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अनदेखी:हाईटेंशन लाइन के करंट से मादा गोडावण की मौत, तीन साल में 6 मर चुके

जैसलमेर10 दिन पहले
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  • गोडावण पर बिजली तारों का खतरा लगातार, बारिश के बाद छाई हरियाली में आ रहे हैं राज्य पक्षी , अब तक नहीं लगे है तारों पर बर्ड डायवर्टर

राज्य पक्षी गोडावण पर बिजली की तारों का खतरा लगातार मंडरा रहा है। बुधवार को देगराय ओरण में हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से एक मादा गोडावण की मौत हो गई। विभाग को घटना की जानकारी मिलते ही टीम मौके पर पहुंची और गोडावण के शव को अपने कब्जे में ले लिया।

गौरतलब है कि लगातार कम हो रही गोडावण की संख्या के बीच इस तरह की घटनाएं गोडावण संरक्षण के प्रयासों को बड़ा झटका है। जिस जगह यह घटना हुई है वह डीएनपी क्षेत्र नहीं है। इस जगह से करीब 10 किमी दूर रासला में क्लोजर बना हुआ है जहां कई बार गोडावण देखे जा चुके हैं। इस बीच अब खतरा और भी मंडराने लगा है।

आसपास के इलाके में हाईटेंशन तारों का जंजाल है और वर्तमान में चारों तरफ हरियाली होने से गोडावण के यहां आने की संभावना बनी रहती है। तारों की चपेट में आने से गोडावण जैसे लुप्त प्राय पक्षी की मौत ने गोडावण संरक्षण के प्रयासों को बड़ा नुकसान पहुंचाया है।

पिछले कई चार दशकों से गोडावण संरक्षण को लेकर कई योजनाएं चल रही है और इस बीच गोडावणों की अकाल मौत विशेषज्ञों को चिंतित कर देने वाली साबित हो रही है। 2017 से लेकर अब तक 6 गोडावण तारों की चपेट में आ चुके हैं। जहां एक तरफ लगातार गोडावण की संख्या कम हो रही है वहीं इस बीच इस तरह से गोडावण के काल का ग्रास बनना और भी परेशान कर देने वाला है।

अंडरग्राउंड केबलिंग या फिर बर्ड डायवर्टर विदेश से मंगवाए थे विशेष डायवर्टर

जानकारी के अनुसार तारों की चपेट में आने से गोडावण के मौत के मामले बढ़ने के बाद से यह चर्चा चल रही है कि या तो हाईटेंशन तारों को अंडरग्राउंड किया जाए या फिर बर्ड डायवर्टर लगाए जाए। लेकिन तीन चार सालों में जिम्मेदार किसी एक पर सहमत नहीं हो पाए हैं। इससे इस तरह की घटनाएं लगातार होती जा रही है। आखिरकार हाल ही में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि अंडरग्राउंड केबलिंग करना आसान नहीं होगा और साथ ही यह प्रोजेक्ट काफी महंगा साबित होगा।

ऐसे में बर्ड डायवर्टर लगाकर ही गोडावण को बचाने के प्रयास किए जाएं। हालांकि अभी तक यह निर्णय लिया गया है लेकिन सभी जगह बर्ड डायवर्टर नहीं लगे हैं। करीब तीन साल पहले तत्कालीन डीएफओ अनूप के.आर. ने इस मामले में कार्रवाई की थी और विदेश से विशेष प्रकार के बर्ड डायवर्टर सेम्पल के तौर पर मंगवाए थे। एक डायवर्टर की कीमत 50 डॉलर थी। इस तरह से 50 डायवर्टर मंगवाए गए थे और संबंधित बिजली कंपनी को दिए गए थे लेकिन एक साल तक डायवर्टर लगाए नहीं गए थे।

वजन ज्यादा होने हाईटेंशन तारों से टकरा जाते हैं गोडावण
जानकारी के अनुसार इन दिनों जिले भर में अच्छी बारिश हो रखी है। जिसके चलते गोडावण भी अपने विचरण स्थल से बाहर निकल रहे हैं। गोडावण का वजन ज्यादा होता है। हवा में उड़ते वक्त अचानक तारें सामने आने पर वह मूवमेंट नहीं कर पाते और तारों से टकरा जाते हैं। वजन ज्यादा होने के चलते अन्य पक्षियों की तुलना में गोडावण तारों की चपेट में ज्यादा आते हैं।

कौन है जिम्मेदार

इतनी घटनाएं होने के बावजूद बर्ड डायवर्टर नहीं लगाए गए हैं और एक और गोडावण की मौत हो गई। जिम्मेदारों की लापरवाही से घटनाएं बढ़ती जा रही है। जानकारों के अनुसार समय रहते सभी हाईटेंशन लाइनों पर बर्ड डायवर्टर लगा दिए जाते तो इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता था।

  • देगराय ओरण में हाईटेंशन तार की चपेट में आने से मादा गोडावण की मौत हुई है। घटना की जानकारी मिलते ही टीम मौके पर पहुंच गई थी। इस मामले में बर्ड डायवर्टर लगाने की योजना बनी हुई है और जल्द ही बर्ड डायवर्टर लग जाने पर इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लग सकेगा। - कपिल चंद्रवाल, डीएफओ, डीएनपी

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