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जैसलमेर:देगराम ओरण संरक्षण को लेकर दो दिन में 55 किमी की परिक्रमा पूरी, हर साल करवाने का निर्णय

जैसलमेरएक महीने पहले
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  • मंदिर की 35 हजार बीघा ओरण को बचाने के लिए निकाली परिक्रमा, जगह-जगह हुआ स्वागत

फतेहगढ़ तहसील के श्री देगराय मंदिर ट्रस्ट द्वारा श्री देगराय मंदिर के प्राचीन ओरण को बचाने व जनता को जागरूक करने के लिए दो दिवसीय श्री देगराय मंदिर ओरण की परिक्रमा का 20 सितंबर को श्री देगराय मन्दिर में समापन हुआ। 55 किलोमीटर की इस परिक्रमा का विभिन्न गांवों व ढाणियों में स्वागत करा गया। समापन के समय पीसीसी पूर्व महासचिव सुनीता भाटी, पूर्व विधायक सांग सिंह भाटी और पूरी परिक्रमा का हिस्सा रहे हाथीसिंह मूलाना उपस्थित रहे।

इस ओरण परिक्रमा का मुख्य उद्देश्य ओरण के चारों तरफ फैलती ऊर्जा कंपनियों, पावर लाइनों से ओरण को उस पर निर्भर वन्यजीवों व पारंपरिक पशुपालन को बचाने व सुरक्षित रखने के लिए जनजागरूकता लाने, ओरण की 35 हजार बीघा जमीन को राजस्व में दर्ज करवाने, संपूर्ण ओरण को डीम्ड फारेस्ट घोषित करवाने व ओरण के चारों तरफ स्थित बारानी व ट्यूबवेल खेतों को जैविक प्रमाणित करवाना है।

परिक्रमा में भागीदार रही भारतीय सांस्कृतिक निधी, इंटेक के बाड़मेर चैप्टर और ईआरडीएस संस्थान, जैसलमेर द्वारा मिलकर ओरण में सेवण चारागाह विकास, विभिन्न दुर्लभ मरुस्थलीय पर्यावरण के पौधों का बीज संग्रहण, स्थानीय वनस्पतियों का पौधरोपण व जल प्रबंधन के विषय पर चर्चा की गई। इस पूरे कार्यक्रम का नेतृत्व श्री देगराय उष्ट्र संरक्षण व दुग्ध विपणन समिति के अध्यक्ष सुमेरसिंह भाटी सांवता द्वारा किया गया।

मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष कल्याणसिंह भाटी द्वारा इस ओरण परिक्रमा कार्यक्रम को हर साल आयोजित करने का आह्वान भी किया गया। सुमेरसिंह सावंता ने बताया कि मां देगराय की ओरण 610 साल पुरानी है लेकिन वर्तमान और पिछली सरकारों की तथा जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण आज भी देगराय की 36 हजार बीघा जमीन ओरण के नाम से दर्ज नही हो पाई। हाथीसिंह मूलाना ने बताया कि कुल 60 हजार बीघा ओरण में से 24 हजार बीघा जमीन तो स्थानीय लोगों के लंबे संघर्ष के कारण 2004 में ओरण के नाम से श्री देगराय मंदिर ट्रस्ट के नाम हो गई।

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