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तालाबों पर कुरजां ने डाला डेरा:सात समंदर पार से आए विदेशी मेहमान, इस बार एक सप्ताह पहले पहुंचे, ठंड से बचने के लिए करते हैं हजारों मीलों का सफर

जैसलमेर21 दिन पहले
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प्रवासी पक्षी कुरजां। - Dainik Bhaskar
प्रवासी पक्षी कुरजां।

हजारों मीलों का सफर तय करके कुछ विदेशी मेहमान बिन बुलाए सरहदों को लांघ इन दिनों जैसलमेर आए हैं। कहने को तो ये विदेशी पक्षी है, लेकिन सदियों से जैसलमेर की आबोहवा में ऐसे घुल मिल गए है। यहां इनके लिए लोक कलाकारों ने "कुरजां म्हारी हालो नी" जैसे लोक गीत भी बनाए और आज भी गाए जा रहे हैं।

देगराय ओरण की जमीन पर प्रवासी पक्षी कुरजां।
देगराय ओरण की जमीन पर प्रवासी पक्षी कुरजां।

तालाबों पर बनाया बसेरा
जिले में इन दिनों लाठी और देगराय ओरण की जमीन पर चार महीने बाद प्रवासी पक्षी कुरजां ने एक बार फिर उतरना शुरू कर दिया है। इन दिनों लाठी के आसपास के इलाकों के तालाबों और देगराय ओरण के तालाबों पर इनको झुंड में देखा जा सकता है। कुछ कुरजां गांव के ऊपर मंडरा रही है। पूर्वी यूरोप, मंगोलिया, कजाकिस्तान, पाकिस्तान के रास्ते जैसलमेर पहुंचा कुरजां का पहला दल इन दिनों कई इलाकों में देखा जा रहा है।

तालाब पर कुरजा का झुंड।
तालाब पर कुरजा का झुंड।

एक सप्ताह पहले ही पहुंच गई कुरजां
देगराय क्षेत्र में कुरजां की दस्तक के साथ ही गांव के पक्षी प्रेमियों के चेहरों पर खुशी नजर आई। जानकारों के अनुसार देगराय मंदिर के पास स्थित तालाब पर पहली बार कुरजां उतरी है। हर साल कुरजां का दल सितंबर महीने के पहले हफ्ते में जैसलमेर पहुंचता है। इस बार कुरजां का एक दल एक सप्ताह पहले ही देगराय पहुंचा और तालाब पर डेरा बनाया। वन्य जीव प्रेमियों को उम्मीद है कि अब जैसलमेर की आबोहवा कुरजां की मधुर कूक से गूंज उठेगी और कुरजां का दीदार करने वालों का भी यहां मेला लगेगा।

तालाब के किनारे कुरजां पक्षी का डेरा।
तालाब के किनारे कुरजां पक्षी का डेरा।

6 महीने तक रहता है प्रवास
दक्षिण पूर्वी यूरोप एवं अफ्रीकी भू-भाग में डेमोसाइल क्रेन के नाम से विख्यात कुरजां पक्षी अपने शीतकालीन प्रवास के लिए हर साल हजारों मीलों की उड़ान भरकर भारी तादाद में क्षेत्र के देगराय ओरण और लाठी इलाके के तालाबों तक आते हैं। मेहमान परिंदों का आगमन सितंबर महीने के पहले हफ्ते से शुरू हो जाता है और करीब छह महीने तक प्रवास के बाद मार्च में पुनः वापसी की उड़ान भर जाते हैं।

एकांत में रहने वाला शर्मिला पक्षी
एकांत प्रिय मिजाज का यह पक्षी अपने मूल स्थानों पर इंसानी आबादी से काफी दूर रहता है। लेकिन जहां डेरा डालते हैं वहां इंसानी दखल को नापसंद नहीं करते हैं। ग्रामीण भी कुरजां को अपना मेहमान समझकर उनकी पूरी देखभाल एवं सुरक्षा करते हैं। देगराय ओरण के वन्य जीव प्रेमी सुमेर सिंह भाटी ने बताया कि सितंबर के पहले सप्ताह में कुरजां जैसलमेर में अपना डेरा जमाती है, लेकिन इस बार 1 सप्ताह पहले ही कुरजां ने अपना पड़ाव डाल लिया है। अब कुरजां मार्च तक यहीं प्रवास करेगी।

फोटो- सुमेर सिंह भाटी, राधेश्याम पेमानी

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