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अब तक 184 फर्जी आवंटन के दस्तावेज मिले:4500 बीघा जमीन के फर्जी आवंटन का खुलासा 2016 में जारी बुक में चार साल पहले ही पट्‌टे जारी

जैसलमेरएक महीने पहले
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  • तत्कालीन तहसीलदार सहित 6 कर्मचारियों के खिलाफ एसीबी में एफआईआर दर्ज करने की तैयारी
  • पूर्व में 40 हजार बीघा जमीन के फर्जी आवंटन की जांच एसीबी के पास

नहरी क्षेत्र में एक के बाद एक जमीन घोटाले सामने आ रहे हैं। दावों के आधार पर फर्जी तरीके से जमीन आवंटन की जांच अभी एसीबी में चल ही रही है कि 4500 बीघा नहरी जमीन घोटाले का दूसरा मामला सामने आ गया। अब इस मामले में भी एसीबी एफआईआर दर्ज करने की तैयारी में है। जानकारी के अनुसार कुछ समय पहले उपनिवेशन विभाग को 17 संदिग्ध आवंटन मिले।

उसकी प्राथमिक जांच करने पर फर्जी पट्‌टे जारी होने की बात सामने आई। इस पर उपनिवेशन विभाग ने विभागीय जांच शुरू की। उपनिवेशन (सतर्कता) के अति.आयुक्त महावीरसिंह इस मामले की जांच कर रहे हैं। शुरूआती जांच 17 आवंटन की थी उसमें अब तक 184 आवंटन फर्जी पाए गए हैं। करीब 4500 बीघा जमीन का घोटाला सामने आ गया। बताया जा रहा है कि इस मामले में अभी और भी कई ऐसे आवंटनों का खुलासा हो सकता है।
तहसीलदार, पटवारी समेत पांच कार्मिकों के खिलाफ एफआईआर

विभागीय जांच में फर्जी आवंटन सामने आने पर एसीबी को मामला दर्ज करने की सूचना दी गई। प्रारंभिक जांच के बाद जैसलमेर एसीबी चौकी ने एफआईआर दर्ज करने की तैयारी कर ली है और इस संबंध में रिपोर्ट जयपुर भिजवाई गई।

एसीबी मुख्यालय जयपुर ने इस मामल में तत्कालीन तहसीलदार गजेन्द्रसिंह, वरिष्ठ सहायक योगेन्द्र, पटवारी चंद्रभान, विक्रमसिंह, किशोर, कनिष्ठ सहायक शिवराज सहित अन्य कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। गौरतलब है कि इसी मामले को लेकर विभागीय स्तर पर वरिष्ठ सहायक योगेन्द्र व पटवारी चंद्रभान के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है।

पहले भी फर्जीवाड़ा हुआ था 100 आवंटन खारिज किए गए

नाचना में ही दावों के आधार पर फर्जी तरीके से जमीन आवंटन करने का मामला पहले से ही चल रहा है। करीब 235 मामले ऐसे थे जिनमें गलत तरीके से जमीनें आवंटन की गई। पुरानी खातेदारी को पट्‌टा जारी करने के लिए सरकार ने नियम बनाए थे। उसमें दावा करने वाले को पुख्ता सबूत देने पड़ते थे।

इस मामले में गड़बड़ी यह की गई कि किसी के पास 50 बीघा की खातेदारी थी तो उसे 250 बीघा करके आवंटन कर दिया गया। इस तरह से करीब 40 हजार बीघा जमीन की बंदरबांट की गई। एक के बाद एक खुलासे हुए और अब तक 100 से अधिक आवंटन खारिज भी किए जा चुके हैं।

बिना फाइल के ही जारी कर दिए पट्‌टे
यह फर्जीवाड़ा पूर्व के घोटाले से थोड़ा अलग है। इसमें मिलीभगत से ऐसे आवंटन किए गए जिसमें किसी की फाइल तो आवंटन के लिए जमा ही नहीं है और केवल उन्हें पट्‌टे जारी कर दिए। जिस पट्‌टा बुक में 2006 से 2012 के ये आवंटन है वह पट्‌टा कमिश्नर कार्यालय से मई 2016 में जारी हुई थी। मतलब साफ है कि इन सभी को फर्जी पट्‌टे जारी किए गए हैं।

आवंटन रजिस्टर को भी कर दिया गायब
यह मामला जनवरी 2006 का है। उस समय अकील अहमद फारूखी कार्यवाहन उपायुक्त नाचना थे। उनका कार्यकााल छह माह का ही था। सूत्रों के अनुसार इस मामले में उपनिवेशन तहसील नाचना नं. एक का आवंटन रजिस्टर भी गायब है। जबकि तहसील नं. 2 में उस समय 54 आवंटन हुए थे। जो रजिस्टर गायब है उसमें जितने भी आवंटन है वे फर्जी बताए जा रहे हैं।

आग लगाकर दस्तावेज नष्ट किए

मार्च माह में इस मामले की जांच विभागीय स्तर पर शुरू हुई थी। उसके बाद जब इसकी भनक मिलीभगत करने वाले विभाग के कर्मचारियों व जिन लोगों के नाम जमीन के फर्जी आवंटन हुए हैं, उन्हें लगी तो उपनिवेशन कार्यालय नाचना के रिकार्ड रूम में 24 अप्रैल को आगजनी की घटना हुई। बताया जा रहा है कि दस्तावेज नष्ट करने की नीयत से जानबूझकर आग लगाई गई थी।

नाचना जमीन घोटाले को लेकर एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई चल रही है। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट बनाकर भेजी गई है। वहां से आदेश आते ही एफआईआर दर्ज कर ली जाएगी ।
-अन्नराजसिंह, अति. पुलिस अधीक्षक, एसीबी जैसलमेर।

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