गर्मियों में राजस्थान आया फ्लेमिंगो:माही डैम को ब्रीडिंग के लिए बनाया नया ठिकाना, नेचर लवर के लिए है गोल्डन चांस

बांसवाड़ा2 महीने पहले

बांसवाड़ा के माही डेम बैक वाटर में इन दिनों राजहंस (फ्लेमिंगो) पक्षी डेरा डाले हुए हैं। गुजरात के कच्छ से आमतौर पर फ्लेमिंगो सर्दियों में आते हैं। मगर इस बार गर्मी में यहां आए हैं। शर्मीले पक्षियों में शामिल फ्लेमिंगो के झुंड को यहां सुबह से शाम तक पानी में अठखेलियां करते हुए देखा जा सकता है। ये पक्षी भोजन के लिए अलग-अलग जगहों पर उड़ान भरते हैं। खास बात यह है कि फ्लेमिंगो रात के समय खुद को सुरक्षित रखने के लिए टापू के बीच ही रहते हैं। गर्मियों का सीजन इन पक्षियों के लिए प्रजनन काल होता है।

शहर से 16 KM दूर माही बांध के भीतर करीब 700 मीटर कच्चे में तीन घंटे समय बिताने के बाद इन पक्षियों की अठखेलियां और नेचर के साथ उनका तालमेल देखने को मिला। रतलाम रोड पर छीछला पानी होने के साथ ही साफ दिखते पानी में सैकड़ों की संख्या में फ्लेमिंगो पर्यावरण के लिए अच्छा संकेत है। यहां प्रजनन कर ये अपनी संख्या में इजाफा कर रहे हैं।

समूह के बीच किसी प्लेन की तरह नीचे उतरता फ्लेमिंगो।
समूह के बीच किसी प्लेन की तरह नीचे उतरता फ्लेमिंगो।

सेफ्टी, फूड और ब्रीडिंग है खास
पर्यावरण एवं पक्षी प्रेमी भरत कंसारा ने बताया कि ये पक्षी सेफ्टी, फूड और ब्रीडिंग को लेकर अक्सर मूवमेंट करते हैं। फ्लेमिंगो गुजरात के कच्छ से यहां आते हैं। ब्रीडिंग प्लेस पर भोजन की उपलब्धता और सुरक्षा में कमी को देखते हुए ये ब्रीडिंग सीजन के बाद एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं। माही बांध में भोजन की उपलब्धता के कारण इनका कुनबा यहां बना हुआ है। ये सामाजिक प्राणी होते हैं, जो समूह में उड़ान भरते हैं। एक ग्रुप में इनकी संख्या 15 से 50 हो सकती है। फ्लेमिंगो आमतौर पर एक पैर पर खड़े दिखाई देते हैं। एक पैर पर खड़े होकर यह अधिकाधिक बॉडी हीट को संरक्षित करता है।

फ्लेमिंगो का बड़ी संख्या में यहां पहुंचना पर्यावरण के लिए शुभ संकेत माना जा रहा है।
फ्लेमिंगो का बड़ी संख्या में यहां पहुंचना पर्यावरण के लिए शुभ संकेत माना जा रहा है।

हलचल होने पर गहरे पानी में गए फ्लेमिंगो
माही के पानी में फ्लेमिंगों की हलचल वाली तस्वीर गेमन पुल से कैमरे में आसानी से कैद की जा सकती है। पक्षी प्रेमी भरत कंसारा के साथ गेमन पुल से करीब 70 मीटर दूर टापू पर बाइक से पहुंचे। किनारे पर फ्लेमिंगो का बड़ा झुंड इंसानी हलचल के साथ ही गहरे पानी में बढ़ता गया। कैमरा लगाकर जमीन पर लेटकर करीब आधे घंटे बाद फ्लेमिंगो पूरी तरह आश्वस्त होकर फिर से किनारे की ओर बढ़ा। जरा सी हलचल से एक फ्लेमिंगो ने दिशा बदली तो पूरा समूह फिर गहरे पानी में चला जाता। नजदीक आए फ्लेमिंगो के बीच एकदम से खड़े होकर कपड़े झटकने पर पूरा झुंड हवा में उड़ गया, जो मौके से 50 मीटर दूर फिर किनारे पर नजर आया।

शिकार ही नहीं सुरक्षा के लिए भी पैनी नजर रखते हैं फ्लेमिंगो।
शिकार ही नहीं सुरक्षा के लिए भी पैनी नजर रखते हैं फ्लेमिंगो।

विश्व में 6 प्रजातियां
विश्व में राजहंस की 6 प्रजातियां हैं। भारत में दो प्रजातियां दिखती हैं। पहला ग्रेटर फ्लेमिंगो (बड़ा राजहंस) और दूसरा लेसर फ्लेमिंगो (छोटा राजहंस)। ग्रेटर फ्लेमिंगो गुजरात का राज्य पक्षी भी है। इसका वैज्ञानिक नाम फोनीकॉप्टरस रोज़ेयस है। यह भ्रमणशील प्रजाति है। फीडिंग साइट अक्सर अलग-अलग देशों में सैकड़ों किलोमीटर की दूरी पर होती है। इन स्थानों तक जाने के लिए ज़्यादातर उड़ानें रात में होती हैं। फ्लेमिंगो एक प्रवासी पक्षी है, जो ठंड से बचने के लिए और भोजन की तलाश में एशिया में प्रवास करता है। ग्रेटर फ्लेमिंगो 6 प्रजातियों में सबसे लंबा है।

इसकी लंबाई 3.9 से 4.7 फीट तक होती है। इनकी चोंच इन्हें दूसरे पक्षियों से अलग बनाती है। मुड़ी हुई चोंच औजार की तरह काम करती है। इनका पसंदीदा खाना मछली , मेंढक, केकड़ा, घोंघा, कीड़े , मकोड़े होते हैं, जो जलीय वनस्पति भी खाते हैं। इनकी आयु करीब 30 साल होती है। सुरक्षित माहौल में 10 साल ज्यादा जीते हैं।