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फर्ज का निर्वाह:बेटा नहीं था, बेटियों ने दी पिता को मुखाग्नि, एडवोकेट राजेंद्र पटेल का कैंसर से निधन, बेटियों को बेटे की तरह ही पाला

बांसवाड़ाएक महीने पहले
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बांसवाड़ा. पिता अंतिम संस्कार करती पायल और ईशानी पटेल। - Dainik Bhaskar
बांसवाड़ा. पिता अंतिम संस्कार करती पायल और ईशानी पटेल।

बेटा ही कुल का दीपक होता है और बेटे के बिना चिता को मुखाग्नि कौन देगा यह बातें अब बीते जमाने की बात होती जा रही हैं। मंगलवार को भी ऐसी ही पुरानी रूढिय़ां ओर परंपराएं उस समय टूटती नजर आईं जब एक बेटी ने पिता की चिता को न केवल मुखाग्नि दी, बल्कि अंतिम संस्कार की हर वो रस्मे निभाएं जिसकी कल्पना कभी एक पुत्र से की जाती रही है।

शहर के पृथ्वीगंज इलाके के निवासी एडवोकेट राजेंद्र पटेल पिछले 10 साल से कैंसर से पीड़ित थे। जिनका मंगलवार को निधन हो गया। राजेंद्र पटेल के पायल पटेल और ईशानी पटेल दो लड़कियां ही हैं। जहां दोनों बेटियों ने बेटा-बेटी का भेद खत्म करते हुए मिसाल पेश की है। रूढ़िवादी परम्पराओं को भी दरकिनार कर लोगों को भी एक सीख दी है।

अपने पिता से अधिक लगाव होने के कारण उनकी बेटी पायल पटेल और ईशानी ने चिता को मुखाग्नि दी। वहीं हिम्मत से अंतिम संस्कार की सभी रस्मे भी पूरी की। राजेंद्र पटेल की एक बेटी पायल की अभी 6 महीने पहले ही शादी हुई है। जो निजी स्कूल में शिक्षिका है, वहीं दूसरी बहिन ईशानी पटेल बैंगलोर में सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। ईशानी ने बताया कि पिताजी ने कभी भी हमें बेटी नहीं बल्कि बेटा ही समझा।

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