मंडी में 60% बची आवक:20 रुपए किलो बिकने वाला टमाटर ~60 पर पहुंचा

बांसवाड़ा2 महीने पहले
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  • काेराेना की तीसरी लहर के डर से की कम उपज, आंध्र प्रदेश-कर्नाटक में बाढ़ का असर

काेराेना की तीसरी लहर के डर से इस बार टमाटर की उपज कम की गई, ताकि नुकसान न झेलना पड़े। वहीं आंध्रप्रदेश और कर्नाटक में बाढ़ आने के कारण इन दिनाें मंडी में टमाटर की आवक घट गई है। इसी वजह से टमाटर दोगुने दामाें में बिक रहे हैं। आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में आई बाढ़ से इन 2 टमाटर उत्पादक राज्यों की फसल खराब हो गई है। नतीजा- 10 से 20 रुपए किलो के बीच बिकने वाला टमाटर बाजारों में 60 रुपए किलो बिक रहा है। टमाटर के भाव में यह तेजी बीते 2 महीने में आई है।

इस तेजी का नतीजा यह है कि सब्जी और सलाद में से टमाटर गायब हो गया है। मंडी के थोक व्यापारी हिमांशु भाेई बताते हैं कि बुधवार को मंडी में टमाटर का भाव 60 रुपए किलो तक था। जबकि आमताैर पर इस माैसम में टमाटर 20 से 30 रुपए किलाे ही बिकते हैं। वहीं शादियाें का सीजन शुरू हाेने से भी टमाटर की खपत बढ़ गई है। हिमांशु ने बताया कि काेराेना की दाेनाें लहराें में किसानाें काे काफी घाटा हुआ था। उपज ताे हाे गई थी, लेकिन लॉकडाउन के कारण बाजार में बेचने नहीं जा पा रहे थे। स्थानीय मंडी में इतनी खपत नहीं थे।

ऐसे में किसानाें ने तीसरी लहर के डर से इस बार इतनी उपज ही तैयार नहीं की, ताकि उन्हें नुकसान नहीं झेलना पड़े। क्योंकि पिछले दाे साल में उन्हें उपज जानवरों काे खिलानी पड़ी थी। भारत में सबसे ज्यादा टमाटर आंध्र प्रदेश में होता है। दूसरे नंबर पर कर्नाटक और मप्र का तीसरा नंबर है। अभी ज्यादातर टमाटर आंध्र व कर्नाटक से आता है और इन दोनों राज्यों में बाढ़ ने फसल खराब कर दी है। मध्यप्रदेश में उपज कम हुई थी, लेकिन आगामी दाे से तीन महीने में मध्यप्रदेश से नई उपज आने के बाद दाम फिर से घटने की उम्मीद जताई जा रही है।

40% घट गई आवक

हिमांशु ने बताया कि इन दिनाें मंडी में नासिक, मध्यप्रदेश के रतलाम, मंदसाैर, प्रतापगढ़, गुजरात और स्थानीय गांवाें से टमाटर अा रहे हैं। पहले की तुलना में अब आवक 60 फीसदी ही रह गई है। यानी 40 प्रतिशत आवक घट गई है। हाल ही में दाे दिन से बदले माैसम से अभी टमाटर सहित अन्य सब्जियाें की आवक पर भी सीधा असर पड़ा है।

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