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ओवरब्रिज का निर्माण अटका:झालावाड़ रोड ओवरब्रिज का निर्माण एक माह बाद भी शुरू नहीं, अब प्लांट स्थापित नहीं होने से अटका काम

बारां2 महीने पहले
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बारां. झालावाड़ राेड अाेवरब्रिज का काम फिर अटक गया है। इससे लोगों की परेशानी बढ़ रही है। - Dainik Bhaskar
बारां. झालावाड़ राेड अाेवरब्रिज का काम फिर अटक गया है। इससे लोगों की परेशानी बढ़ रही है।
  • चार साल में कई बार बंद हुआ काम, एक माह पूर्व शिलान्यास के बाद जगी थी उम्मीद

शहर के झालावाड़ रोड स्थित रेलवे फाटक पर पिछले दिनों ओवरब्रिज के शिलान्यास होने के बाद लोगों को निर्माण शुरू होने की उम्मीद जगी थी, लेकिन अब एक महीना निकल जाने के बाद भी ओवरब्रिज का कार्य शुरू नहीं हो सका है। इसके कारण शहर की आधी आबादी को प्रतिदिन परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

अब अधिकारियों की ओर से ओवरब्रिज को लेकर प्लांट लगाने का कार्य पूरा होने के बाद ही काम शुरू होने की बात कही जा रही है। झालावाड़ रोड़ स्थित ओवरब्रिज का काम 2019 में शुरू हुआ था। लेकिन बीच में ठेकेदार की ओर से काम बंद करने से 2021 की शुरुआत में काम बंद हो गया। इसके बाद आरएसआरडीसी की ओर से ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करके दुबारा टेंडर निकाले गए थे। लेकिन लगातार 4 बार टेंडर निकालने के बाद भी कोई फर्म ने रुचि नहीं दिखाई थी। पिछले महीने एक फर्म की ओर से टेंडर डालने के बाद अरएसआरडीसी की ओर से वर्क ऑर्डर जारी कर दिए गए थे। इसके बाद ओवरब्रिज का शिलान्यास कर काम शुरू करने की घोषणा भी की गई थी, लेकिन अब तक ओवरब्रिज का काम शुरू नहीं हो पाया है।

एक दिन में 60 बार से अधिक बंद होता है फाटक, बार-बार लगता है जाम
कोटा-बीना ट्रैक के दोहरीकरण के कारण इस ट्रैक पर मालगाड़ी समेत पैसेंजर ट्रेनों की आवाजाही बढ़ गई है। जिससे झालावाड़ रोड पर स्थित रेलवे फाटक एक दिन में करीब 60 बार से अधिक बंद होता है। इसके कारण यहां पर दिनभर में कई बार घंटों लंबा जाम लग जाता है। इसके साथ ही ओवरब्रिज के निर्माण कार्य अधूरा होने से दोनो ओर की सड़क भी क्षतिग्रस्त हो रही है। इससे यहां पर दिनभर धूल उड़ती रहती है। कई बार जाम में एंबूलेंस तक फंस जाती है, जिससे कई बार मरीज की जान पर बन आती है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारीयों की ओर से ओवरब्रिज के निर्माण को लेकर काेई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।

2019 में शुरू हुआ आरओबी का काम कई बार बंद हुआ, 4 साल में 13 करोड़ बढ़ गई लागत
ओवरब्रिज का काम साल 2019 में शुरु हुआ था। इसके बाद लगातार फर्म बदलने, टेंडर कैसिंल होने से समय के साथ ओवरब्रिज की लागत में भी बढ़ोतरी हो गई है। आरएसआरडीसी अधिकारियांे के अनुसार 2019 के मुकाबले सीमेंट और सरिए के भावों में 40 फीसदी की बढ़ोतरी हो गई है। ओवरब्रिज की लागत बढ़ गई है। पूर्व में ओवरब्रिज की लागत 33.22 करोड़ रुपए थी। जिसमें से 23 करोड़ रुपए आरएसआरडीसी और 10 करोड़ रुपए रेलवे को देने थे। लेकिन अब 40 फीसदी लागत बढ़ने से इसकी लागत भी 13.29 करोड़ रुपए बढ़ गई है।
^ओवरब्रिज निर्माण को लेकर प्लांट आ गया है। प्लांट को स्थापित करने का कार्य किया जा रहा है। प्लांट स्थापित होने के बाद ओवरब्रिज का कार्य आगामी 4-5 दिनों में शुरू हो जाएगा। - मनोज माथुर, प्राेजेक्ट डायरेक्टर, आरएसआरडीसी

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