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बुलंद हौसलों से मंजिल तक पहुंचे:टीएसपी की आरएएस सूची में चर्चित सबसे अव्वल, एसटी (टीएसपी) में दीपिका कटारा ने बाजी मारी, बांसवाड़ा की सूची में सामने आए सात नाम

बांसवाड़ा20 दिन पहले
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आरएएस (टीएसपी) सूची में नंबर एक पर रहे बागीदौरा निवासी चर्चित उनके परिवार के साथ। - Dainik Bhaskar
आरएएस (टीएसपी) सूची में नंबर एक पर रहे बागीदौरा निवासी चर्चित उनके परिवार के साथ।

कहते हैं हौंसलों की उड़ान बुलंद हो तो मंजिल छोटी दिखती है। ऊंचाइयों पर मुकाम बनाने की इसी चाहत ने बांसवाड़ा के 7 युवाओं को उनके मुकाम तक पहुंचा दिया। आरएएस सूची में बांसवाड़ा के कुल 8 नाम सामने आए हैं। आरएएस (टीएसपी) सूची में पहली रैंक हासिल करने वाला चेहरा भी बांसवाड़ा के बागीदौरा का है, जबकि अनुसूचित जनजाति की सूची में बागीदौरा की ही दीपिका कटारा का नाम सबसे आगे है। जनजाति बाहुल्य बांसवाड़ा जिले से संभवत: पहली बार इतनी बड़ी संख्या में आरएएस अभ्यर्थियों ने उनकी मंजिल तय की है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार का सीना गर्व से चौड़ा हुआ है। दैनिक भास्कर डिजीटल की टीम ने इन सभी चयनित अभ्यर्थियों से उनकी दिनचर्या सहित शैक्षणिक चुनौती पर विस्तार से चर्चा की तो कुछ ऐसे तथ्य निकलकर सामने आए।

चर्चित मेहता।
चर्चित मेहता।

टीएसपी सूची में पहले नंबर पर चर्चित
बागीदौरा उपखण्ड मुख्यालय पर रहने वाले चर्चित मेहता (25) आरएएस (टीएसपी) सूची में नंबर एक पर हैं। वहीं प्रदेश स्तर पर उनकी रैंक 110वीं है। आरएएस परीक्षा में यह उनका दूसरा अटेंप्ट था। बीटेक, एमए (हिस्ट्री) और नेट/जेआरएफ में देश की सूची में नंबर एक पर रहे चर्चित का सपना शुरू से कुछ बड़ा करने का था।

सरकारी स्कूल में सेवारत प्रधानाचार्य पिता जयंतीलाल और मां पुष्पा मेहता ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचने के लिए प्रेरित किया है। इससे पहले केवल तीन नंबर से चर्चित का फस्ट अटेम्प्ट छूट गया था। इस बार उन्हें मन में विश्वास था कि वह उनकी मंजिल तक पहुंचेंगे। चर्चित वर्तमान में राजस्थान यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर रहे हैं।

दीपिका कटारा।
दीपिका कटारा।

एसटी सूची में नंबर एक पर
मौसम विभाग, नागपुर में वैज्ञानिक सहायक के तौर पर सेवाएं दे रही दीपिका कटारा (28) यहां झांझरवाखुर्द (गांगड़तलाई) गांव की हैं। कम्प्यूटर साइंस से बीटेक करने के बाद दीपिका की नौकरी लग गई थी। आरएसएस में उनका यह पहला अटेम्प्ड है। टीएसपी सूची में एसटी वर्ग में उनका पहला स्थान है। वहीं टीएसपी सूची में 24 रैंक है। दीपिका का कहना है कि उनके पति रोहित खांट भी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। उनके पिता विजयसिंह कटारा, जो कि सरकारी अस्पताल में मेलनर्स हैं। उन्हें अक्सर कुछ बनने के लिए प्रेरित करते थे। हालांकि, उन्होंने कहा कि सूची के हिसाब से उन्हें अच्छा पद मिला तो वह मौसम विभाग की नौकरी छोड़ेंगी। अन्यथा वह केंद्र सरकार की नौकरी करना ही पसंद करेंगी।

परिवार के बीच हर्षित कुमार कलाल।
परिवार के बीच हर्षित कुमार कलाल।

पहली बार में चौका
सज्जनगढ़ निवासी हर्षित कुमार (23) पुत्र दिनेश चंद्र कलाल ने पहली बार में आरएएस की टीएसपी सूची में 7वीं रैंक बनाई है। वहीं राजस्थान स्तर पर उनकी रैंक 672 है। एमए पास हर्षित उनकी इस उपलब्धि का श्रेय उनकी बुआ को देते हैं। उनका कहना है कि उनकी बुआ उन्हें अक्सर कुछ बड़ा करने के लिए प्रेरित करती थी।

दिलीप कुमार पाटीदार।
दिलीप कुमार पाटीदार।

फाैज छोड़ दी, हौंसले बुलंद
सुरवानिया निवासी दिलीप कुमार पाटीदार (41) यूं तो किसान के बेटे हैं। जय जवान, जय किसान के नारे से रिश्ता रखने वाले दिलीप भारतीय सेना में नायक से सेवानिवृत्त हैं। वर्ष 2002 से 2019 तक सेना की सिगनल कोर में सेवाएं देने वाले एमए बीएड दिलीप ने एक साथ फस्ट ग्रेड, सेकंड ग्रेड शिक्षक और आरएएस का एक्जाम दिया था। किस्मत से वह सभी एग्जाम पास होते गए। पहले सेकंड ग्रेड टीचर के तौर पर अगस्त 2020 में राउमावि सालिया जोइन किया। इसके बाद फस्ट ग्रेड शिक्षक के तौर पर राउमावि नौगामा में मार्च 2021 को जोइन किया। अब आरएसएस सूची में उनका 54वां स्थान है। यह उनका पहला अटेम्प्ड था। उनकी पत्नी संतोष यहां सुरवानिया में ही कृषि पर्यवेक्षक हैं। वह इस मुकाम का श्रेय परिवार और दोस्तों को देते हैं।

मनोज कुमार गरासिया।
मनोज कुमार गरासिया।

पहले से नौकरी पर अब 41वीं रैंक
गमानिया हमीरा (गांगड़तलाई) वाले नोन कमांड क्षेत्र के मनोज गरासिया (26) अभी जिला रसद विभाग बांसवाड़ा में प्रवर्तन निरीक्षक हैं। पहले अटेम्प्ट में उन्हें यह उपलब्धि मिली थी। अब की बार उन्होंने आरएएस की एसटी सूची में 41 रैंक बनाई है, जबकि प्रदेश सूची में उनका 1041 स्थान है। वह उनकी इस उपलब्धि का श्रेय पिता कैलाशचंद्र गरासिया और मां कौशल्या को देना चाहते हैं।

तृप्ति त्रिवेदी।
तृप्ति त्रिवेदी।

परिस्थितियों से सीखी
रैय्याना निवासी तृप्ति त्रिवेदी (29) पुत्री कन्हैयालाल त्रिवदी ने पहले अटेम्प्ट में यह मुकाम बनाया है। उदयपुर से बीसीए और जयपुर से एमसीए करने वाली तृप्ति का कहना है कि घर में मिले अच्छे माहौल के साथ बाहर पढ़ाई करने के तजुर्बों ने बहुत कुछ सिखाया है। उनका शुरू से सपना था कि वह आरएएस अपसर बनें। इसके लिए उन्होंने लगातार प्रयास किए। परिवार ने उन्हें इस मंजिल तक पहुंचाने में पूरा साथ दिया।

नारायण लाल डामोर।
नारायण लाल डामोर।

अभी बनना है आईएएस
मस्का छोटा (सज्जनगढ़) निवासी नारायणलाल (32) पुत्र कलसिंह डामोर का टीएसपी (एसटी) सूची में दूसरा स्थान है। वहीं टीएसपी में उनकी 33वीं रैंक है। बीटेक इलेक्ट्रीकल डिग्री के साथ इस मुकाम पर पहुंचे नारायण का सपना आईएएस बनने का है। पहले दो बार आरएएस परीक्षा का अनुभव ले चुके नारायण अभी जयपुर में रहकर आईएएस मेंस की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि उनके पिता सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल रहे हैं। उन्होंने हमेशा से नारायण को ऊंचा मुकाम बनाने के लिए प्रेरित किया।

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