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जिले के हॉस्पिटल में बनेंगे ओआरएस कॉर्नर:कोरोना की तीसरी लहर से पहले चिकित्सा विभाग की तैयारी, कुपोषण की बीमारी से ग्रसित बच्चे होंगे चिंहित, घर-घर जाकर जुटाएंगे जानकारी

बांसवाड़ा22 दिन पहले
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ओआरएस व जिंक टैबलेट के बारे में जानकारी देते चिकित्साकर्मी। - Dainik Bhaskar
ओआरएस व जिंक टैबलेट के बारे में जानकारी देते चिकित्साकर्मी।

जिले में 0 से 5 साल उम्र के बच्चों को चिन्हित कर उनमें दस्त और कुपोषण की पहचान की जा रही है। प्रदेश सरकार के निर्देश पर बांसवाड़ा में बुधवार को इस संबंध में अभियान का आगाज हुआ। अगस्त में आने वाली कोरोना की संभावित तीसरी लहर से पहले इस अभियान को जारी रखा जाएगा। अभियान के पहले दिन दस्त एवं कुपोषण से बच्चों में जन्म लेने वाली बीमारियों के प्रति लोगों को जागरूक किया गया। बच्चों के परिजनों को इस बीमारी के लक्षण और इसके उपाय समझाए गए। यह बताया कि घर में देसी तरीको से भी ऐसी बीमारियों से बच्चों को बचाया जा सकता है। अभियान के तहत बीमारी ग्रस्त बच्चों को चिन्हित कर उन्हें ओआरएस पैकेट, जिंक टैबलेट समेत अन्य दवाइयां उपलब्ध कराई गई।

देवदा पीएचसी के भीमपाड़ा गांव के एक घर में परिजनों को ओआरएस बनाने की जानकारी देती आशा सहयोगिनी।
देवदा पीएचसी के भीमपाड़ा गांव के एक घर में परिजनों को ओआरएस बनाने की जानकारी देती आशा सहयोगिनी।

सब सेंटर तक ओआरएस कॉर्नर
सीएमएचओ डॉ. एच.एल. ताबियार ने बताया कि डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल, सीएचसी, पीएचसी एवं सब सेंटर तक ओआरएस कॉर्नर स्थापित किए जाएंगे। ताकि रोगग्रस्त बच्चे को हर हाल में सरकारी सुविधा का लाभ मिल सके। महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ जिला स्तर पर समन्वय स्थापित कर दस्त नियंत्रण अभियान में आंगनवाडी कार्यकर्ताओं की भूमिका भी तय की जाएगी। आशा सहयोगिनी की ओर से हर घर में जाकर ओआरएस और जिंक टैबलेट संबंधी जानकारी दी जा रही है।

शहर की आजाद चौक डिस्पेंसरी में बच्चे को ओआरएस घोल पिलाते स्वास्थ्यकर्मी।
शहर की आजाद चौक डिस्पेंसरी में बच्चे को ओआरएस घोल पिलाते स्वास्थ्यकर्मी।

टीकाकरण व स्तनपान की भी देंगे जानकारी
एडिशनल सीएमएचओ डॉ. भरतराम मीणा ने बताया कि अभियान की गाइड लाइन के अलावा नियमित स्तनपान भी बच्चों को ऐसी बीमारियों से बचाने का अच्छा माध्यम है। नियमित टीकाकरण से भी बच्चों में जन्म लेने वाली डायरिया बीमारी से बचा जा सकता है। गर्मी और मानसून के मौसम में ऐसी बीमारियां बच्चों को ज्यादा घेरती हैं। छोटे बच्चों में दस्त की समस्या खराब लक्षण है। कई बार इस बीमारी के प्रति की गई लापरवाही से बच्चों की जान तक चली जाती है। सामाजिक एवं आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों में इस बीमारी के ज्यादा प्रभाव देखने को मिलते हैं।

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