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नहरी पानी आज तक नसीब नहीं:रेलवेे से पाइप लाइन बिछाने को तीन बार मिली इजाजत, फिर भी नहीं निकाली, पेयजल से वंचित

बालोतरा20 दिन पहलेलेखक: भवदीपसिंह चारण
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बालोतरा. एक दशक पूर्व बनीं परियोजना की पेयजल टंकी, आज भी नहरी पानी का इंतजार। - Dainik Bhaskar
बालोतरा. एक दशक पूर्व बनीं परियोजना की पेयजल टंकी, आज भी नहरी पानी का इंतजार।

पोकरण-फलसूंड-बालोतरा-सिवाना नहरी पेयजल परियोजना का पानी बालोतरा पहुंचे करीब तीन बरस होने को आ रहे हैं, लेकिन बालोतरा से एकदम सटे पचपदरा, मंडापुरा, भांडियावास, गोपड़ी, मूंगड़ा, हेमपुरा, जानियाना, सराणा, कनाना आदि करीब एक दर्जन से अधिक गांवों को सिस्टम की लापरवाही के चलते नहरी पानी आज तक नसीब नहीं हो पाया है।

हालांकि कायदे से पचपदरा विधानसभा के इस परियोजना से जुड़े सभी गांव-कस्बों व शहरों के एक साथ जाेड़ा जाना था, लेकिन गत विधानसभा चुनाव से पहले आनन-फानन में तत्कालीन सरकार ने बालोतरा तक पानी पहुंचाकर इतिश्री कर ली। बालोतरा के लिए प्रस्तावित ना स्टोरेज टैंक बनाए गए और ना ही पाइप लाइन ही सही ढंग से लगवाई गई है।

रेलवे ट्रैक के नीचे से पाइप लाइन बिछाने के लिए रेलवे से इजाजत मांगी है, ठेकेदार ने राशि भी जमा करवा दी। इजाजत मिलते ही जल्दी ही पाइप लाइन ट्रैक के नीचे से निकाल देंगे। वैसे मैंने कुछ समय पहले ही ज्वाइन किया है इसलिए पहले किस कारण लाइन नहीं बिछी ये मैं नहीं बता सकता।
-संजय जैन, एक्सईएन, पोकरण-फलसूंड-बालोतरा-सिवाना नहरी परियोजना।

गांवों में नहरी पानी स्टोरेज व सप्लाई के लिए वर्षों पहले टंकियां बनी और पाइप लाइनें बिछी, सप्लाई आज तक नहीं

मंडापुरा सरपंच डालाराम प्रजापत बताते हैं कि अधिकारी लापरवाह नहीं रहते तो नहरी पानी निर्धारित समय पर इन गांवों में पहुंच जाता। करीब एक दशक से पहले इस परियोजना के लिए इन गांवों में पेयजल टंकियां बना दी गई थी। इसके बाद इन तक पानी पहुंचाने के लिए पाइप लाइन भी कब की बिछ गई लेकिन पानी का आज भी इंतजार है।

स्थिति यह है कि वर्षों पहले बनी इन पेयजल टंकियाें में अब जब नहरी पानी आएगा तो टिकेगा या नहीं, कहीं ये लीकेज तो नहीं होगी, ऐसी आशंका जताई जा रही है। जबकि कायदे से टंकी बनाने वाले ठेकेदारों को इन टंकियों में कहीं से भी व्यवस्था कर पानी भरवाकर रखना चाहिए मगर टेस्टिंग के अलावा इनमें कभी पानी नहीं भरवाया गया।

रेलवे ट्रैक के नीचे से निकलनी है पाइप लाइन, कोरोना काल में भी लापरवाह बने रहे अधिकारी

भांडियावास सरपंच सुमन कंवर चारण ने बताया कि पचपपदरा-मंडापुरा, भांडियावास, गोपड़ी, मूंगड़ा, हेमपुरा, होटलू आदि एक दर्जन से अधिक गांव नहरी पानी से सिर्फ इसलिए वंचित हैं क्योंकि इसके लिए बालोतरा से एक बड़ी लाइन पचपदरा जानी है, जो कि रेलवे ट्रैक के नीचे होकर गुजरनी है।

पचपदरा के बाद इसके आस-पास के सभी गांवों तक नहरी पानी पहुंचाना है। कायदा यह है कि रेलवे ट्रैक के नीचे से पाइप लाइन गुजारने के लिए परियोजना अधिकारी रेलवे से इजाजत मांगते हैं, इसके लिए एक निर्धारित राशि रेलवे में ठेकेदार की ओर से जमा करवाई जाती है।

इसके बाद रेलवे की ओर से एक समय सीमा निर्धारित कर इजाजत दी जाती है, रेलवे की ओर से दी गई समय सीमा में ही ठेकेदार को ट्रैक के नीचे से पाइप लाइन निकालने का काम पूरा करना होता है। हालांकि परियोजना अधिकारियों ने रेलवे से इसके लिए एक बार नहीं तीन बार इजाजत मांगी और रेलवे ने बकायदा तीनों बार इजाजत दी भी, लेकिन संबंधित ठेकेदार ट्रैक के नीचे से पाइप निकालने की मशीन की व्यवस्था नहीं कर पाया और रेलवे की समय सीमा खत्म हो गई।

इस दरम्यान परियोजना अधिकारी भी पूरी तरह लापरवाह बने रहे। इतना ही नहीं कोरोना काल में जब ट्रेनें बंद थी, तब भी अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया, वरना इजाजत भी आसानी से मिल जाती। इसका खामियाजा तीन बरसों से एक दर्जन गांव-कस्बों के वाशिंदे भुगत रहे हैं।

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