जुनून / सरहद की रक्षा के साथ सीमावर्ती गांवों को कोरोना से बचाने में जुटी बीएसएफ

जैसलमेर. तपते धोरों पर कोरोना काल में मास्क पहनकर सीमा पर मुस्तैद बीएसएफ के जवान। जैसलमेर. तपते धोरों पर कोरोना काल में मास्क पहनकर सीमा पर मुस्तैद बीएसएफ के जवान।
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जैसलमेर. तपते धोरों पर कोरोना काल में मास्क पहनकर सीमा पर मुस्तैद बीएसएफ के जवान।जैसलमेर. तपते धोरों पर कोरोना काल में मास्क पहनकर सीमा पर मुस्तैद बीएसएफ के जवान।

  • आंधियां डिगा न सकी न कोरोना डरा सका, हमें हमारी राहों से न काफिले हटा सके क्योंकि हम हैं सतर्क
  • 50 डिग्री के नजदीक तापमान में तवे की तरह तपते धोरों पर मास्क पहनकर व सोशल डिस्टेंसिंग की पालना से सीमा की रक्षा कर रहे हैं

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 06:13 AM IST

जैसलमेर. सीमा सुरक्षा बल के जवान किसी भी दुश्मन से टकराने में डगमगाते नहीं है। चाहे सीमा पार से आने वाले दुश्मन हो या फिर प्राकृतिक आपदा का कहर, बीएसएफ ने हमेशा से ही राष्ट्रहित को सर्वोपरि माना है। ऐसे में कोरोना से जंग में भी बीएसएफ पीछे नहीं है। केवल खुद को बचाने की नहीं अपितु सीमावर्ती गांवों के लोगों को कोरोना से बचाने की चुनौती थी। बीएसएफ ने इस चुनौती का भी सामना किया और अब तक सीमावर्ती इलाके को कोरोना से बचाए रखा।
इतना ही नहीं वर्तमान में भी बॉर्डर इलाकों में कोरोना के प्रति जागरूकता के प्रयास किए जा रहे हैं।  बीएसएफ के सोशल मीडिया पेज की टैगलाइन है आंधियां डिगा न सकी और काेराेना डरा न सका। हमें हमारी राहों से न काफिले हटा सके, क्यों हम है सीमा सुरक्षा बल…। इसमें अब कोरोना भी जुड़ गया है, बीएसएफ ने हर चुनौती का डटकर मुकाबला किया है। 
संकट के इस काल में सीमा के वाशिंदों का ख्याल 
संकट के इस दौर में बीएसएफ सीमा पर रहने वाले वाशिंदों का पूरा ख्याल रख रहे हैं। आम दिनों में भी बीएसएफ अपने सिविक एक्शन प्रोग्राम के तहत कई तरह की सुविधाएं ग्रामीणों को उपलब्ध करवाते हैं। वर्तमान में गर्मी के इस मौसम में उनके लिए पानी की व्यवस्था की जा रही है, उसमें खासतौर पर सोशल डिस्टेंसिंग का भी ध्यान रखा जा रहा है। वहीं सीमावर्ती गांवों व ढाणियों में कोरोना से जागरूकता के लिए मास्क आदि बांटने के साथ ही इस कोरोना की पूरी जानकारी दी जा रही है।   
कोरोना को करारा जवाब 
देश में कोरोना संकट की शुरुआत में ही बीएसएफ ने अपने आप को सजग कर दिया। जवानों के कैम्पस से बाहर आने पर रोक लगा दी वहीं आवश्यक सेवाओं के लिए बाहर आने वालों को सभी तरह की सुविधाएं मुहैया करवा दी। गौरतलब है कि यदि बीएसएफ में कोरोना का असर होता ज्यादा मुश्किल हो सकती थी। देश की सेवा में जुटे जवानों को बचाने के लिए बीएसएफ पूरी तरह से सगज थी। 
तपती धरा पर डटे हुए हैं  
वर्तमान में सीमावर्ती क्षेत्र में पारा 50 डिग्री के करीब पहुंच चुका है। ऐसे में धोरे भट्टी की तरह तप रहे हैं। बावजूद इसके हमारे जवान गश्त में डटे हुए हैं। साथ ही धूल भरी आंधियों में भी उनके कदम डगमगाते नहीं है। इस हार्ड ड्यूटी के बावजूद भी किसी भी संकट से लड़ने के लिए बीएसएफ के जवान तैयार है। 
डीआईजी बीएसएफ एम.एस. राठौड़ से बातचीत
भास्कर : वर्तमान में सीमा पर क्या हालात है?
डीआईजी : सीमावर्ती इलाकों में हालात सामान्य है। लोगों में जो कोरोना का डर था उसके लिए जागरूकता के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्हें मास्क भी बांटे गए हैं। 
भास्कर : बीएसएफ कोरोना से कैसे लड़ रही है?
डीआईजी : बीएसएफ के जवान मास्क का उपयोग कर रहे हैं। सोशल डिस्टेंसिंग की भी पालना की जा रही है। साथ ही सैनेटाइजेशन पर जोर दिया जा रहा है। वहीं ग्रामीणों को मास्क, सेनेटाइजर आदि बांटने के साथ कोरोना से बचाव के उपाय बताए जा रहे हैं। 
भास्कर : सीमा पर बसे लोगों की क्या स्थिति है?
डीआईजी : उनके लिए बीएसएफ हमेशा से ही तत्पर है। वर्तमान में उनके लिए खासतौर पर पानी की व्यवस्था बीएसएफ की ओर से की जा रही है। इसके अलावा पशु खेळियों में भी पानी भरा जा रहा है ताकि मूक पशुओं को राहत मिल सके। 
भास्कर : गर्मी बढ़ रही है, इससे बचाव के लिए उपाय किए जा रहे हैं? 
डीआईजी : गर्मी हर साल रहती है। वर्तमान में भी पारा 50 के करीब पहुंच चुका है लेकिन हमारे जवान किसी भी मुसीबत का सामना करने के लिए तैयार है। गर्मी से बचाव के लिए नींबू पानी पर जोर दिया जा रहा है वहीं लू से बचाव के लिए भी सभी व्यवस्थाएं है।

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