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  • The Highway Could Not Bear The Pressure Of Vehicles Even For 18 Months, The Condition Of Ratlam National Highway No. 927 (A) From Swaroopganj, Attempts To Stop The Ballast By Screwing Also Failed.

53 करोड़ के निकले कंकड़:18 महीने भी वाहनों का दबाव नहीं झेल सका हाई-वे, स्वरूपगंज से रतलाम NH 927 (A) के हाल-बेहाल, पैचवर्क कर गिट्‌टी रोकने की कोशिशें भी हुई नाकाम

बांसवाड़ा17 दिन पहले
तलवाड़ा से कूपड़ा को जोड़ने वाले हाई-वे बिखरी गिट्‌टी।

शहर की पैराफेरी से होकर गुजरते राष्ट्रीय राजमार्ग (927-ए) पर 53 करोड़ की लागत से बनी सड़क पर बिखरती गिट्‌टी ने इसकी गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नेशनल हाई-वे विभाग की देखरेख में तैयार 23.88 किलोमीटर सड़क 18 महीने भी वाहनों का दबाव नहीं झेल सकी।

डामर छोड़ चुकी गिट्‌टी अब कंकड़ बनकर दुपहिया वाहनों के लिए बरसात के दिनों में चुनौती बन रही है। ओवर ब्रिज के साथ बांसवाड़ा में पहली बार हुआ हाई-वे निर्माण शुरुआती दिनों तक तो आदर्श के तौर पर देखा गया, लेकिन घटिया निर्माण के बीच बोल चुकी सड़क पर अब जगह-जगह गड्‌ढे हो गए हैं।

महीनों पहले सड़क पर उखड़ती गिट्‌टी को देखकर विभाग ने खुद की खामी को छिपाने के लिए यहां पैचवर्क कराए, लेकिन भारी वाहनों के दबाव के चलते ऐसे प्रयास सफल नहीं हुए। दबाव में आई सड़क के कुछ हिस्से तो भीतर बैठ गए, जबकि कुछ हिस्सों में पानी ठहरने के साथ ही डामर छूट गया। अब यह कंक्रीट सड़कों पर बिखरी हुई है।

कूपड़ा बायपास से पहले हाई-वे की तस्वीर।
कूपड़ा बायपास से पहले हाई-वे की तस्वीर।

ईपीसी मोड पर निर्माण
स्वरूपगंज (सिरोही) से रतलाम को जोड़ने वाले इस हाई-वे पर छठे फेज की सेंक्शन के बाद किलोमीटर पोइंट 251.20/00 से 275/00 के बीच निर्माण कराया गया था। नेशनल हाई-वे विभाग के तत्कालीन अभियंताओं की देखरेख यह कार्य को ईपीसी (इंजीनियर प्रोक्योरमेंट कंस्ट्रक्शन) मोड पर पूरा हुआ था।

स्वीकृत करीब 96 करोड़ के बजट में से 52.89 करोड़ रुपए सड़क एवं सिविल निर्माण पर खर्चे गए थे, जबकि बची हुई राशि का उपयोग मुआवजा अदा करने जैसे अन्य कामों में हुआ था। इस निर्माण को लेकर विभाग और करनाल (हरियाणा) की निर्माण एजेंसी (मेहता कंस्ट्रक्शन) के बीच 15 मई 2018 को एग्रीमेंट हुआ था। कार्य की शुरुआत जनवरी 2019 को हुई थी। ठेका एजेंसी 14 नवंबर तक ये कार्य पूरा करना था, लेकिन सड़क निर्माण कार्य जनवरी 2020 में पूरा हुआ था। ठेका एजेंसी पर 5 साल तक सड़क की देखरेख की जिम्मेदारी है।

करीब 50 जगहों से ऐसे ही बिखरी है सड़क।
करीब 50 जगहों से ऐसे ही बिखरी है सड़क।

किया सब था...फिर क्यों हुआ
हकीकत में कूपड़ा चौराहे से बजवाना तक बने हाई-वे के दोनों ओर खेतीहर जमीनें हैं। सिंचाई के कारण सड़क के दोनों ओर पानी की प्रचुर उपलब्धता है। चूंकि सड़क वाले इलाके में काली मिट्‌टी की अधिकता के साथ वाटर लॉक की समस्या है। इस मिट्‌टी का सही से ट्रीटमेंट किए बिना संभवतया यहां निर्माण कार्य पूरा हुआ होगा। इसलिए ही निर्माण कम समय में बोल गया। हालांकि विभाग का दावा है कि उन्होंने शर्तों के तहत खुदाई के साथ सब ग्रेड वर्क, सब बेस कोर्स, बेस कोर्स और डामर कार्य किया है।

कूपड़ा ओवर ब्रिज के किनारे ऐसे हाल।
कूपड़ा ओवर ब्रिज के किनारे ऐसे हाल।

कई नोटिस दिए
मामले में नेशनल हाई-वे के एक्सईएन वीरेंद्र शाह ने बताया कि उन्हाेंने एक महीने पहले ही जिम्मेदारी संभाली है। इस बीच वह ठेकेदार एजेंसी को दो नोटिस दे चुके हैं। इससे पहले भी तत्कालीन एक्सईएन की ओर से कई नोटिस जारी हुए हैं। सड़क की हालत को देखते हुए इसके पुर्ननिर्माण की आवश्यकता महसूस हो रही है। इस बारे में उच्चाधिकारियों से भी मार्गदर्शन मांगा गया है।

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