाने के लिए लगाया गया पर्दा।

क्या करें, हमारी अपनी मजबूरी
सीएमएचओ एच.एल.ताबियार ने बताया कि कर्मचारियों की अपेक्षा कमरे कम हैं। हर कमरों में बैठक व्यवस्था खराब है। स्टोर भरा हुआ है तो सीएचसी व पीएचसी की सप्लाई यहां उतर रही है। सफाई के लिए झाड़ू पोंछा तो कराते हैं, लेकिन दीवारों की सीलन सही कराने के लिए बजट नहीं है। शौचालयों के हाल हमें भी पता हैं, पर यह मजबूरी है।

सीएमएचओ कार्यालय में सीढ़ियों के नीचे बिखरा हुआ कबाड़।
सीएमएचओ कार्यालय में सीढ़ियों के नीचे बिखरा हुआ कबाड़।
खबरें और भी हैं...