पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

अच्छी खबर:छह माह बाद रफ्तार पकड़ने लगा वस्त्र उद्योग, दूसरे राज्यों से बढ़ी माल की मांग

बालोतरा8 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • दिवाली से पहले महाराष्ट्र से ग्रे माल की आवक बढ़ी,कारखानों में रात-दिन चल रहा है काम

कोरोना महामारी के चलते प्रभावित हुआ औद्योगिक कामकाज अब फिर से रफ्तार पकड़ने लगा है। महाराष्ट्र से ग्रे माल की आवक व दीपावली पर्व पर बाहरी राज्यों में तैयार माल की डिमांड के बाद फैक्ट्रियों में मशीनें चलने लगी है। लॉकडाउन के बाद कामकाज शुरू होने के बाद एक शिफ्ट में ही कामकाज चल रहा था, जिसमें ट्रांसपोर्ट गोदामों में रखा स्टॉक माल तैयार किया जा रहा था।

लॉकडाउन के साथ अब धीरे-धीरे काम बढ़ने लगा है। वहीं अब इन दिनों खेती के कामकाज से निवृत्त होकर अधिकांश श्रमिक फिर काम पर लौट आए है। ऐसे में नवरात्रा के साथ ही कामकाज और अधिक बढ़ने की संभावना है। इससे कारखानों के साथ प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रुप से हजारों श्रमिकों का रोजगार फिर से शुरू हो गया है।

उल्लेखनीय है कि कोरोना महामारी ने देश ही नहीं पूरे विश्व में अर्थव्यवस्था को हिला रख दिया है। इससे बालोतरा का कपड़ा व्यापार भी अछूता नहीं रहा। बालोतरा-जसोल व बिठूजा में संचालित इकाइयों में कामकाज बंद होने से हजाराें श्रमिक बेरोजगार हो गए थे। वहीं होली की छुटिट्यों के बाद वापस कोरोना के चलते काम बंद होने से बाहरी राज्यों के श्रमिकों को अपने घर तक पहुंचने में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ऐसे में कोरोना का प्रभाव कुछ कम होने पर जुलाई माह में कामकाज शुरू करने की अनुमति दी थी।

हालांकि इस दरम्यान महाराष्ट्र जैसे राज्यों में कोरोना का प्रभाव अधिक होने से ग्रे माल नहीं आ रहा था, लेकिन ट्रांसपोर्ट गोदामों में स्टॉक माल से दो माह तक फैक्ट्रियों में एक शिफ्ट में ही कामकाज चल रहा था। अब ग्रे माल की आवक होने तथा बाहरी राज्यों के श्रमिकों के लौटने से कामकाज बढ़ने लगा है। ज्ञात रहे कि बालोतरा में प्रोसेस होने वाला कच्चा माल महाराष्ट्र के नासिक, भिंवडी, इचलकरंजी से अधिक आता है। वहीं तैयार माल की डिमांड दक्षिण भारत में अधिक रहती है। इसके साथ ही भीलवाड़ा से पहुंचने वाला शूटिंग-शर्टिंग का माल भी यहां तैयार किया जाता है।

800 कारखानों में 40 हजार से अधिक लोगों को मिल रहा रोजगार
बालोतरा-जसोल व बिठूजा में करीब 800 से अधिक कपड़े की फैक्ट्रियां संचालित हो रही है। इसमें बाड़मेर-जैसलमेर जिले सहित उत्तरप्रदेश, बिहार व मध्यप्रदेश के श्रमिक कार्य करते हैं। कारखानों में करीब 40 हजार लोगांे को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से कामकाज मिल रहा है। बालोतरा की फैक्ट्रियों से सालाना 13 हजार करोड़ रुपए तो प्रतिदिन 45 करोड़ रुपए का टर्न ओवर होता है।

उल्लेखनीय है कि बालोतरा में करीब 50-60 साल पहले 4-5 उद्यमियों ने गुजरात राज्य की तर्ज पर यहां पर कपड़ा व्यापार को बढ़ावा देने के लिए छोटी-छोटी इकाइयां शुरू की थी। यहां के पानी से तैयार होने वाले कपड़े की डिमांड अधिक होने पर धीरे-धीरे और भी उद्यमियों ने यहां कामकाज शुरू किया। आज देश के हर कोने-कोने में बालोतरा का पोपलीन कपड़ा विख्यात है। वहीं जिले का सबसे बड़ा औद्योगिक क्षेत्र होने से हजारों लोगों को रोजगार मिलने के साथ सरकार को करोड़ों रुपए का राजस्व भी प्राप्त हो रहा है।

लॉकडाउन में प्रिंट माल की ज्यादा बिक्री
लॉकडाउन के दरम्यान बाहरी राज्यों से कच्चे माल की आवक करीब तीन माह तक बंद रही। वैसे तो बालोतरा पोपलीन नगरी के नाम से जाना जाता है, लेकिन लॉकडाउन के दौरान प्रिंट माल की बिक्री अधिक हुई। उद्यमियों के अनुसार लॉकडाउन में अधिकांश लोग घर में ही रहे, इस पर लुंगी व नाइटी (पायजामा) का अधिक उपयोग किया, ऐसे में इन दिनों में पॉप लीन के बजाय प्रिंट माल की अधिक बिक्री हुई। वहीं दूसरे नंबर पर रियॉन की डिमांड रही, जबकि पॉप लीन की बिक्री कम रही। अब पॉप लीन माल की डिमांड बढ़ने लगी है।

^लॉकडाउन में करीब तीन महीने तक लोग घरों में ही रहे। इस दरम्यान लोगांे ने लुंगी व नाइटी का अधिक उपयोग किया। जिस पर प्रिंट कपड़े की अधिक बिक्री हुई थी। वहीं पॉप लीन की डिमांड कम रही। अब महाराष्ट्र राज्य से कच्चे माल की आवक होने के साथ ही कामकाज भी रफ्तार पकड़ने लगा है।
- संदीप ओस्तवाल, युवा उद्यमी

^लॉकडाउन के चलते कपड़ा व्यापार काफी प्रभावित हुआ था। सरकार के गाइडलाइन अनुसार काम करने की छूट देने के बाद उद्यमियों ने काम फिर से शुरु किया। अब बाहरी राज्यों से पर्याप्त ग्रे माल की आवक हो रही है। दीपावली पर अधिक बढ़ने की उम्मीद है। काम शुरु होने से श्रमिकों के सामने भी रोजगार के अवसर बढ़े हैं।
- सुभाष मेहता, अध्यक्ष, सीईटीपी ट्रस्ट बालोतरा

खबरें और भी हैं...