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मानसून के चलते तीसरे दिन रिमझिम बरसात:तीन राजस्व गांवों के बीच 1500 बीघा गोचर भूमि चारागाह के लिए सुरक्षित, ग्रामीण लकड़ी काटना भी पाप समझते हैं

मंडली7 दिन पहलेलेखक: प्रियंक जांगिड़
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  • आसमान में बादल छाए रहने से मौसम खुशनुमा

जहां पूरे प्रदेश में आज के समय में लोग ओरण-गोचर की जमीन पर कब्जा कर हथियाने की फिराक में तो कई जगहों पर अवैध खनन कर प्रकृति को नुकसान पहुंचाने की कोशिश में रहते हैं, इसे रोकने के लिए सरकार भी भरसक प्रयास कर रही है। इधर, पंचायत समिति कल्याणपुर क्षेत्र के थूंबली ग्राम पंचायत के तीन गांवों के ग्रामीण बुजुर्गों की पुरातन परंपरा को निभाते हुए गोचर की भूमि से लकड़ी काटना भी पाप समझते हैं।

इतना ही नहीं, ग्रामीणों ने मवेशियों के चारे के लिए पूरी गोचर भूमि को छोड़ रखा है, वहीं उनके पानी के लिए दो तालाबों का निर्माण करवा रखा है, जो वर्ष भर तक मवेशियों के पानी पीने के काम आता है। हम बात कर रहे हैं, ग्राम पंचायत थूंबली के राजस्व गांव खेड़ा, टिबाणिया व बगनावास की।

पास-पास स्थित इन तीनों गांवों के ग्रामीण आज भी बुजुर्गों की परंपरा का निर्वहन करते हुए गोचर की भूमि को चारागाह के लिए छोड़ रखा है। पुरान संस्कृति के अनुसार ओरण-गोचर भूमि को गायों व मवेशियों के लिए चारागाह माना जाता हैं, लोगांे के लिए इस जमीन को उपयोग में लेना तो दूर लकड़ी काटना तक पाप माना जाता है।

इसके बावजूद वर्तमान में अधिकांश गांवों में लोग ओरण-गोचर की भूमि पर कब्जा करने की फिराक में रहते हैं। ऐसे समय में ग्राम पंचायत थूंबली के तीनों राजस्व गांव दूसरों के लिए मिसाल है। खेड़ा, टिबाणिया व बगनावास तीनों ही राजस्व गांव के बुजुर्गों ने करीब 1500 बीघा गोचर भूमि चारागाह के लिए छोड़ रखी है।

इस जमीन पर एक इंच भी कब्जा नहीं है, इतना ही नहीं ग्रामीण इस जमीन से लकड़ी काटना भी पाप समझते हैं। वहीं इन तीनों गांवों के बीच तीन तालाबों का निर्माण करवा रखा हैं। जिसमें सबसे बड़ा बोटियासर तालाब है, इससे तीनों गांवों के ग्रामीण साल भर तक पानी पीते हैं। वहीं केरली नाडी व गोरलीनाडी दोनों ही मवेशियों के पानी के लिए छोड़ रखी है। बोटियासर तालाब पर बोटियासर बालाजी का मंदिर भी बना हुआ है, जो जन-जन की आस्था का केंद्र है।

वर्तमान में लोग ओरण-गोचर की भूमि पर कब्जा कर रहे हैं, इससे मवेशियों के लिए चारा-पानी की जगह नहीं होने से वे दर-दर भटकते रहते हैं। थूंबली ग्राम पंचायत की तरह ही दूसरों गांवों में ओरण-गोचर की जमीनों पर हो रखे अतिक्रमणों को हटाया जाना चाहिए। - पुरुषोत्तम गोयल, गो रक्षक, बालोतरा

तीनों गांवों में 1500 बीघा जमीन गोचर के लिए छोड़ी हुई हैगोचर भूमि में 1 इंच भी कब्जा नहीं है, जो बड़ी बात है।- गजाराम, पटवारी, थूंबली

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