• Hindi News
  • Local
  • Rajasthan
  • Banswara
  • There Was Not A Single Stadium In The District, If The Family Refused, They Kept Learning From The Defeat By Playing Secretly, So They Reached The IPL From The World Cup.

जुनून की कहानी:जिले में एक भी स्टेडियम नहीं था, परिजन मना करते तो छिपकर खेलते हार से सीखते रहे, इसलिए वर्ल्ड कप से आईपीएल तक पहुंच गए

बांसवाड़ा2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • जिले के तीन युवा खिलाड़ी जो हाल में ही बने राजस्थान रॉयल और रणजी टीम के कोच

विजयपाल डूडी. बांसवाड़ा। बांसवाड़ा में न तो क्रिकेट का स्टेडियम है न ही आधुनिक संसाधन। परिजन खेलने से ज्यादा पढ़ाई पर जोर देते तो छिपकर प्रैक्टिस करते। क्रिकेट किट के लिए नौकरी कर पैसे जमा किए, लेकिन जुनून नहीं छोड़ा। शहर के तीन क्रिकेटरों के जुनून ने आज उन्हें विश्वभर में नाम दिलाया है। तीनों ही खिलाड़ी वर्ल्ड कप से आईपीएल तक वह छाए हुए हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया कि अभाव जुनून से बहुत बड़ा होता है।

मैदान नहीं था, घर पर पिच बना तैयारी की, अंडर-19 वर्ल्ड कप में 13 विकेट लिए, धोनी, गंभीर और जहिर से पछाड़ हुआ सलेक्ट शहर के अनूप दवे अब राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन में सलेक्टर की भूमिका निभा रहे हैं, कुछ ही समय पहले उन्हें आरसीए ने जूनियर चयन समिति के सदस्य बनाया है। दवे उस समय चर्चा में आए जब अंडर-19 वर्ल्ड कप में उनका चयन हुआ। वे बताते हैं कि उस दौर में बांसवाड़ा में कोई स्टेडियम, खेल का सामान भी नहीं मिलता था। घर पर ही पिच तैयार कर सुबह-शाम पसीना बहाया। जुनून की बदौलत आगे बढ़ सके। जिसमें कोच दयालाल नागर की भी अहम भूमिका रही।

खास बात : वर्ष 2000 में श्रीलंका वर्ल्ड कप में चयन के लिए भारतीय टीम के पूर्व कप्तान महेंद्रसिंह धोनी, गौतम गंभीर, दिनेश कार्तिक, जहिर खान भी लाइन में थे, लेकिन उनका सलेक्शन नहीं हुआ। मोहम्मद कैफ की कप्तानी में पहली बार भारतीय टीम वर्ल्ड कप में चैम्पियन बनी। जिसमें दवे ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 13 विकेट झटके थे, जो टूर्नामेंट मे टॉप 5 गेंदबाजों में शामिल रहे, उसके अलावा दवे ने इंडिया ए के लिए भी खेले।

संदेश : दवे ने बताया कि आजकल के खिलाड़ी जल्दी हार मान जाते हैं, लेकिन ऐसा नहीं सोचना चाहिए, हार का मतलब ये नहीं होता की आप कभी जीत नहीं सकते।

घर पर बनाई पिच, छत पर गेंद बांधकर रात में भी की नॉकिंग, गांगुली की आखिरी गेंद पर छक्का लगा जीती देवधर ट्रॉफी
शहर के दिशांत याग्निक को पुड्डुचेरी रणजी टीम का हैड कोच बनाया है। इससे पहले राजस्थान रणजी टीम के फिल्डिंग कोच थे। साथ ही आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स के भी फिल्डिंग कोच हैं। वे इंडिया अंडर -16 के फिल्डिंग कोच भी हैं। इंडिया का कोच बनने का उनका सपना है। याग्निक बताते हैं कि शहर में कोई स्टेडियम नहीं है तो कुशलबाग मैदान में सीमेंट की पिच बनाई। इसके बाद भी घर पर भी छत पर गेंद बांधकर नॉकिंग करता। कई बार असफलता भी मिली, लेकिन निराश नहीं हुए।

खास बात : 2004 से 2017 तक रणजी मैच खेलने के साथ राजस्थान रॉयल्स की तरफ से आईपीएल खेला। विकेट कीपर, बल्लेबाज रहे याग्निक को देवधर ट्रॉफी में सेंट्रल जॉन को जीतने के लिए आखिरी गेंद पर 6 रन चाहिए थे, उस समय याग्निक क्रीज पर थे और ईस्ट जॉन के कप्तान सौरव गांगुली गेंदबाजी कर रहे थे, याग्निक ने छक्का लगाकर मैच जीत लिया था। इस सीजन में उन्होंने आईपीएल में भी रॉयल्स को बेस्ट कैच लिए 4 अवार्ड अपने नाम किए हैं।

संदेश : याग्निक ने बताया कि हर दिन आपका नहीं हो सकता, उससे हताश नहीं होना चाहिए, क्रिकेट में केवल मेहनत ही काम आती है। व्यवस्थाओं का रोना वो रोते हैं, जिनको आगे बढ़ने की उम्मीद नहीं होती।

क्रिकेट किट खरीदने के लिए पैसे नहीं थे तो नौकरी की, लेकिन जुनून बनाए रखा, विजय मर्चेंट ट्रॉफी के लिए मेहनत की, जीता
शहर के कल्पेन्द्र झा को भी पुड्डुचेरी रणजी टीम का स्ट्रैंथ कंडीशनल कोच नियुक्त किया है। झा राजस्थान टीम के अंडर-16, विजय मर्चेंट ट्रॉफी खेल चुके हैं। उसके अलावा रणजी कैंप भी किया है। उन्होंने मुम्बई इंडिया टीम के कैम्प में भी बड़ौदा में हिस्सा लिया। झा को कोचिंग का शौक शुरू से रहा है। उन्होंने उत्तराखंड में मदनलाल की क्रिकेट एकेडमी में भी कोचिंग दी है। उसके बाद मुम्बई से क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया एजुकेशन प्रोग्राम किया। जिसको लेकर भारतीय टीम के पूर्व कोच ग्रेग चैपल ने भी गाइड किया।

खास बात : झा बताते हैं कि जीवन संघर्ष से भरा रहा है। जब राजस्थान के लिए खेलते थे या जयपुर में ट्रेनिंग करते थे, तो किराया, हॉस्टल का खर्चा भी खुद नौकरी करके निकालता था, एक इंश्योरेंस कंपनी में काम करता था, ताकि घर वालों को पैसे के लिए परेशान नहीं करना पड़े। झा ने बताया कि कई बार ऐसे लगा कि क्रिकेट छोड़कर कोई दूसरी नौकरी करनी चाहिए, लेकिन ग्रेग चैपल से सलाह लेता रहा, हार नहीं मानी। झा इंग्लैंड में बने क्रिकेट क्लब के खिलाड़ियों को भी ऑनलाइन कोचिंग देते हैं।

संदेश : खेल हो अन्य किसी क्षेत्र में रुचि हो तो कितनी भी बाधाएं, हार झेलनी पड़े। उसे पूरा करें। क्योंकि हार से पता चलता है, जीतना कैसे है। इसलिए कुछ करने से पहले मैदान नहीं छोड़ना चाहिए।

खबरें और भी हैं...