1 महीने के बच्चे को CHC में छोड़ गई महिला:CCTV फुटेज से हुई मां की पहचान, परिजन बोले- महिला की दिमागी हालत खराब है

बांसवाड़ा6 महीने पहले
बच्चे को स्पेशल न्यू बॉर्न केयर यूनिट भर्ती कराया गया है। बच्चा स्वस्थ बताया जा रहा है।

बांसवाड़ा के नरवाली CHC में रविवार को एक महीने के बच्चे को उसकी मां लावारिस छोड़कर भाग गई। रात करीब 12 बजे बच्चे के रोने पर वहां काम कर रहे कर्मचारियों की नजर पड़ी। बच्चे को अकेले देख नर्सिंग स्टाफ ने उसकी मां को तलाशा और वहां मौजूद लोगों से पूछताछ की तो किसी ने भी जानकारी से इनकार किया। इस पर नर्स ने चिकित्सा प्रभारी डॉ. आशीष उकावत को इसकी जानकारी दी। जब मां के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली तो CHC प्रभारी डॉ. आशीष उकावत ने इसकी सूचना चाइल्ड लाइन और बाल कल्याण समिति, जिला प्रशासन और खमेरा थाना पुलिस को दी।

चाइल्ड लाइन के जिला समन्वयक परमेश पाटीदार ने बताया कि घाटोल ब्लॉक के नरवाली CHC में लावारिस बच्चे की सूचना पर 108 एंबुलेंस से उसे बासंवाड़ा भिजवाया गया। वहां पर चाइल्ड लाइन टीम के सदस्य कमलेश कुमार बुनकर ने इसकी जानकारी बाल कल्याण समिति अध्यक्ष दिलीप रोकड़िया को दी। यहां से मिले निर्देश पर बच्चे को महात्मा गांधी जिला अस्पताल के स्पेशल न्यू बॉर्न केयर यूनिट (SNCU) में भर्ती कराया गया, जहां स्टाफ के तौर पर नर्स स्मिता और आया उषा ने बच्चे की देखरेख की। मदर मिल्क बैंक से उसके लिए 10 बोतल दूध मंगाया गया। अस्पताल स्टाफ ने बताया कि बच्चे को दूध पीने में कोई तकलीफ नहीं है। वह स्वस्थ है।

पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले, मां को ढूंढा
इधर, घटना के बाद खमेरा पुलिस हरकत में आई। पुलिस मौके पर पहुंची तो डॉ. आशीष और चौकी प्रभारी जगदीश मीना ने CCTV फुटेज तलाशे। इसमें रविवार रात करीब 11.19 बजे एक महिला शिशु को लेकर अस्पताल में दाखिल होते हुए दिखी। इसके बाद पुलिस की तलाश में बच्चा बोरपीखाटा गांव निवासी महिला का होने की बात सामने आई। परिजनों ने महिला की दिमागी हालत खराब होने की जानकारी दी। यह भी बताया कि वह बच्चे को भूलकर आ गई थी। इसके बाद महिला को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया।

रात तक चली सुनवाई रही बेनतीजा
मामले को लेकर बाल कल्याण समिति अध्यक्ष दिलीप रोकड़िया, सदस्य पुष्पेंद्र पंड्या, राजेश ओसाम, नेहा मेहता, काउंसलर तबस्सुम अली भी अस्पताल पहुंचे। इसके बाद देर शाम पुलिस बच्चे की मां को लेकर पहुंची तो वहां सुनवाई का दौर चला। लेकिन, समिति के सामने महिला के मनोरोगी होने जैसे कोई प्रमाण नहीं मिले। समिति अध्यक्ष ने सभी दस्तावेजों की पूर्ति के बाद बच्चे को मां को सौंपने की बात कही। अध्यक्ष ने इस बारे में समिति स्तर पर निर्णय करने की भी बात कही है।