कोरोना काल में लेखराज ने किया नवाचार:हैंडीक्राफ्ट में क्रिएटिविटी: रंग बिरंगे कपड़े के बनाए छाते, प्रतिष्ठानों व विदेशों में डिमांड

चौहटन6 दिन पहलेलेखक: डूंगर राठी
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कोरोना काल के दौरान व्यवसाय की मंदी के दौरान सरूपे का तला निवासी हैंडीक्राफ्ट कशीदाकार लेखराज तंवर ने नवाचार किया। - Dainik Bhaskar
कोरोना काल के दौरान व्यवसाय की मंदी के दौरान सरूपे का तला निवासी हैंडीक्राफ्ट कशीदाकार लेखराज तंवर ने नवाचार किया।

भारत-पाक की मिश्रित संस्कृति के हैंडीक्राफ्ट और कशीदाकारी विश्व विख्यात है। यहां का निर्मित माल जयपुर, जैसलमेर, उदयपुर, दिल्ली सहित विदेशों में निर्यात किया जाता है और बाहरी पर्यटकों काे भी ये हैंडीक्राफ्ट लुभाता है। वहीं इसे बनाने वालों को नाम मात्र का ही रोजगार मिलता है। कोरोना काल के दौरान व्यवसाय की मंदी के दौरान सरूपे का तला निवासी हैंडीक्राफ्ट कशीदाकार लेखराज तंवर ने नवाचार किया। इन्होंने हैंडीक्राफ्ट से छातों का निर्माण किया।

इन्होंने कोरोनाकाल के दौरान हैंडीक्राफ्ट की छतरियां, गिफ्ट आइटम व शादी के कार्ड बनाने का नवाचार किया। तंवर पिछले तीस सालों से कटवर्क एम्ब्रॉयडरी कशीदाकारी का कार्य कर रहे है। इन्होंने इस नवाचार का अहमदाबाद में मार्केट खोजा। इनके इस नवाचार को खूब पसंद किया गया और कई ऑर्डर हाथोंहाथ ही मिलने शुरू हो गए। तंवर के पास हाथ का हुनर है, लेकिन इसका इन्हें पूरा दाम नहीं मिल रहा है। इसे अहमदाबाद में बेचते है और वहां से ये आइटम निर्यात किए जाते है।

तंवर ने ऐसे बनाई रंग बिरंगी छतरियां
कोरोनाकाल में तंवर ने कुछ नया करने का सोचा और उन्होंने छाता, गिफ्ट आइटम, शादी कार्ड के कवर आदि हैंडीक्राफ्ट से बनाने शुरू किए। इसके लिए उन्होंने अच्छी व महंगी क्वालिटी का कपड़ा जैसे ब्रोकेट, वेलवेट, सिल्क,टिस्यु, जोरजट के कपड़े पर केनवास को चिपका कर नया रूप दिया।

अहमदाबाद में इन्होंने इस नवाचार को कुछ व्यापारियों को दिखाया और देखते ही देखते इन चीजों की डिमांड बढ़ने लगी है। तंवर इसे खुद के स्तर पर बेचना चाहते है लेकिन उनके पास सीधा मार्केट नहीं है। तंवर की तरह ही कई हैंडीक्राफ्ट के संजीदा कलाकार बेरोजगार बैठे है, यदि सरकारी सहायता की उम्मीद जगे तो इस व्यवसाय को गति मिल सकती है और हजारों लोगों को रोजगार मिल सकता है।

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