किसान ने सड़क पर फेंका 8 क्विंटल लहसुन:मंडी में दिनभर खड़े रहने के बाद भी नहीं लगी बोली

बारां4 महीने पहले
किसान को लहसुन का उचित भाव नहीं मिलने पर लहसुन से भरी ट्रॉली मंडी के गेट के पास खाली कर दी। - Dainik Bhaskar
किसान को लहसुन का उचित भाव नहीं मिलने पर लहसुन से भरी ट्रॉली मंडी के गेट के पास खाली कर दी।

लहसुन की फसल इस बार किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है। हालात यह है मंडी में सामान्य लहसुन 2 से 8 रुपए किलो तक बिक रहा है। किसानों को लहसुन का उचित भाव नहीं मिलने पर वह लहसुन को सड़क पर फेंकने लगे है। बारां शहर स्थित कृषि उपज मंडी में सोमवार को लहसुन बेचने आए किसान माल नहीं बिकने पर मायूस हो गया और मंडी गेट के पास करीब 8 क्विंटल लहसुन फेंककर चला गया। किसान संगठनों की ओर से मांग के बावजूद अभी तक सरकार ने समर्थन मूल्य पर खरीद शुरू नहीं की है।

सामान्य क्वालिटी के लहसुन के भाव कम
बारां कृषि उपज मंडी में सोमवार को 4300 क्विंटल लहसुन की आवक हुई। इस दौरान नीलामी में किसानों को अच्छी क्वालिटी के लहसुन का भाव 1000 से 3500 रुपए क्विंटल तक मिला, जबकि अधिकांश किसानों को सामान्य क्वालिटी के लहसुन का महज भाव 200 से 800 रुपए क्विंटल तक मिला है। गोपालपुरा दुनीखेडा निवासी संजय मेहता ने बताया कि वह सोमवार को मंडी में करीब 8 क्विंटल लहसुन बेचने आया था, लेकिन यहां पर दिनभर खड़े रहने के बावजूद उनका माल नहीं बिक। किसान ने बताया कि व्यापारियों ने लहसुन को सामान्य बताते हुए भाव ही नहीं लगाए। ऐसे में उन्होंने मंडी गेट के पास लहसुन की ट्रॉली को खाली कर दिया। किसान ने बताया कि इस बार लहसुन की खेती करने वाले किसानों को काफी नुकसान हुआ है। फसल की लागत तक नहीं निकल पाई है। लहसुन बुवाई के कारण उन्हें भी 50 हजार रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ है।

बता दें कि पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, गुजरात, मध्य प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र तक बारां के लहसुन की खपत है। तापमान में इजाफे के कारण किसानों के सामने लहसुन को सुरक्षित रखने की चुनौती है। बाजार में बिकवाली नहीं होने से भावों में गिरावट भी मुश्किल बढ़ा रही है। जिले में इस साल 34660 हेक्टेयर में लहसुन की बुवाई हुई थी। विभाग ने 65 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के हिसाब से 2 लाख 25 हजार 290 मीट्रिक टन उत्पादन माना था, लेकिन इसके मुकाबले 52 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के हिसाब से 1 लाख 80 हजार 320 मीट्रिक टन उत्पादन हुआ है।