राहत:डीपीआर में थे 5 बाईपास, अधिकारियों की लापरवाही के चलते बांसवाड़ा,तलवाड़ा बाइपास को नहीं मिली स्वीकृति

बांसवाड़ा2 महीने पहले
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बांसवाड़ा-डूंगरपुर नेश्नल हाइवे 927 ए। - Dainik Bhaskar
बांसवाड़ा-डूंगरपुर नेश्नल हाइवे 927 ए।
  • अगर बाईपास बनता है तो ये बड़ी गाड़ियों शहर के बाहर से होकर जाती जिससे शहर में ट्रैफिक का दवाब कम बढ़ता

नेशनल हाईवे 927 ए बांसवाड़ा से लेकर गढ़ी, सागवाड़ा, डूंगरपुर खेरवाड़ा काम चल रहा है। लेकिन भास्कर की पड़ताल में जिला विभाग के अधिकारियों की लापरवाही से यहां बाईपास तक स्वीकृत नहीं हुआ है। बांसवाड़ा और तलवाड़ा में बनने वाला बाईपास को मंजूरी नहीं मिली है। जिसके चलते यहां इलाके के लोगों को काफी नुकसान हुआ है।

जब इसकी डीपीआर बनी थी उस समय बांसवाड़ा, तलवाड़ा, परतापुर-गढ़ी, सागवाड़ा, डूंगरपुर सहित 5 बाईपास शामिल थे, लेकिन स्वीकृति जब जारी की गई तो उसमें बांसवाड़ा और तलवाड़ा को हटा दिया गया। केवल परतापुर-गढ़ी, सागवाड़ा, डूंगरपुर बाईपास को ही शामिल किया गया। जिसमें यहां के अधिकारियों ने प्रभावशाली लोगों के फायदे को देखते हुए प्रस्ताव भेजा गया, खराब तरीके से प्रस्ताव बनाया, जिसमें कई तरह की त्रुटियां रही, जिसके चलते उच्च अधिकारियों ने इसकी स्वीकृति नहीं दी । इस मामले में चीफ इंजीनियर डी आर मेघवाल और एक्सईन शाह को भी डीपीआर में 5 बाइपास होने की जानकारी नहीं हैं।

बाइपास बनने से बांसवाड़ा, तलवाड़ा का होता विकास: नेशनल हाईवे 927 ए रतलाम से खेड़ा तक 310 किलोमीटर तक बनना है। जिसमें अगर बांसवाड़ा और तलवाड़ा में बाईपास बन जाता तो इनके विस्तार की गति बढ़ जाती। यहां हाइवे के आस पास लोग रहने के लिए या अन्य तरह के काम करने के लिए यहां जमीन खरीददते। जिससे यहां के विकास में महत्वपूर्ण होता। इसके अलावा अभी भी बड़े बड़े ट्रक माल भरकर शहर के अंदर से जा रहे हैं, जिससे हर दिन कोई हादसा होता है।

अगर बाईपास बनता है तो ये बड़ी गाड़ियों शहर के बाहर से होकर जाती। जिससे शहर में ट्रैफिक का दवाब कम बढ़ता। बताया जा रहा है कि दोनों ही जगह बाइपास इसलिए स्वीकृत नहीं हुए कि यहां के विभाग के अधिकारियों ने प्रभावशाली लोगों और नेताओं को फायदा देने के लिए उसी तरह का मास्टर प्लान तैयार किया गया। जिसकी वजह से अच्छा प्रस्ताव नहीं बन पाया। जिससे की बाइपास के लिए स्वीकृति मिल सके। जिसको लेकर अब अधिकारी इस मामले को दबाने में लगे हुए हैं। कोई भी यहां दोनों जगहों पर बाइपास स्वीकृत क्यों नहीं हुआ बताने को तैयार नहीं हैं।

अधिकारियों की गलती से हुआ नुकसान: एक्सपर्ट

राजस्थान ट्राइबल एरिया विकास समिति के अध्यक्ष गोपीराम अग्रवाल का कहना है कि अधिकारियों की लापरवाही के चलते यहां के लोगों को नुकसान हुआ है। अगर बांसवाड़ा और तलवाड़ा का बाइपास स्वीकृत हो जाता तो शहर का विस्तार होता, विकास होता। डीपीआर में 5 बाइपास थे, लेकिन अब यहां के अधिकारी झूठ बोल रहे हैं। यहां के अधिकारियों ने ही प्रस्ताव घटिया बनाकर भेजा, जिससे पास नहीं हो पाया। अब दुबारा प्रस्ताव सही तरीके से भेजना चाहिए।

अभी तो दो तीन बाइपास स्वीकृत हुए है। जिसमें बांसवाड़ा, तलवाड़ा नहीं हैं। डीपीआर में क्या था, उसकी अलग बात है। डीपीआर में भी दोनों जगह के लिए बाइपास नहीं था। इस बारे में मुझे ज्यादा ध्यान नहीं हैं। -विरेंद्र शाह, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी

डीपीआर में अलग बात है। लेकिन अभी तक कोई बाइपास ही स्वीकृत नहीं हुआ है। आप 5 के बारे में बता रहे हैं, इसके बारे में ज्यादा जानकारी तो हमारे एक्सईएन शाह बता सकते हैं। हो सकता है कोई बाइपास स्वीकृत हुआ है तो उनके पास सीधे आदेश गए होंगे। मुझे तो इसकी जानकारी नहीं है। -डी.आर मेघवाल, चीफ इंजीनियर,पीडब्ल्यूडी

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