सोनार दुर्ग के 300मी. के दायरे में पट्टों पर रोक:हाईकोर्ट ने निर्माण व भूमि के नियमन एवं पट्टा जारी करने पर लगाई रोक; जनहित याचिका पर लिया संज्ञान

जैसलमेर2 महीने पहले
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सोनार दुर्ग (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
सोनार दुर्ग (फाइल फोटो)

विश्व धरोहर सोनार दुर्ग के 300 मीटर की परिधि में निर्माण व भूमि के नियमन एवं पट्टा जारी करने पर कोर्ट ने रोक लगा दी है। एडवोकट अधिवक्ता मानस खत्री की जनहित याचिका पर हाई कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए नगर परिषद जैसलमेर द्वारा गैर कानूनी रूप से पट्टा जारी करने, निर्माण के नियमन की कार्रवाई पर रोक लगा दी है।

दरअसल, जैसलमेर में स्थित विश्व धरोहर व प्राचीन स्मारक सोनार दुर्ग और प्राचीन मंदिरों को केंद्रीय सरकार द्वारा 29 नवंबर 1951 में प्राचीन स्मारक घोषित किया गया। सोनार किला में विश्व धरोहर सूची में सन 2013 में लिया गया। हिल फोर्ट्स ऑफ़ राजस्थान के एकमात्र रेगिस्तान में स्थित प्राचीन कला का विशेष नमूना है सोनार किला। जिसके अंदर स्थित होटल एवं रेस्टोरेंट व अवैध निर्माण कार्य की वजह से पानी का रिसाव हो रहा है। इस रिसाव से दुर्ग की नींव त्रिकूट पहाड़ी कमजोर होती जा रही है। इन सब कारणों से सोनार किला के क्षतिग्रस्त होने की पूर्ण संभावनाएं बनी हुई है।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा किले की 300 मीटर की परिधि में स्थित ढिब्बा पाड़ा, कंधारी पाड़ा, कोटडी पाड़ा, मुकाती पाड़ा, डांगरा पाड़ा आदि में अवैध निर्माण कार्य को ध्वस्त किए जाने के आदेश पारित किए गए हैं। परंतु नगर परिषद जैसलमेर द्वारा गैर कानूनी रूप से पट्टा जारी करने की कार्रवाई अमल में लाई गई थी जिस पर न्यायालय द्वारा रोक लगा दी है।

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