वेबिनार / जनजाति लाेगाें की इम्युनिटी ज्यादा होने से काेराेना का असर कम : राज्यपाल

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  • विश्वविद्यालय की परीक्षा का जिम्मा कुलपतियों काे दिया जाना चाहिए- साेडाणी

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 08:34 AM IST

बांसवाड़ा. गाेविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय की ओर से काेविड 19 की चुनौतियां और संभावनाओं के विषय पर एक दिवसीय वेबिनार हुआ। जिसमें बताैर वक्ता राज्यपाल कलराज मिश्र, पूर्व केबिनेट मंत्री किरण माहेश्वरी, विधायक महेंद्रजीत सिंह मालवीया और कुलपति प्राे. कैलाश साेडाणी ने अपने विचार साझा कर आपदा कि इस घड़ी से बाहर निकलने के लिए नई ऊर्जा का संचार किया। इस माैके पर राज्यपाल मिश्र ने कहा कि काेराेना की महामारी से देश ताे क्या पूरे विश्व का काेई हिस्सा नहीं बचा है। यह वैश्विक संकट है। यह जीवन के संघर्ष की परीक्षा है।

इसके संक्रमण काे देखे ताे जल्द ही विश्व में 1 कराेड़ का आंकड़ा पार हाे जाएगा, लेकिन अच्छी बात यह भी है कि उसी रफ्तार से संक्रमित रिकवर भी हाे रहे हैं, लेकिन इस संकट में किसान संघर्ष करता नजर आ रहा है। युवा और किशोर वर्ग शिक्षा के बीच मझधार में फंसा हुआ है।

अब उद्योग धंधों काे कैसे पटरी पर लाया जाए यह चुनौती है। इस दाैरान राज्यपाल ने बांसवाड़ा का जिक्र करते हुए कहा कि जनजाति जिले बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ में 550 के करीब काेराेना संक्रमण के आंकड़े हैं, जिसमें देखा जाए ताे जनजाति वर्ग के 5 से 10 फीसदी ही लाेग प्रभावित हुए हैं।

जनजाति लाेगाें में इम्युनिटी अधिक देखने काे मिली है। उनकी राेग प्रतिरोधक क्षमता अधिक है। राज्यपाल ने गोविंद गुरु का उदाहरण देते हुए सीख दी कि उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ जंग लड़ी थी, उसी प्रकार वर्तमान में काेराेना काे भी मात देनी है। हमारा देश नई ऊर्जा के साथ उभरेगा, भारत के लिए नए अवसर आएंगे। आत्मनिर्भर हाेगा भारत।  
पिछले 100 दिनों ने हमें अनुशासन से रहना सिखाया

कुलपति प्राे. कैलाश साेडाणी ने कहा कि इस वेबिनार में 800 युवाओं ने रजिस्ट्रेशन कराकर इस वेबिनार में अपनी अपनी सहभागिता दी है। यह वास्तविकता काे स्वीकार करना है कि समाज में काेराेना है अाैर अभी रहेगा। घराें में बंद रहकर हम कब तक मुकाबला करेंगे।

पिछले 100 दिनाें ने हमें अनुशासन में रहना सिखाया है। इसी अनुशासन के साथ हमें इस समस्या का समाधान नए अवसर के रुप में प्राप्त हाेगा। उदाहरण के ताैर पर देखे ताे चाइना का माल हमारे भारत में ही बनने लगेगा ताे कराेड़ाें लाेगाें काे यहां रोजगार मिलेगा। अनुशासन और आत्मनिर्भर इन दाे डायलॉग के साथ ही भारत काे आगे बढ़ना है।

यह सच है कि ऑनलाइन कक्षाएं क्लास में टीचिंग का शत प्रतिशत विकल्प नहीं है। क्लास में गुरु और शिष्य के बीच अलग प्रकार का संबंध स्थापित हाेता है। लेकिन अब नए जमाने काे देखते हुए विद्यार्थियों से यहीं कहना चाहूंगा कि अब उन्हें आईटी से बहुत ज्यादा कनेक्ट हाेना पड़ेगा। भविष्य आईटी का है, इसमें कमजोर रहकर समाज के साथ कदमताल नहीं कर सकते। जहां तक परीक्षाओं का सवाल है मेरा मानना है कि हमारे यहां जाे वर्किंग डे मिलते हैं,  जाे छुट्टियां हैं वाे कट हाे जाएंगी ताे हमारा सेशन नियमित हाे सकेगा।

माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने जिसमें 10 लाख विद्यार्थी थे। वाे परीक्षाएं सकुशल संपन्न हाे गई। वैसे ही विश्वविद्यालय की परीक्षाओं की जिम्मेदारी कुलपतियों पर छाेड़ दी जानी चाहिए।  बहुत अधिक लाेगाें से सलाह मशविरा से यह निर्णय नहीं हाे पा रहा मेरा ऐसा मानना है। संचालन आयोजन सचिव डाॅ. अशाेक कुमार काकाेड़ियां ने किया। आभार शाेध निदेशक डाॅ. महीपालसिंह राव ने माना।
हमनें कई महामारी काे मात दी है : विधायक मालवीया
इस माैके पर विधायक महेंद्रजीत सिंह मालवीया ने कहा कि काेविड 19 में केंद्र सरकार और राज्य सरकार ने जाे काम किए वाे सराहनीय है। इस कारण इस महामारी का असर हम पर कम ही पड़ा है। हमारे आदिवासी भाई बहनाें काे काेराेना नहीं हुअा है। यहां चेचक, फ्लैग, मलेरिया, नारू जैसी महामारियां आई, लेकिन यहां की जनता ने उनसे मुकाबला किया।

पूर्व मंत्री और विधायक किरण माहेश्वरी ने कहा कि काेविड से शैक्षणिक व्यवस्थाएं प्रभावित हुई हैं। जिससे बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई शुरू हुई। प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत के लिए जाे योजनाएं शुरू की हैं वाे आदिवासियों के लिए लाभकारी हैं। हमें नाैकरी देने वाला बनना है, नाैकरी लेने वाला नहीं। इस पर राज्यपाल ने उनकी सराहना की।

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