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डंडे के जोर पर कोरोना की जांच:एमजी हॉस्पिटल के सामने लिए नमूने, चिकित्सा विभाग खुद से टारगेट पूरे नहीं कर पा रहा, इसलिए लोगों को रोकने लिए ली पुलिस की मदद

बांसवाड़ा15 दिन पहले
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डंडा दिखाकर सवारी टेम्पो को रोकती पुलिस। - Dainik Bhaskar
डंडा दिखाकर सवारी टेम्पो को रोकती पुलिस।

तीसरी लहर की आशंका के बीच कोरोना जांच का टारगेट पूरा करने के लिए चिकित्सा विभाग को पुलिस की मदद लेनी पड़ रही है। सरकार और चिकित्सा विभाग की ओर से जांच कराने की अपील के बाद भी लोग हॉस्पिटल नहीं जा रहे हैं। ऐसे में टारगेट से दूर विभाग पुलिस की मदद लेने में लगा है। एमजी हॉस्पिटल के बाहर सोमवार को पुलिस ने डंडे के जोर पर करीब 300 से ज्यादा लोगों के जांच नमूने दिलवाए। वर्दी में खड़ी पुलिस डंडा दिखाकर गाड़ियों को रोकती रही और पास में मौजूद एमजी हॉस्पिटल की व्हीकल लैब के साथ मौजूद स्टाफ धड़ाधड़ लोगों के नमूने लेते गया। यह सिलसिला कई घंटों तक चला।

इस दौरान स्थिति यह रही कि जिम्मेदारों ने 3 दिन का टारगेट एक दिन में पूरा करने की कोशिश की। नमूनों की जांच रिपोर्ट मंगलवार शाम तक मिलेगी। इससे पहले 14 अगस्त को भी विभाग ने पुलिस की मदद लेकर शहर मुख्यालय पर आने वाले ग्रामीणों को रोककर भी जांच के टारगेट पूरे किए गए थे। वहीं ग्रामीण इलाकों में भी थाना पुलिस की मदद लेकर विभाग ऐसे टारगेट पूरे कर रहा है।

एमजी हॉस्पिटल के बाहर लोगों को रोकती पुलिस।
एमजी हॉस्पिटल के बाहर लोगों को रोकती पुलिस।

विभाग की अब तक की स्थिति

  • जिले में अब तक लिए गए कोरोना नमूने-: 1,85,518
  • सामने आए पॉजिटिव केस-: 11,747
  • नेगेटिव नमूनों की संख्या-: 1,64,308
  • वर्तमान में जांच प्रक्रिया में नमूने-: 332

यूं दिए हुए हैं टारगेट
चिकित्सा विभाग की ओर से अधीनस्थ सरकारी अस्पतालों और स्टाफ को टारगेट मिले हुए हैं। इसके तहत जिला मुख्यालय के जिला अस्पताल यानी महात्मा गांधी राजकीय अस्पताल को प्रतिदिन औसत 200 कोविड सैंपल लेने हैं। इसी तरह सीएचसी को प्रतिदिन 50 नमूने लेने हैं। वहीं पीएचसी को 30 और सब सेंटर को प्रतिदिन औसत 10 नमूने लेने हैं। लेकिन, कोरोना की दूसरी लहर के बाद लोगों में नमूनों को लेकर उदासीनता का ग्राफ बढ़ गया है। मजबूरी के अलावा आम आदमी नमूने नहीं दे रहा है।

सावधानी के लिए रैंडम जांच
सीएमएचओ डॉ. हीरालाल ताबियार ने कहा कि तीसरी आशंकित लहर को लेकर चिकित्सा विभाग रैंडम नमूने लेता है। जिला मुख्यालय पर हर जगह से ग्रामीण आते हैं। नमूने लेकर उनकी पहचान और मोबाइल नंबर लेते हैं। जांच के बाद रिपोर्ट नेगेटिव है तो कुछ नहीं। पॉजेटिव मामलों की सूचना मिलती है। इससे उस रोगी के साथ उस इलाके पर विशेष जांच की जाती है। लोग रुकते नहीं हैं, इसलिए पुलिस की मदद लेते हैं।

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