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सफलता की कहानी:जैसलमेर जिले में पहली बार 14 युवाओं का आरएएस में चयन

जैसलमेर18 दिन पहले
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  • आरपीएससी की सबसे बड़ी भर्ती परीक्षा में युवाओं ने फहराया परचम, अधिकांश किसान परिवारों से

सीमावर्ती जिले को आमतौर पर पिछड़ा हुआ जिला ही माना जाता है। विभिन्न सुविधाओं से लेकर चिकित्सा व शिक्षा में जैसलमेर की गिनती प्रदेश के पिछड़े जिलों में होती है, लेकिन मंगलवार रात आए आरएएस के परिणाम में जैसलमेर के युवाओं ने बता दिया कि सुविधाएं भले ही कम हो लेकिन सफलता हासिल करना असंभव नहीं है। युवाओं ने विकट परिस्थितियों के बावजूद अपनी सफलता से बता दिया है कि सफलता के लिए मेहनत ही काफी है। जैसलमेर के इतिहास में पहली बार एक साथ 14 युवाओं का चयन आरएएस के लिए हुआ है।

जैसलमेर के इतिहास में यह पहला मौका है जब आरएएस की परीक्षा में इतने अभ्यर्थी एक साथ चयनित हुए है। इससे पहले भी जैसलमेर के अभ्यर्थियों का चयन होता था लेकिन इसमें संख्या बेहद कम थी। इस बार युवाओं की मेहनत ने साबित कर दिया है कि सफलता प्राप्त करने के लिए कोई भी वस्तु मायने नहीं रखती। इसका ही उदाहरण है कि जिस गांवों में मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है। ऐसे गांवों में पढ़कर भी होनहारों ने साबित कर दिया कि जैसलमेर के युवा अब जागरूक हो चुके है।

सिलेबस व सलेक्टेड मेटेरियल से अनुशासनित तरीके से की गई तैयारी से ही मिली सफलता, मेहनत व समर्पण के साथ साथ परिजनों ने दिया सहयोग

रमेश चारण

रमेश चारण फिलहाल उत्तमनगर में ग्राम विकास अधिकारी के पद पर कार्यरत है। रमेश ने बताया उनका सबसे पहली नौकरी पटवारी के रूप में लगी। पिता किसान थे तो शुरू से ही खेत में मेहनत के साथ वे कहते थे कि बिना मेहनत कुछ भी प्राप्त नहीं होता। रमेश चारण ने 108वीं रैंक प्राप्त की है। उन्होंने बताया कि सिलेबस से ही तैयारी करनी सबसे जरूरी है।

ललित चारण

सांगड़ गांव के ललित चारण का चयन आरएएस में हुआ है। परिवार में ललित चौथा शख्स है जो राजपत्रित अधिकारी है। ललित इससे पहले एयरफोर्स में गरुड कमांडों के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके है। इनके पिता उगमदान बारहठ डाइट में वरिष्ठ व्याख्याता, भाई अशोक चारण आईआरएस, छोटे भाई हिम्मत चारण वर्तमान में जालोर में पुलिस वृत्ताधिकारी है।

अभिषेक पालीवाल

ओढाणिया के निवासी अभिषेक पालीवाल ने आरएएस 2018 भर्ती में 382वीं रैंक हासिल कर गांव का नाम रोशन किया। अभिषेक एडवोकेट भंवरलाल पालीवाल के पौत्र है। हाल ही में अभिषेक का ग्राम विकास अधिकारी पद पर 2017 चयन हुआ था। नौकरी करने के साथ- साथ पढ़ाई करने का सिलसिला जारी रखा। पहली बार में ही उनका चयन आरएएस में हो गया।

नारायणसिंह बीदा

जैसलमेर के डीएनपी क्षेत्र के बीदा गांव के नारायणसिंह ने पहले ही प्रयास में आरएएस की परीक्षा 151वीं रैंक के साथ पास की। नारायणसिंह ने बताया कि उनके पिता पहले ग्रामसेवक व अब पंचायत प्रसार अधिकारी है। उन्होंने बताया कि विकट परिस्थितियां होने के बावजूद मेहनत पर जोर रखा। इसका परिणाम आज सबके सामने है।

प्रियंका राजपुरोहित

​​​​​​​लखा गांव की बहू ने आरएएस मे परचम लहरा दिया है। लखा की बहू प्रियंका राजपुरोहित ने आरएएस मे 247वीं रैक हासिल की। प्रियंका वर्तमान मे सेल टैक्स में जेसीटीओ पद पर कार्यरत है। प्रियंका के पति डॉ हंसराजसिंह डॉक्टर है। प्रियंका के पिता पहाड़सिंह एएसपी पद से सेवानिवृत है। भाई विकास जोधपुर जिला परिषद मे एसीईओ है।

महेंद्रसिंह राजपुरोहित

​​​​​​​ग्राम पंचायत लखा के निवासी महेंद्रसिह राजपुरोहित का प्रथम प्रयास में ही राजस्थान प्रशासनिक सेवा में 677वीं रैंक के साथ चयन हुआ है। महेंद्रसिंह ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी मेहनत के साथ साथ माता पिता तथा भाईयों को दिया। महेंद्रसिंह के पिता शिक्षा विभाग मे बीईईओ पोस्ट से सेवानिवृत हुए है। महेंद्रसिंह का चयन होने पर गांव मे खुशी की लहर छा गई।

अशोक कुमार

मंडाई गांव के अशोक कुमार का आरएएस में 597वीं रैंक में चयन होने पर परिजनों तथा गांव में खुशी की लहर छा गई। अशोक कुमार वर्तमान मे पंचायत समिति सम में ग्राम विकास अधिकारी के पद पर कार्यरत है। अशोक कुमार ने अपनी सफलता का श्रेय मेहनत के साथ साथ परिजनों तथा मित्रों को दिया।

दिलीप चारण

सांगड़ के निवासी दिलीप चारण का प्रथम प्रयास में ही आरएएस में चयन हो गया। दिलीप ने 589वीं रैंक के साथ परीक्षा पास की। दिलीप के पिता मोहनदान किसान है। दिलीप वर्तमान में अजमेर की केकड़ी उपखण्ड में वरिष्ठ अध्यापक है। दिलीप ने अपनी सफलता का श्रेय निरंतर पढाई तथा परिजनों को दिया।

जवानदान

​​​​​​​ जैसलमेर के छोटे से गांव मूलिया के जवान दान पूर्व में एक्स सर्विसमैन रह चुके हैं। उन्होंने एयरफोर्स में सार्जेंट के पद पर भी अपनी सेवाएं दी है। इसके बाद उनका चयन 2012 आरएएस में कॉपरेटिव इंस्पेक्टर के पद पर भी हो चुका था, लेकिन इसी बीच उन्होंने कॉलेज प्रोफेसर के रूप में भी चयन होने पर शिक्षा की तरफ रुख किया। अब आरएएस में 1605वीं रैंक से सफलता मिली।

नरेंद्र बामणिया

​​​​​​​ रामगढ़ के नरेंद्र बामणिया ने भी 1660वीं रैंक के साथ आरएएस की परीक्षा उत्तीर्ण की। उनके पिता शिक्षा विभाग से सेवानिवृत है। उन्होंने बताया कि बिना अनुशासन के तैयारी होना असंभव है। आप जब तैयारी करते है तो आपको अनुशासन में रहकर सभी सुख सुविधाओं का बहिष्कार करना पड़ता है। इसके साथ ही तैयारी के लिए पूरी तरह से डेडिकेट होने की जरूरत होती है।

हुकमीचंद

जैसलमेर के मोकला गांव के हुकमीचंद पहले भी आरएएस की परीक्षा पास कर चुके है। फिलहाल वे बाप में नायब तहसीलदार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे है। उन्होंने बताया कि हालांकि उन्हें अपनी चाहत थी उतनी रैंक नहीं आई है, लेकिन मेहनत करना अपने आप में नशा है। उन्होंने एकमात्र मेहनत के नशे को ही अपने आप पर लागू करने की बात कही।

उगमसिंह

​​​​​​​सेतरावा गांव के पास वीरम देवगढ़ के निवासी उगमसिंह फिलहाल जैसलमेर में वायरलैस हैड कांस्टेबल के पद पर कार्यरत है। उगमसिंह के पिता महावीरसिंह भी पुलिस कंट्रोल रूम जोधपुर में कांस्टेबल ड्राइवर के पद पर पदस्थापित हैं। पिछले 2 प्रयास में असफलता के बावजूद धैर्य व लगातार मेहनत से 452वीं रैंक से आरएएस में चयन हुआ।

पीयूष गर्ग

जैसलमेर के झिनझिनयाली के पास गुहड़ा गांव के पीयूष गर्ग पिछली परीक्षा में 9 नंबर से चूक गए थे। इसके बाद उन्होंने परीक्षा पास करने की ठान ली और एससी में 77वीं रैंक के साथ परीक्षा पास कर ली। उन्होंने बताया कि परिस्थितियां कभी भी अनुकूल नहीं होती। हमेशा विपरीत परिस्थितियों के बावजूद सफल होने का नाम ही परीक्षा है। पीयूष फिलहाल उदयपुर के गोगुंदा में पटवारी है।

दानाराम पंवार

​​​​​​​जैसलमेर के देवा गांव के दानाराम पंवार ने तीसरे प्रयास में आरएएस की परीक्षा पास की है। उन्होंने बताया कि वे चौधरियां में तृतीय श्रेणी अध्यापक के पद पर कार्यरत है। काफी विकट परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने प्रयासों में कभी कमी नहीं आने दी। इसका ही नतीजा है कि उन्होंने 1721वीं रैंक के साथ आरएएस की परीक्षा पास की।

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