सलाह / बौद्धिक सत्र में मिली सीख अपनाने होंगे परंपरागत तरीके

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दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 07:26 AM IST

बांसवाड़ा.  विद्याभारती जनजाति समिति राजस्थान के ई-कार्यकर्ता विकास वर्ग में शनिवार के बौद्धिक सत्र में ऑनलाइन मार्गदर्शन देते हुए हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ चित्तौड़ प्रांत के प्रांत प्रचारक विजयानंद ने कहा कि प्रारंभ में मानव प्रकृति के प्रति अनुकूल था, इसलिए किसी भी प्रकार की आपदा अथवा जनहानि का कोई प्रश्न ही नहीं था। जैसे-जैसे मनुष्य ने प्रकृति का शोषण प्रारंभ किया, वैसे-वैसे प्रकृति विनाश के लिए तैयार हुई। प्रथम बार परमाणु बम बनाने वाले वैज्ञानिक का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जब वह बनकर तैयार हो गया तो उन्हें आत्म ग्लानि महसूस हुई कि यह आविष्कार मानवीय संसाधनों का विनाश करेगा। आज वैश्विक महामारी कोरोना का जो संकट खड़ा हुआ है। वह इसी का परिणाम है। 
 उन्होंने इस स्थिति पर कहा कि हम सभी कार्यकर्ताओं को ग्राम विकास की ओर, परंपरागत खेती अाैर वापस गांवाें की अाेर चलने की आवश्यकता है। अपने-अपने गांव को जैविक कृषि से जोड़ने का प्रयत्न करना चाहिए  ताकि स्वदेशी का भाव जाग्रत हो।   ऑनलाइन बौद्धिक वर्ग में  प्रांत संगठन मंत्री गोविंद, प्रान्त सचिव किशनगोपाल, विद्या भारती जनजाति समिति के  अध्यक्ष महोदय जयंतीलाल भट्ट और ललित दवे,विद्या भारती संस्थान बांसवाड़ा के जिला सचिव उपस्थित रहे। यह जानकारी विद्याभारती जनजाति समिति के सह सचिव नारायण ने दी। अधिकारियों का परिचय सचिव मानेंग पटेल ने करवाया।

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