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पेयजल संकट:पहली बार नहरबंदी से शहर में पानी का संकट नहीं, मॉनिटरिंग से छीजत भी रोकी

जैसलमेर17 दिन पहले
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शहर के गजरुप सागर के फिल्टर प्लांट का दृश्य। - Dainik Bhaskar
शहर के गजरुप सागर के फिल्टर प्लांट का दृश्य।

हर साल 25 से 30 दिन की नहरबंदी में शहर की सुचारू सप्लाई के लिए नगरपरिषद के हाथ पांव फूल जाते। कभी भी पूरा पानी नहीं मिला, सप्लाई 4 से 6 दिन के अंतराल में होती और शहर में पानी के लिए हाहाकार मच जाता। नहरबंदी के दौरान पेयजल संकट गहराने पर लोगों को कई बार विरोध प्रदर्शन तक करने पड़ते। 5 साल पहले तो शहरवासियों ने कलेक्ट्रेट का घेराव भी किया था।

इस दौरान हर बार नहरबंदी में शहर को पानी के लिए तरसना पड़ा है। लेकिन इस बार नगरपरिषद सभापति हरिवल्लभ कल्ला, आयुक्त शशिकांत शर्मा, सहायक अभियंता गोपाल मीणा सहित उनकी टीम ने पहले से ही प्रभावी रणनीति तैयार कर ली और क्लोजर के दौरान शहरवासियों को पर्याप्त पानी मिला। टीम वर्क के साथ साथ पानी की छीजल रोकी, जिससे सप्लाई सुचारू बनी रही।

इस साल 70 दिन रहा क्लोजर: इस बार 70 दिन का क्लोजर था। पंजाब में मुख्य केनाल में नहर की मरम्मत के कारण क्लोजर लिया गया। ऐसी आशंका थी कि पानी को लेकर मुसीबत खड़ी हो जाएगी लेकिन एक बार भी पानी को लेकर हाहाकार नहीं मचा।

9 नए ट्यूबवैल और 6 पुराने तैयार किए नगरपरिषद ने 9 ट्यूबवैल नए खुदवाए। जिसमें 4 गजरूपसागर में और 5 डाबला में। डाबला के तीन पुराने ट्यूबवैलों को तैयार किया। इनसे रोजाना 27 लाख लीटर पानी मिला जिससे शहर की सप्लाई में काफी राहत मिली

मॉनिटरिंग से पानी की छीजत घटी,सप्लाई बाधित नहीं
सहायक अभियंता गोपाल मीणा ने बताया कि इस बार शहर को पानी सप्लाई करना चुनौती भरा था। इसलिए हमने मैनेजमेंट प्लान बनाया और प्रोडक्शन सेंटर मोहनगढ़ से लेकर बीपी टैंक के पंप चालक से लगातार संपर्क में रहे। जहां जितनी सप्लाई होनी थी उससे थोड़ी भी ज्यादा नहीं होने दी। मोहनगढ़ से 10 से 12 एमएलडी पानी मिला और शहर की खपत 15 एमएलडी है। इसलिए मॉनिटरिंग करते हुए पानी की छीजत नहीं होने दी। दिन व रात मॉनिटरिंग की और 48 से 72 घंटे के भीतर सप्लाई की। सोनार दुर्ग में तो 24 घंटे के अंतराल में निरंतर सप्लाई की गई।

अब जैसलमेर शहर में पेयजल संकट नहीं गहराएगा
जैसलमेर शहर की आपूर्ति तो मामूली बिजली गुल होने पर ही बाधित हो जाता है। नहरबंदी में तो कभी भी पूरा पानी नहीं मिला। इस बार की रणनीति और नए ट्यूबवैल पर आगे भी काम चलता रहा तो शहर में कभी भी पानी की कमी नहीं रहेगी।

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