बांसवाड़ा में स्टैचर नहीं मिला तो हाथों में ही उठाया:जिला अस्पताल में जहर पीकर आए युवक को हाथों में लेकर इमरजेंसी तक पहुंचे

बांसवाड़ा4 महीने पहले
अस्पताल के इमरजेंसी से पहले माले पर स्थित मेल वार्ड के बाहर मरीज को उठाए हुए परिजन। - Dainik Bhaskar
अस्पताल के इमरजेंसी से पहले माले पर स्थित मेल वार्ड के बाहर मरीज को उठाए हुए परिजन।

महात्मा गांधी जिला अस्पताल में आने वाले घायलों और मरीजों को स्ट्रैचर जैसी सुविधाएं नसीब नहीं हो रही हैं। अपनों को इमरजेंसी और वार्ड में पहुंचाने के लिए परिवार के लोग यहां हर दिन घायलों को ढोते दिखते हैं। ऐसा ही वाक्या बीती रात देखने को मिला, जब जहर पीकर आए युवक को परिवार एंबुलेंस से उतारने के बाद अस्पताल के करीब 100 मीटर तक इधर-उधर अर्थी की तरह ढोता दिखाई दिया। पहले मेन पोर्च से इमरजेंसी तक परिवार के तीन सदस्य युवक को ढोते रहे। बाद में डॉक्टर की सलाह पर वार्ड में शिफ्ट कराने तक मुसीबत ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। समस्या से मरीज के साथ परिवार की भी बेकद्री होती रही। आदिवासी बाहुल्य बांसवाड़ा जिले के जिला अस्पताल में ऐसी खामियां तब हैं, जब सरकार में इस इलाके से दो-दो मंत्री सत्ता में हैं।

तड़प रहे मरीज को संभालने के लिए हो रही मशक्कत।
तड़प रहे मरीज को संभालने के लिए हो रही मशक्कत।

दरअसल, बीती रात घटवाड़ा थाना सदर निवासी कैलाश डामोर पुत्र नारायण डामोर ने जहर पी लिया था। उसकी तबीयत बिगड़ती देख परिवार उसे इमरजेंसी में एंबुलेंस से लेकर जिला अस्पताल पहुंचा। एंबुलेंस के मेन पॉर्च तक पहुंचने के बाद परिवार ने स्ट्रैचर की तलाश की। असफल हुए तो युवक को वाहन से उतारकर हाथों से ढोकर इमरजेंसी में पहुंचे। वहां डॉक्टर को दिखाने के बाद परिवार युवक को लेकर वार्ड में पहुंचा। तब कहीं जाकर युवक को मेल वार्ड में भर्ती कराया जा सका। यहां आए दिन ऐसे ही हाल देखने को मिलते हैं। बावजूद इसके व्यवस्था में सुधार के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते हैं।

इमरजेंसी के बाहर के हाल।
इमरजेंसी के बाहर के हाल।

अस्पताल में 40 वार्ड बॉय
हकीकत में जिला अस्पताल में वर्तमान में 40 वार्ड बॉय हैं। ये सभी वार्ड वार ड्यूटी पर रहते हैं। ऐसे में कमी के चलते अस्पताल प्रशासन स्ट्रैचर वाली समस्याओं का समाधान नहीं कर पाता है। मजबूरी में मरीजों को स्ट्रैचर और व्हील चेयर खुद को चलानी पड़ती है।

इमरजेंसी तक मरीज को पहुंचाने के लिए हो रही मशक्कत।
इमरजेंसी तक मरीज को पहुंचाने के लिए हो रही मशक्कत।

RMRS में लेंगे प्रस्ताव
इधर, अस्पताल के PMO डॉ. रवि उपाध्याय ने बताया कि अस्पताल के हिसाब से वार्ड बॉय कम हैं। नई भर्तियां हो नहीं रही हैं। इसलिए आगामी RMRS की बैठक में इस बारे में प्रस्ताव लेंगे ताकि ठेका व्यवस्था से निर्धारित दर पर वार्ड बॉय लगा सकें। आए दिन की इस समस्या से हम भी परेशान रहते हैं। हल निकालने में जुटे हैं।