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व्यवस्था:1200टन यूरिया की रैक बारां आई: अभी स्टॉक में 3800 टन खाद चिंता यह कि... दिसंबर मंे गेहूं की फसल के लिए फिर बढ़ेगी डिमांड

बारां2 महीने पहले
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बारां. शहर में मंगलवार को 1200 टन यूरिया लेकर रैक पंहुची। 3 हजार टन की रैक लगी है। - Dainik Bhaskar
बारां. शहर में मंगलवार को 1200 टन यूरिया लेकर रैक पंहुची। 3 हजार टन की रैक लगी है।
  • दिसंबर की 25000 की डिमांड के मुकाबले 5 हजार टन यूरिया उपलब्ध, 3 हजार टन की इफको की रैक एक-दो दिन में पहुंच जाएगी

जिले में रबी फसलों के लिए दिसंबर की डिमांड के मुकाबले 20 फीसदी यूरिया बारां पहुंच गया है। मंगलवार को 1200 टन यूरिया लेकर रैक बारां पहुंची। वहीं 3 हजार टन यूरिया की रैक लगी हुई है। जिले में इस बार सरसों, गेहूं समेत अन्य रबी फसलों की बुवाई पूरी होने को है। सिंचाई से पहले यूरिया के छिड़काव करने से डिमांड में बढ़ोतरी हुई है। नवंबर में दुकानों पर खाद लेने आई किसानों की भीड़ को संभालना सहकारी समिति समेत विक्रेता के लिए मुश्किल हो गया।

कई जगहों पर खाद वितरण के लिए प्रशासन को कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ पुलिस जाप्ता तैनात करना पड़ा। एक सप्ताह से अधिक समय से लगातार क्षेत्र में लगातार यूरिया आपूर्ति हो रहा है। दिसंबर में गेहूं की फसल के लिए वापस यूरिया की डिमांड बढ़ेगी। ऐसे में किसानों को एक बार फिर से खाद के लिए परेशानी हो सकती है। कृषि विभाग अधिकारियों का कहना है कि जिले में यूरिया की डिमांड पूरी करवाने के लिए प्रयास है।

विभाग के प्रयास..दिसंबर में 25 हजार मीट्रिक टन यूरिया की डिमांड भेजी
कृषि विभाग के उपनिदेशक अतिशकुमार शर्मा ने बताया कि मंगलवार को बारां जिले को 1200 मैट्रिक टन यूरिया की सप्लाई मिली है। नवंबर के महीने में 26 हजार 500 मीट्रिक टन यूरिया की डिमांड थी। इसके मुकाबले 29 हजार 900 मैट्रिक टन की सप्लाई मिल चुकी है। मंगलवार को आई रैक इसमें से अलग है। वहीं दिसंबर महीने में 25 हजार मैट्रिक टन यूरिया की डिमांड भेजी है। दिसंबर में किसानों को आसानी से यूरिया उपलब्ध करवाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे है। अब बुधवार को बारां जिले के लिए इफको की एक रैक और मिलेगी। वर्तमान में जिले में 3800 मैट्रिक टन यूरिया व 700 टन डीएपी का स्टॉक है। दिसंबर में डीएपी को लेकर कोई डिमांड नहीं है।

किसान बोले-घंटों लंबी लाइन में लगने पर भी नहीं मिल रहा यूरिया
जिले में यूरिया को लेकर किसानों का कहना है कि घंटो लंबी लाइनों में लगने के बाद भी आसानी से यूरिया नहीं मिल रहा है। मंडोला निवासी किसान हरीश नागर, भुवनेश ने बताया कि जिले से मध्यप्रदेश के कई किसान भी यूरिया लेकर जा रहे है, जिससे जिले के लिए आवंटित यूरिया किसानों को नहीं मिल पा रहा है। इसके साथ ही कई जगहों पर यूरिया मिलने की सूचना पर बड़ी संख्या में किसान पहुंचते है, लेकिन दिनभर लाइनों में लगने के बाद भी यूरिया नहीं मिल पाता है।

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